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हैदराबाद एनकाउन्टर पर महिलाओं ने जताई ‘खुशी’, कहा - इससे अपराधियों में पैदा होगा ‘डर’

Friday - December 6, 2019 2:28 pm , Category : WTN HINDI
एकसुर में सभी ने हैदराबाद पुलिस एनकाउन्टर को बताया ‘उचित’
एकसुर में सभी ने हैदराबाद पुलिस एनकाउन्टर को बताया ‘उचित’

रेप और हत्या के आरोपियों के एनकाउन्टर पर ‘एकमत’ दिखी महिलाएं
 
DEC 06 (WTN) – हैदराबाद में वेटरनरी डॉक्टर के साथ हुए गैंगरेप और उसकी हत्या कर उसे जलाने की घटना से पूरा देश दुखी, शर्मिंदा और गुस्से में था। इस वीभत्स घटना के बाद लोगों की मांग थी कि आरोपियों को जल्द से जल्द सजा मिले और उन्हें फांसी पर चढ़ा देना चाहिए। लेकिन समय के साथ लोगों का गुस्सा धीरे-धीरे शांत हो जाता है, क्योंकि लोग जानते हैं कि कोर्ट के द्वारा न्याय मिलने में इतना समय लगता है कि इस तरह की घटनाएं को लोग भूल जाते हैं। लोग तो समय के साथ रेप की घटनाओं को भूल जाते हैं, लेकिन रेप पीड़ित और उसके परिजन ज़िन्दगी भर इस तरह की घटनाओं को नहीं भूल पाते हैं। लेकिन न्याय में देरी से उनका भी हौंसला धीरे-धीरे पस्त होने लगता है।

लेकिन 5 और 6 दिसम्बर की दरमियानी रात हैदराबाद में पुलिस ने जो किया, उसकी हर कहीं और हर कोई तारीफ़ कर रहा है। जैसा कि आप जानते हैं कि वेटरनरी डॉक्टर के साथ हुए गैंगरेप और उसकी हत्या के चारों आरोपियों को पुलिस ने एक एनकाउन्टर में मार गिराया है। पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई की पूरी देश में तारीफ़ हो रही है। इस कार्रवाई के बारे में लोगों का कहना है कि रेप और हत्या के आरोपियों के साथ इसी तरह का सलूक किया जाना चाहिए। हैदराबाद पुलिस द्वारा किये गये एनकाउन्टर पर हमने जब पीपुल्स विश्वविद्यालय में कार्यरत महिला कर्मचारियों से इस बारे में चर्चा की, तो सभी ने एकसुर में पुलिस की कार्रवाई की सही बताया।

पीपुल्स विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ नीरजा मलिक ने हैदराबाद पुलिस द्वारा किये गये एनकाउन्टर को समय की ज़रूरत बताते हुए इसे सही ठहराया है। इस बारे में डॉ मलिक का कहना है, “रेप पीड़िता या उसके परिजनों को न्याय मिलने में काफ़ी समय लगता है। वेटरनरी डॉक्टर के गैंगरेप और हत्या के आरोपियों के साथ जो भी पुलिस ने किया है वह जनता की मांग है। रेप केस में न्याय में देरी से लोगों का विश्वास धीरे-धीरे न्यायिक प्रणाली पर से उठने लगा है। हैदराबाद एनकाउन्टर के बाद अपराधियों के मन में डर पैदा होगा। मेरा मानना है कि समाज में रेप की घटनाओं पर तभी अंकुश लग सकता है, जब ख़ुद समाज अपने आप में सुधार करेगा।”
 
वहीं इस मामले पर पीपुल्स विश्वविद्यालय की COE अमिता मौर्य का कहना है कि हैदराबाद पुलिस ने जो भी किया वो ज़रूरी था। COE मौर्ये के मुताबिक़, “रेप केस में न्याय मिलने में सालों का समय लग जाता है। ऐसे में रेप पीड़ित और उसके परिजन कई बार हताश हो जाते हैं। देश की न्यायिक प्रणाली में जल्द से जल्द सुधार होना चाहिए, जिससे रेप और हत्या के दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा जल्द मिल सके। मेरा मानना है कि रेप की घटनाओं के लिए महिलाओं को दोषी ठहराना घटिया मानसिकता का उदाहरण है। यदि किसी महिला के साथ रेप होता है तो इस मामले में दोषी को सजा दिलाना सरकार, कोर्ट और समाज की ज़िम्मेदारी है। इस तरह के एनकाउन्टर से अपराधियों में डर पैदा होगा और वे ऐसा अपराध करने के पहले कई बार सोचेंगे”
 
पीपुल्स विश्वविद्यालय की एचआर डिपार्टमेण्ट की जनरल मैनेजर प्रसन्ना प्रिंस ने पुलिस के एनकाउन्टर को सही समय पर लिया गया सही फ़ैसला बताया। जीएम प्रसन्ना के मुताबिक, “जो हुआ वो सही हुआ और इस तरह के एनकाउन्टर काफ़ी ज़रूरी हैं, जिससे लोगों में भय पैदा हो। यह सही है कि कोर्ट से भी इन आरोपियों को सज़ा मिल सकती थी, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया में काफ़ी देरी होती। इसी कारण से लोगों का न्यायिक प्रक्रिया पर से विश्वास उठाता जा रहा है। समाज में रेप और हत्या जैसी घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं, ऐसे में इस तरह के एनकाउन्टर से एक कड़ा सन्देश अपराधियों में जाएगा।”
 
वहीं पीपुल्स विश्वविद्यालय की मैनेजर (एचआर) गरिमा आचार्य ने भी हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई को सही क़रार दिया है। इस बारे में गरिमा आचार्य का कहना है, “मैं ख़ुद एक महिला हूं और मेरी 8 साल की एक बच्ची है। मुझे डर लगता है कि क्या मैं और मेरी बच्ची सुरक्षित हैं? आख़िर हमारा समाज कहां जा रहा है कि यहां पर बच्चियों से लेकर वृद्धा तक सुरक्षित नहीं हैं। रेप और हत्या के आरोपियों के साथ जो हैदराबाद पुलिस ने किया है ऐसा ही होना चाहिए, जिससे अपराधियों को तुरन्त सजा मिले और समाज में एक कड़ा सन्देश जाए।"

आचार्य के मुताबिक़, "दिल्ली के निर्भया केस में 7 साल हो गये, लेकिन अभी तक आरोपियों को फांसी की सज़ा नहीं हुई। रेप जैसे केस में न्याय में देरी मिलना अपने आप में रेप पीड़िता के साथ अन्याय ही है। कई बार सबूतों के अभाव में या किसी अन्य कारण से आरोपी छूट जाते हैं, ऐसे में रेप पीड़िता के साथ एक तरह से अन्याय ही होता है। समाज में अपराधियों के मन में डर पैदा करने के लिए रेप और हत्या के दोषियों को जल्द से जल्द से फांसी हो यह सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए।"
 
वहीं गरिमा आचार्य ने साउथ के एक डायरेक्टर के उस बयान पर भी कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें डायरेक्टर ने कहा था कि रेप के समय पीड़िता को सरेण्डर कर देना चाहिए जिससे उसकी जान बच सके। इस बारे में गरिमा का कहना है कि इस तरह के बयान बताते हैं कि आज भी समाज में कुछ लोगों की मानसिकता महिला विरोधी है।
 
पीपुल्स विश्वविद्यालय की एनसीसी ऑफिसर कैप्टन सुम्मी चौधरी का भी मानना है कि हैदराबाद पुलिस द्वारा रेप और हत्या के आरोपियों के साथ जो किया गया वो बिल्कुल सही किया गया है। कैप्टन चौधरी के मुताबिक़, “रेप आज समाज पर कलंक बन गया है। रेप पीड़िता और उसके परिजनों के ऊपर क्या गुजरती है यह तो बस वे ही जान सकते हैं। लेकिन रेप पीड़िताओं को न्याय मिलने में देरी से वे टूट जाती हैं। ऐसे में इस तरह के आरोपियों का एनकाउन्टर कर देना ही सबसे सही फ़ैसला है। जब इस तरह के एनकाउन्टर होंगे तो अपराधियों में डर पैदा होगा और रेप और हत्या की घटनाओं पर कुछ तो अंकुश लगेगा।”

पीपुल्स हॉस्पिटल में क्लर्क की पोस्ट पर काम करने वाली तलत जहां का भी मानना है कि रेप और ह्त्या के पीडितों का इसी तरह से एनकाउन्टर कर देना चाहिए। वेटरनरी डॉक्टर की रेप और हत्या का मामला यदि कोर्ट में चलता तो पीड़िता के परिजनों को न्याय मिलने में सालों लग जाते। ऐसे कितने ही केस सालों से कोर्ट में चल रहे हैं। लेकिन अपराधियों में डर पैदा हो इसके लिए इस तरह के एनकाउन्टर काफ़ी ज़रूरी है।