BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL Astrology GOSSIP CORNER SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की तबाही की उल्टी गिनती शुरू!

Monday - October 7, 2019 1:07 pm , Category : WTN HINDI
आतंकी संगठनों पर नकेल कसने में नाकामयाब रहा पाकिस्तान
आतंकी संगठनों पर नकेल कसने में नाकामयाब रहा पाकिस्तान

FATF के पैमाने पर फेल साबित हुआ पाकिस्तान, बढ़ा ब्लैक लिस्टेड होने का ख़तरा

OCT 07 (WTN) – लगता है आतंकियों को शरण देने वाला पाकिस्तान कभी नहीं सुधरने वाला देश साबित होने वाला है। और इसी आधार पर यदि पाकिस्तान को एक आतंकी देश या फ़िर असफ़ल देश कहा जाए तो कुछ भी ग़लत नहीं होगा। जैसा कि आप जानते हैं कि FATF (Financial Action Task Force) इन दिनों पाकिस्तान पर काफ़ी सख्ती बरत रहा है। FATF की एशिया पैसिफिक ग्रुप ने पाकिस्तान को पहले से ही ग्रे लिस्ट में डाल रखा है। लेकिन आतंकियों को होने वाले फण्डिंग को रोकने में नाकामयाब साबित हो रहा पाकिस्तान अब इसकी ब्लैक लिस्ट में भी शामिल हो सकता है।
 
इस बारे में FATF के एशिया पैसिफिक ग्रुप का कहना है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ इमरान ख़ान सरकार ठोस और परिणात्मक क़दम उठाने में नाकाम रही है। वहीं ग्रुप का कहना है कि पाकिस्तान सरकार ने UNSCR 1267 की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में भी अपनी नाकामी साबित की है। ग्रुप का साफ़तौर पर कहना है कि मुम्बई हमलों का मास्टरमाइण्ड हाफ़िज़ सईद पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा है और पाकिस्तान की सरकार उस पर कोई भी कार्रवाई नहीं करती है। वहीं लश्कर-ए-तैयबा, जमाद उद दावा और फलाह-ए-इंसानियत जैसे आतंकी संगठन बिना किसी रोकटोक के पाकिस्तान में काम कर रहे हैं।

पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए FATF के एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) ने म्यूचुअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट ऑफ़ पाकिस्तान में कहा है, “इमरान ख़ान सरकार को उन आतंकी संगठनों और उनके वित्तीय स्रोतों की पहचान करना होगी और उन पर कार्रवाई भी करना होगी।” पाकिस्तान को ज़ोरदार फटकार लगाते हुए APG ने कहा है कि पाकिस्तान को अब यह समझना होगा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई की बात वो सिर्फ़ शब्दों से ना करे, उन पर कार्रवाई भी करे।
 
ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान की सरकार, सेना और आतंकियों के बीच सम्बन्धों के बारे में FATF जानता नहीं है। FATF के एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने से पहले भी चेताया था और समझाया था कि वो आतंकी संगठनों के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई करे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आतंकी संगठनों पर ठोस कार्रवाई करने के लिए FATF ने पाकिस्तान को 15 महीने का समय दिया था। साथ ही पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए उसे ग्रे लिस्ट में भी डाल दिया था, लेकिन भारत में आतंक के दम पर अशन्ति फैलाने वाले पाकिस्तान को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा।

FATF ने आतंकी संगठनों पर ठोस कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान को 27 बिन्दुओं पर काम करने के निर्देश दिये थे, लेकिन पाकिस्तान ने FATF के तमाम दिशा निर्देशों को नज़रअंदाज़ करते हुए आतंकी संगठनों के ख़िलाफ़ कोई ठोस क़दम नहीं उठाए। अब जबकि 13 से 18 अक्टूबर के बीच FATF की वार्षिक बैठक पेरिस में होने जा रही है, कहा जा रहा है कि FATF का एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कर सकता है।
 
दरअसल, APG ने जो रिपोर्ट जारी की है उसमें मनी लॉन्ड्रिंग तथा टेरर फण्डिंग के ख़िलाफ़ कार्रवाई के 10 मापदण्डों में से 8 मापदण्डों में पाकिस्तान असफ़ल साबित हुआ है, जबकि एक मापदण्ड में उसे ‘मध्यम’ स्थान हासिल हुआ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि FATF (Financial Action Task Force) हवाला कारोबार पर लगाम लगाने के लिए 1989 में बना एक अंतरदेशीय संगठन है। साल 2001 में इसके अधिकार को बढ़ा दिया गया, और अब यह फोर्स आतंक के लिए होने वाली फण्डिंग पर रोक लगाने का प्रयास भी करता है।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत बद से बदतर होती जा रही है। दिनों-दिन बढ़ते विदेशी क़र्ज़, महंगाई, डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी करेंसी में लगातार जारी गिरावट और विदेश मुद्रा भण्डार में कमी के चलते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से मिल रहे क़र्ज़ और सहायता के भरोसे है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से पाकिस्तान को क़र्ज़ अब उसी परिस्थिति में मिल सकता है, जब वो आतंकी संगठनों की फण्डिंग पर रोक लगाए। लेकिन पाकिस्तान की सरकार ऐसा करने में हमेशा से ही असफ़ल साबित होती आई है।

ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों पर कार्रवाई का दबाव कोई ताज़ा घटनाक्रम नहीं है। बल्कि आपकी जानकारी के लिए बता दें कि UNSCR 1267 कमेटी की रिपोर्ट में साल 2008 में ही जमाद उद दावा और साल 2012 में फलाह-ए-इंसानियत को FATF की प्रतिबंधित सूची में डाल दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान में ये दोनों संगठन खुलेआम जनसभाएं करते हैं और फण्ड जुटाते हैं।

APG की रिपोर्ट में साफ़-साफ़ कहा गया है कि मीडिया में ऐसी कई ख़बरें आई हैं, जिनमें मानवीय राहत और सहायता के नाम पर पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को चन्दा वसूलते देखा गया है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान में इन आतंकी संगठनों को इतनी छूट है कि यह एम्बुलेन्स सेवाएं तक जारी करते हैं। लेकिन तमाम तरह की चेतावनी दिये जाने के बाद भी पाकिस्तान सरकार आतंकी संगठनों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिन देशों को FATF ब्लैकलिस्ट में डाल देता है, उन देशों को 'हाई रिस्क' माना जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन देशों में जनता की बेहतरी के लिए दिया गया अंतरराष्ट्रीय फण्ड आतंकी संगठनों तक पहुंचने का एक बहुत बड़ा ख़तरा रहता है। यदि पाकिस्तान FATF द्वारा ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाता है, तो उसे मिलने वाली अंतर्राष्ट्रीय मदद पर रोक लग जाएगी, और यदि ऐसा होता है तो पहले से ही बदहाल आर्थिक हालत से गुजर रहे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दीवालिया भी हो सकती है।
 
साफ़ ज़ाहिर है कि सालों से पाकिस्तान की सरकारें आतंकी संगठनों को पनाह देती रही हैं, ताकि ये आतंकी संगठन भारत में आतंक फैला सकें। लेकिन पाकिस्तान की यह नीति अब उसके लिए ही भस्मासुर साबित होने जा रही है। क्योंकि, यदि पाकिस्तान को FATF ने ब्लैक लिस्ट में डाल दिया, तो पाकिस्तान को विदेशी फण्डिंग मिलने पर रोक लगा जाएगी और ऐसा होने पर पहले से ही विदेशी फण्डिंग के भरोसे चल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी।