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विस्तार से जानिए कि आख़िर क्या है व्हाट्सएप जासूसी मामला?

Friday - November 1, 2019 10:55 am , Category : WTN HINDI
भारत समेत कई देशों में व्हाट्सएप के ज़रिये जासूसी
भारत समेत कई देशों में व्हाट्सएप के ज़रिये जासूसी

व्हाट्सएप जासूसी से भारत समेत दुनिया के कई देशों में मचा हड़कम्प

NOV 01 (WTN) – यदि यह कहा जाए कि आपकी कोई भी बात अब सिर्फ़ तब तक ही राज रह सकती है, जब तक कि वो आपके मन में है तो अब यही सच लगता है। यह पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि हमारा ऐसा लिखने का क्या आशय है। दरअसल, जैसा कि आप जानते हैं कि यदि आपने किसी को अपनी कोई राज की बात कही है तो वो लीक हो सकती है। लेकिन वहीं यदि आप सोच रहे हैं कि सोशल मीडिया पर आपकी गतिविधियां की जानकारी सिर्फ़ आप तक ही सीमित है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आपका सोचना बिल्कुल ही ग़लत है।

सुरक्षित कहे जाने वाले सोशल मीडिया ऐप्स पर भी आपकी जासूसी हो सकती है। जी हां दुनिया में सबसे ज़्यादा पॉपुलर इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप के ज़रिये पूरी दुनिया में जासूसी की घटना ने कई देशों की सरकारों को हिलाकर रख दिया है। बात करें भारत की तो भारत में कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की व्हाट्सएप के ज़रिये जासूसी की बात सामने आने से हड़कम्प सा मच गया है।
 
जासूसी की इस घटना की व्हाट्सएप ने बाकायदा पुष्टि कर दी है। व्हाट्सएप के मुताबिक़, इज़रायल की साइबर खुफिया कम्पनी NSO ग्रुप की ओर से पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को स्पाइवेयर द्वारा टारगेट कर उनकी जासूसी की गई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इज़रायली कम्पनी के द्वारा Pegasus नाम के स्पाईवेयर से भारतीय पत्रकारों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया है। कनाडा की सिटिजन लैब ने दावा किया है कि Pegasus ने भारत में पत्रकारों के कुछ गैंग को निशाना बनाया है।
 
वैसे इज़रायली कम्पनी द्वारा की गई जासूसी सिर्फ़ भारत तक ही सीमित नहीं है। जानकारी के मुताबिक़, पूरी दुनिया में क़रीब 1,400 लोगों की इज़रायल की साइबर खुफिया कम्पनी एनएसओ ग्रुप ने जासूसी की है। वहीं अब Pegasus के दस्तावेज़ों से पता चल रहा है कि यह जासूसी सिर्फ़ व्हाट्सएप तक ही सीमित नहीं है। दस्तावेज़ों में दावा किया गया है कि Pegasus स्पाइवेर ना केवल व्हाट्सएप बल्कि सेल डेटा, स्काइप, टेलीग्राम, वाइबर, एसएमएस, फ़ोटो, ई-मेल, कॉन्टैक्ट, लोकेशन, फाइल्स, ब्राउज़िंग हिस्ट्री और माइक-कैमरा तक को अपने कब्ज़े में ले सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस स्पाइवेयर के द्वारा टारगेट किए गए फ़ोन नम्बर के कैमरा और माइक के डेटा को भी एकत्रित किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक़, इसके लिए सिर्फ़ स्पाइवेयर को इन्स्टॉल करने की ज़रूरत होती है, जो कि सिर्फ फ्लैश SMS से भी हो सकता है।
 
इधर, व्हाट्सएप और अन्य माध्यमों से जासूसी की घटना सामने आने के बाद से ही मोदी सरकार पर जहां विपक्ष निशाना साध रहा है, वहीं मोदी सरकार भी जासूसी कि इस घटना के बाद एक्शन में है। केन्द्र सरकार ने व्हाट्सएप से 4 नवम्बर तक इस मामले में सफाई देने को कहा है। इतना ही नहीं, व्हाट्सएप पर स्पाइवेयर के बढ़ते विवाद के बीच सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने साल 2011 और 2013 में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और जनरल वीके सिंह के ख़िलाफ़ जासूसी करने के कथित मामले पर भी व्हाट्सएप से जवाब मांगा है।
 
वहीं इस बारे में केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है, “सरकार इस मामले को लेकर काफ़ी गम्भीर है और व्हाट्सएप से इस बारे में जवाब मांगा गया है। भारत सरकार लोगों की निजता की सुरक्षा करने के लिए तत्पर और प्रतिबद्ध है। केन्द्रीय एजेंसियां प्रोटोकोल के तहत काम करती हैं, जिसमें केन्द्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं और यह काम राष्ट्रहित में किया जाता है।”

व्हाट्सएप और अन्य साधनों से जासूसी की ख़बरें सामने आने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है, “मीडिया में व्हाट्सएप के ज़रिये जासूसी की जो ख़बरें चल रही हैं, वह भारत सरकार की छवि खराब करने का प्रयास है। भारत सरकार नागरिकों की निजता के अधिकार का सम्मान करती है और इस मामले में सख्त से सख्त क़दम उठाए जाएंगे।”

इधर व्हाट्सएप के ज़रिये जासूसी के आरोप लगने के बाद व्हाट्सएप की ओर से बयान आया है कि इस मामले में भारत में कुछ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता इसका शिकार हुए हैं। इस मामले में व्टाट्सएप की ओर से कैलिफॉर्निया की फेडरेल कोर्ट में इज़रायली साइबर एजेंसी NSO ग्रुप के ख़िलाफ़ केस किया गया है।

वहीं इस बारे में इज़रायली साइबर एजेंसी NSO ग्रुप ने अपनी सफ़ाई पेश की है। इस बारे में ग्रुप का कहना है, “उनके द्वारा पहले ही कई सरकारों को इस तरह के कुछ सॉफ्टवेयर दिये गये हैं। हालांकि, इन सॉफ्टवेयर के किसी भी ग़लत इस्तेमाल की मनाही पहले ही कर दी गई थी।” आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ समय पहले एक ख़बर सामने आई थी कि इज़रायल की इसी Pegasus एजेंसी के द्वारा सऊदी अरब के वॉशिंगटन पोस्ट पत्रकार जमाल ख़ाशग़्जी की जासूसी करवाई गई थी। जमाल ख़ाशग़्जी की बाद में तुर्की में हत्या कर दी गई थी।
 
व्हाट्सएप और अन्य साधनों से जासूसी की घटना सामने आने के बाद विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। जहां एक तरफ़ पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जासूसी के मामले को राफेल विवाद से जोड़ दिया है, तो वहीं दूसरी तरफ़ राहुल गांधी के क़रीबी रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि भाजपा की सरकार की इस तरह की हरकत से वे हैरान नहीं हैं।
 
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि व्हाट्सएप द्वारा जासूसी का मामला सिर्फ़ भारत तक ही सीमित नहीं है। आपकी जानकारी क लिए बता दें कि अमेरिका से सम्बद्ध देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की जासूसी काफ़ी समय से की जा रही थी। व्हाट्सएप की आतंरिक जांच से जूड़े सूत्रों के मुताबिक़, हैकर्स के निशाने पर बड़े देशों के सरकारी अधिकारी और सैन्य अधिकारी थे।
 
हैकर्स ने व्हाट्सएप के सर्वर का इस्तेमाल कर 29 अप्रैल, 2019 से 10 मई, 2019 के बीच 1,400 व्हाट्सएप यूज़र्स के स्मार्टफ़ोन पर मालवेयर से हमला किया गया था और इसके ज़रिये जासूसी की गई थी। जो लोग जासूसी का शिकार हुए हैं उनमें 20 देशों के पत्रकार, सरकार के उच्चाधिकारी और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि व्हाट्सएप समेत कई सोशल मीडिया साइट्स का दावा है कि उनकी सेवा एण्ड-टू-एण्ड एनक्रिप्शन वाली है, यानी कि सेण्डर और रिसीवर के बीच के कम्यूनिकेशन के बारे में किसी दूसरे को पता नहीं चल सकता है। लेकिन लगता है कि सोशल मीडिया साइट्स का यह दावा ग़लत साबित होता नज़र आ रहा है।

जासूसी की इस घटना के बारे में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे मामलों में आम आदमी ज़्यादा कुछ नहीं कर सकता है। साथ ही हैकिंग की तकनीक इतनी ज़्यादा एडवांस है कि व्हाट्सएप भी इसमें अब कुछ ज़्यादा नहीं कर सकता है। इस बारे में हमारी आपको बस इतनी ही सलाह है कि आप समय-समय पर अपने सोशल मीडिया ऐप्स को अपडेट करते रहें, क्योंकि सावधानी में ही सुरक्षा है।