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​यदि ऐसा ही रहा तो चंद दिनों बाद पाकिस्तान नहीं कर पाएगा विदेश से ख़रीदी!

Saturday - October 12, 2019 3:45 pm , Category : WTN HINDI
पाकिस्तान की आर्थिक हालत हुई बद से बदतर
पाकिस्तान की आर्थिक हालत हुई बद से बदतर

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भण्डार में आई भारी गिरावट, तेज़ी से बढ़ेगी महंगाई

OCT 12 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि आतंक को पनाह देने वाला देश पाकिस्तान इस समय अपनी ही ग़लतियों के कारण भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। जब से इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तभी से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बदहाली का सामना कर रही है। हालांकि, दिखाने और कहने के लिए इमरान ख़ान लगातार ऐसे क़दम उठा रहे हैं, जिससे पाकिस्तान कि अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सके, लेकिन इमरान ख़ान के इन दिखावटी क़दमों का कुछ भी सकारात्मक असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ रहा है।  
 
लगातार ख़राब होती पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब इस दौर में पहुंच गयी है कि पाकिस्तान को अब विदेशों से सामान ख़रीदना भी मुश्किल हो गया है। ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भण्डार में बड़ी गिरावट आई है। पाकिस्तान के केन्द्रीय बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक़, 4 अक्टूबर तक पाकिस्तान का लिक्विड फॉरेन रिज़र्व सिर्फ़ 14.992 अरब डॉलर ही बचा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले 27 सितम्बर तक पाकिस्तान का कुल फॉरेन रिज़र्व 15.003 अरब डॉलर था।

साफ़ ज़ाहिर है कि विदेशी मुद्रा भण्डार कम होने के कारण पाकिस्तान के लिए विदेशों से सामान ख़रीदना अब कुछ दिनों बाद बेहद ही मुश्किल होने वाला है। और यदि विदेश से सामान ख़रीदी में पाकिस्तान को परेशानी आती है, तो इसके कारण पाकिस्तान में महंगाई तेज़ गति से बढ़ेगी, जिससे पाकिस्तान की आम जनता का जीना दूभर हो जाएगा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विदेशी मुद्रा भण्डार किसी भी देश की केन्द्रीय बैंक के पास रखी गई वो धनराशि या अन्य एसेट्स होते हैं, जो ज़रूरत पड़ने पर देनदारियों (कर्ज़) के भुगतान में काम आते हैं। वहीं विदेशी मुद्रा भण्डार के आधार पर केन्द्रीय बैंक करेंसी जारी करता है। सरकार और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा जो राशि केन्द्रीय बैंक में जमा की जाती है, उसे भी विदेशी मुद्रा भण्डार कहते हैं। विदेशी मुद्रा भण्डार एक या एक से अधिक मुद्राओं में रखे जाते हैं। देखा गया है कि ज़्यादातर डॉलर और कुछ हद तक यूरो, विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल होती है। विदेशी मुद्रा भण्डार को फॉरेक्स रिज़र्व या एफ़एक्स रिज़र्व भी कहा जाता है।
 
क्रिकेटर से राजनेता और पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने इमरान ख़ान की नीतियों के कारण पाकिस्तान की आर्थिक हालत बद से बदतर हो चुकी है। जब से इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, इमरान ख़ान ने विदेश से रिकॉर्ड क़र्ज़ ले लिया है। “नया पाकिस्तान” बनाने के वादे के साथ सत्ता में आए इमरान ख़ान के एक साल के ही शासनकाल में पाकिस्तान की आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर इतनी दुर्गति हो चुकी है कि जितनी पहले कभी नहीं हुई थी।
 
हालत यह है कि इमरान ख़ान की दिशा हीन आर्थिक नीतियों के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कंगाली के कगार पर खड़ी हो गई है। पाकिस्तान की हालत यह है कि उस पर दिनों-दिन विदेशी क़र्ज़ बढ़ता ही जा रहा है। जानकारी के मुताबिक़, इमरान ख़ान सरकार के एक साल के कार्यकाल में पाकिस्तान के कुल क़र्ज़ में 7,509 अरब (पाकिस्तानी) रुपये की वृद्धि हुई है।

 
पाकिस्तान की इस आर्थिक बदहाली के लिए खुद पाकिस्तान ही ज़िम्मेदार है। दरअसल, इमरान ख़ान सरकार ने जिन आतंकवादियों को पनाह दे रखी है, वे आतंकवादी ही पाकिस्तान की बदहाली कि लिए ज़िम्मेदार हैं। पूरी दुनिया जानती है कि भारत में आतंक फ़ैलाने के लिए पाकिस्तान ने आतंकवादियों को ट्रेनिंग और पनाह दी है। पाकिस्तान के ज़मीन पर पल और बढ़ रहे यही आतंकी पाकिस्तान के लिए अब सबसे बड़ा ख़तरा बन चुके हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान को अपनी बदहाल आर्थिक हालत सुधारने के लिए विदेश से बड़े मात्रा में क़र्ज़ की ज़रूरत है, लेकिन FATF (Financial Action Task Force) के चलते पाकिस्तान को विदेश से मिलने वाली बहुत कुछ आर्थिक सहायता रूक गई है और आगे भविष्य में भी रूक सकती है।
 
दरअसल, टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नज़र रखने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था FATF का मानना है कि पाकिस्तान आतंकी फण्डिंग को रोकने में असफल साबित हुआ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि FATF का एशिया पैसेफिक ग्रुप (APG) पहले ही पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से ब्लैक लिस्ट में डाल चुका है। अब अगले सप्ताह पेरिस में होने वाली बैठक में FATF पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से गिराकर ब्लैक लिस्ट में डाल सकता है।

पाकिस्तान की बदतर आर्थिक हालत के लिए इमरान ख़ान को उनके देश में ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है। लेकिन पाकिस्तान की इस हालत के लिए वहां की सेना ही ज़्यादा ज़िम्मेदार लगती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान में ख़ुद का अस्तित्व बनाए रखने के लिए पाकिस्तान की सेना, आईएसआई के साथ मिलकर आतंकियों को ट्रेनिंग देती है और आतंकियों को भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए भेजती रहती है।

इतना ही नहीं, पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठन चंदा इक्कठा कर आतंकियों को आर्थिक रूप से सहायता करते रहते हैं। साफ़ ज़ाहिर है कि आतंकियों की पनाहगार बन चुके पाकिस्तान से पूरी दुनिया व्यापारिक गतिविधियां कम से कम करने में ही दिलचस्पी लेती है। वहीं बालाकोट एअर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान द्वारा भारत से व्यापार बंद करने के मूर्खतापूर्ण फ़ैसले के कारण भी पाकिस्तान की आर्थिक हालत बिगड़ती जा रही है। साफ़ ज़ाहिर है कि पाकिस्तान वर्तमान में अपनी बदहाल आर्थिक हालत के लिए ख़ुद ही ज़िम्मेदार है। ऐसे में देखना होगा कि आख़िर कब तक पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को दिवालिया होने से बचा पाता है?

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