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जानिए आख़िर क्यों हो सकता है इमरान ख़ान सरकार का तख्तापलट?

Monday - November 18, 2019 1:33 pm , Category : WTN HINDI
पाकिस्तान में एक बार फ़िर तख्तापलट की आशंका
पाकिस्तान में एक बार फ़िर तख्तापलट की आशंका

अपनी कमज़ोरी छिपाने इमरान ख़ान सरकार का तख्तापलट कर सकती है पाकिस्तान की सेना!
 
NOV 18 (WTN) – भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में हमेशा से ही लोकतंत्र एक मज़ाक रहा है। पाकिस्तान के एक देश के रूप में अस्तित्व में आने के बाद से ही उसमें सेना का ही बोलबाला रहा है। पाकिस्तान में चुनी हुई सरकारों का चार बार तख्ता पलट हो चुका है। यानी कि इतिहास के आधार पर कहा जा सकता है कि पाकिस्तान में चुनी हुई सरकारें, सेना की रहमो करम पर ही रहती हैं। दरअसल, पाकिस्तान में लोकतंत्र सिर्फ़ दुनिया को दिखाने के लिए ही है, नहीं तो पाकिस्तान के प्रशासन और राजनीति में वहां की सेना का पूरा वर्चस्व रहा है। पाकिस्तान की विदेश नीति से लेकर आतंरिक राजनीति तक, सभी पर वहां की सेना का अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण रहता है।
 
जब-जब भी पाकिस्तान में वहां की चुनी हुई सरकारें सेना की उम्मीदों पर ख़रा नहीं उतर सकी हैं, पाकिस्तान में सेना ने तख्तपलट कर देश के शासन पर कब्ज़ा जमाया है। बात करें पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की, तो अपने अभी तक के शासनकाल में इमरान ख़ान पाकिस्तान के लिए एक असफ़ल प्रधानमंत्री ही साबित हुए हैं। पाकिस्तान पर लगातार बढ़ता विदेशी क़र्ज़, निर्यात में जारी गिरावट, विदेशी मुद्रा भण्डार में लगातार होती कमी और बढ़ती हुई महंगाई के कारण पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बदतर हो चुकी है। महंगाई के कारण पाकिस्तान में लोगों का जीना दूभर हो गया है।

पाकिस्तान में विकास दर भी 5.5 प्रतिशत से गिरकर 3.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले साल यह 2.4 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। वहीं पाकिस्तान की करेंसी रुपया भी लगातार अमेरिकी डॉलर की तुलना में कमज़ोर होती जा रही है, और एक अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले पाकिस्तानी करेंसी रुपये की क़ीमत 155 रुपये तक पहुंच गई है।
 
वहीं भारत सरकार की कश्मीर कूटनीति के चलते भी इमरान ख़ान पाकिस्तान में एक असफ़ल प्रधानमंत्री साबित हो रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा ख़त्म करते हुए अनुच्छेद 370 को शिथिल कर दिया है। भारत सरकार के इस आंतरिक फ़ैसले का पाकिस्तान ने काफ़ी विरोधी किया था, और इस मसले को दुनिया के लगभग हर मंच पर उठाने का प्रयास किया था। लेकिन मोदी सरकार की सफ़ल कूटनीति के चलते इमरान ख़ान सरकार को हर मंच पर नाकामी हासिल लगी और सिर्फ़ चीन, तुर्की और मलेशिया जैसे देशों ने ही कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया।
 
यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि इमरान ख़ान सरकार से ना तो पाकिस्तान की जनता खुश है और ना ही पाकिस्तान की सेना। ऐसे में पाकिस्तान में एक बार फ़िर से इस बात की चर्चा ज़ोरों पर है कि क्या इमरान ख़ान सरकार का तख्तापलट हो सकता है? पाकिस्तान में आम लोगों से लेकर सोशल मीडिया और राजनेताओं में इस बात की चर्चा है कि सेना जल्द ही इमरान ख़ान सरकार का तख्तापलट कर सकती है।

दरअसल, तख्तापलट की चर्चा बिना किसी ठोस आधार के नहीं हो रही है। तख्तापलट की यह अटकलें पिछले सप्ताह पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल जावेद बाजवा और इमरान ख़ान के बीच मुलाक़ात के बाद से उठी है। इमरान ख़ान सरकार के तख्तापलट की चर्चाएं और भी तेज़ तब हो गई, जब इमरान ख़ान ने कहा कि वो कामकाज से दो दिनों की छुट्टी ले रहे हैं। अपनी छुट्टी को लेकर इमरान ख़ान का कहना है कि वे लगातार काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें काम से थोड़ा ब्रेक चाहिए।
 
पाकिस्तान की राजनीति के जानकारों के मुताबिक़, यदि पाकिस्तान की सेना इमरान ख़ान सरकार का तख्तापलट करती है इसमें इमरान ख़ान सरकार की असफ़लता के साथ-साथ भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान की सेना की कमज़ोरी भी एक कारण है। दरअसल, भारतीय सेना ने पीओके में आतंकियों के ख़िलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक और एअर स्ट्राइक कर आतंकियों का सफ़ाया किया था, जिसके बाद पाकिस्तान में वहां की सेना की क्षमता पर सवाल उठने लगे थे। वहीं भारतीय सेना ने इस बीच कश्मीर में आतंकियों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन ऑलआउट चलाकर बड़ी तादात में आतंकियों को मार गिराया है।
 
वहीं भारतीय सेना की सख्ती के कारण पाकिस्तान से आतंकी भारत में घुसपैठ कर आतंकी गतिविधियों को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। इन्हीं सब कारणों से कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की सेना अपने देश में अपनी कमज़ोरी को छिपाने के लिए इमरान ख़ान सरकार की नाकामी का सहारा लेकर इमरान ख़ान सरकार का तख्तापलट कर सकती है।  
 
वैसे पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार का तख्तापलट कोई नई बात नहीं है। लेकिन इमरान ख़ान सरकार का यदि तख्तापलट होता है यह अपने आप में एक बड़ी बात होगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह सभी जानते हैं कि इमरान ख़ान पाकिस्तान की सेना की काफ़ी क़रीबी रहे हैं। पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि संसद के लिए पिछले साल हुए चुनाव में सेना ने दखलंदाज़ी की थी और सेना की मदद से ही इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन सके हैं। पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां इमरान ख़ान को सेना की कठपुतली तक कहती हैं।

इन्हीं सबके बीच जब पाकिस्तान की सेना आर्थिक मोर्चे पर जब पाकिस्तान में ग़रीबी देखती है और कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान की कूटनीतिक हार देखती है, तो इमरान ख़ान सरकार पर उसका विश्वास उठना लाजिमी है। ऐसे में कहा जा रहा है कि अपनी साख बचाने के लिए पाकिस्तान की सेना, इमरान ख़ान सरकार का तख्तापलट कर सकती है। पाकिस्तान की मीडिया में तो यहां तक चर्चा है कि अगर इमरान ख़ान सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर नहीं लाया तो अगले बजट के पहले ही पाकिस्तान में तख्तापलट हो सकता है।
 
आर्थिक मोर्चे पर असफ़ल साबित इमरान ख़ान सरकार की नीतियों का पाकिस्तान में जमकर विरोध हो रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तान के मौलाना और नेता फज़ल-उर-रहमान ने इस्लामाबाद में क़रीब दो सप्ताह तक इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ आज़ादी मार्च निकाला था और पाकिस्तान की जनता ने इस मार्च में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था।
 
वैसे यदि पाकिस्तान की सेना का इतिहास देखा जाए और इमरान ख़ान सरकार की असफ़लताओं की समीक्षा की जाए तो स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की सेना के लिए तख्तापलट का एक और मौक़ा है, जब पाकिस्तान में सेना के हाथों में कमान होगी। वैसे कहने को तो इमरान ख़ान पाकिस्तान की सेना के क़रीबी हैं, लेकिन इमरान ख़ान की सेना से यही क़रीबी उनके लिए मुसीबत साबित हो सकती है और सर्जिकल स्ट्राइक और एअर स्ट्राइक के बाद मुंह की खाई पाकिस्तान की सेना अपना वजूद बचने के लिए इमरान ख़ान सरकार का तख्तापलट कर सकती है।