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आपको मनोरोगी बना रहा है सोशल मीडिया!

Friday - October 11, 2019 11:34 am , Category : WTN HINDI
अपने क़ीमती वक़्त को सोशल मीडिया पर ना करें बर्बाद
अपने क़ीमती वक़्त को सोशल मीडिया पर ना करें बर्बाद

ज़रूरत से ज़्यादा सोशल मीडिया पर वक़्त बिताना है ख़तरनाक

OCT 11 (WTN) – भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में मोबाइल इंटरनेट क्रान्ति आने के बाद से बहुत से क्षेत्रों में क्रान्तिकारी परिवर्तन हुए हैं। मोबाइल इंटरनेट सस्ता होने के बाद देश में सबसे ज़्यादा सामाजिक क्षेत्र में परिवर्तन देखे गये हैं, जिसे आप सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही स्थिति में देख सकते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि इंटरनेट क्रान्ति के बाद देश में लोगों का काफ़ी समय और पैसा उन कामों के लिए बचा है, जिन्हें करने के लिए उन्हें काफ़ी समय और पैसा ख़र्च करना पड़ना था।  
 
जैसा कि आप जानते हैं कि बैंक, वित्त, बिलिंग, रेल टिकिट और अन्य कामों के लिए एक आम व्यक्ति को घण्टों लाइनों में लगना पड़ता था, और तब कहीं जाकर उसका काम पूरा हो पाता था। इन जगहों पर लाइन में लगने से समय के साथ-साथ वहां आने-जाने का पैसा भी ख़र्च होता था। वहीं नौकरी करने वाले या व्यापारी बड़ी मुश्किल से इन कामों के लिए समय निकाल पाते थे। लेकिन मोबाइल इंटरनेट क्रान्ति के बाद से यह सब कुछ काफ़ी आसान हो गया है। पहले जिन कामों के लिए आपको घण्टों लाइन में लगना पड़ता था और आने-जाने में समय और पैसा ख़र्च करना पड़ता था, अब वे सभी काम मोबाइल पर आसानी से हो जाते हैं।
 
यानी कि साफ़ है कि एक जागरुक व्यक्ति मोबाइल पर ही वे सभी ज़रूरी काम निपटा लेता है, जिनके लिए कभी उसे लाइनों में लगना पड़ता था। अब चुंकि व्यक्ति के समय और पैसे की बचत हो रही है, इस कारण से अब व्यक्ति सोशल मीडिया पर ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने लगा है। एक सर्वे के मुताबिक़ एक आम भारतीय व्यक्ति अपना क़ीमती समय इन दिनों सोशल मीडिया पर ज़्यादा ख़र्च कर रहा है। कहने को तो मोबाइल के ज़रिये कई ज़रूरी काम घर बैठे होने लगे हैं तो इस परिस्थिति में इंसान के पास पर्याप्त समय होना चाहिए, लेकिन हक़ीकत है कि सोशल मीडिया में व्यस्त रहने के कारण इंसान के पास आजकल ख़ुद के ज़रूरी कामों के साथ-साथ दूसरों के लिए समय की भी कमी हो गई है।

सोशल मीडिया की ऐसी लत लोगों को लग चुकी है कि वे अपना क़ीमती समय घण्टों सोशल मीडिया पर बिता देते हैं। दरअसल, सोशल मीडिया के ज़रिये इंसान को लगता है कि वो अपने मित्रों और परिजनों से कनेक्ट रहता है, लेकिन वास्तव में वो अपना क़ीमती समय बर्बाद कर रहा होता है। वहीं सोशल मीडिया आजकल स्टेटस सिम्बल दिखाने का एक माध्मय बन गया है। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर लोगों को वीडियो और फ़ोटो शेयर करने की आदत लग जाती है, तो वहीं कुछ लोग अपने वीडियो, फ़ोटो और पोस्ट पर कमेण्ट्स और लाइक का जूनून के हद तक बेसब्री से इंतज़ार करते हैं।

लेकिन यदि आप ज़रूरत से ज़्यादा समय सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऐसा करने से आपके मानसिक रोगी होने का ख़तरा बहुत ज़्यादा है। जी हां एक रिपोर्ट के मुताबिक़, यदि आप रोज़ाना दो घण्टे से ज़्यादा सोशल मीडिया पर व़क्त बिताते हैं तो आपके मानसिक रोगी होने की आशंका काफ़ी बढ़ जाती है!

दरअसल, सोशल मीडिया आजकल एक नशे की तरह हो गया है। फ्री समय हो या फ़िर नौकरी या व्यापार का समय, एक आम भारतीय इंसान अपना काफ़ी वक़्त सोशल मीडिया पर बिताने लगा है। यहां तक कि यदि उसे दिन में अपनी व्यस्त जीवनचर्या के कारण सोशल मीडिया पर वक़्त बिताने का समय नहीं मिल पा रहा है, तो वो रात में जागकर और अपनी नींद ख़राब कर सोशल मीडिया पर ज़्यादा से ज़्यादा ध्यान दे रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक़, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक और टिकटॉक पर ज़्यादा समय बिताने से मनोरोगी होने की आशंका काफ़ी बढ़ रही है। इतना ही नहीं, वेब सीरीज़, गेमिंग और इनकम का लालच देने वाले सोशल मीडिया ऐप्स पर लोग ज़्यादा से ज़्यादा समय बिता रहे हैं, और इनके कारण इनके यूज़र्स के अवसाद में जाने की आशंका काफ़ी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर ज़्यादा वक़्त बिताने के कारण यूज़र्स को भूलने की बीमारी भी होने लगी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल 14 से 24 वर्ष के युवा कर रहे हैं, इसलिए इन लोगों को दिमागी रोग होने की आशंका सबसे ज़्यादा है।

दरअसल, देखा गया है कि सोशल मीडिया पर वीडियो, फ़ोटो या आर्टिकल पोस्ट करने पर लाइक और कमेण्ट ना मिलने का सीधा असर सोशल मीडिया यूज़र्स पर होता है। कई यूज़र्स लाइक और कमेण्ट ना मिलने पर ख़ुद को कमतर समझने लगते हैं, जिसके कारण भावनात्मक रूप से कमज़ोर यूज़र्स अवसाद में चले जाते हैं। इतना ही नहीं, कई लोग भावनात्मक रूप से इतने ज़्यादा कमज़ोर होते हैं कि सोशल मीडिया पर लाइक या कमेण्ट ना मिलने पर ख़ुद को इसके लिए ज़िम्मेदार मान लेते हैं और गुमसुम और उदास से रहने लगते हैं।

माना कि मोबाइल आपकी ज़रूरत के कामों को सेकेण्डों में पूरा करता है, लेकिन मोबाइल पर सोशल मीडिया का ग़लत तरीक़े से इस्तेमाल आपको मनोरोगी बना सकता है। हमारी आपको सलाह है कि आप सोशल मीडिया पर कम से कम समय बिताएं और ज़्यादा से ज़्यादा समय ख़ुद के लिए और अपने मित्रों और परिजनों के लिए दें। अपने समय का इस्तेमाल अपनी सेहत बनानें, ज्ञान और जानकारी बढ़ाने और नौकरी-व्यापार पर दें। वहीं सोशल मीडिया जैसी आभासी दुनिया में मिलने वाले लाइक्स और कमेण्ट्स से ख़ुद के व्यक्तित्व का आंकलन ना करें और कभी भी ख़ुद को कमतर नहीं समझें।
 
याद रखिए आपकी ज़िन्दगी आपके लिए और आपके परिजनों के लिए अमूल्य है, जो कि आपके पास हैं और साथ हैं। सोशल मीडिया जैसी आभासी दुनिया पर बनने वाले मित्रों के लाइक्स और कमेण्ट्स से ख़ुद का आंकलन ना करें और ख़ुद को मानसिक रूप से इतना मजबूत बनाइये कि सोशल मीडिया का असर आपकी निजी ज़िन्दगी पर ना पड़े।

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