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डेटा प्रोटक्शन पर होगी सख़्ती, फिंगर प्रिन्ट और फेस अनलॉक के लिए भी लेना होगी मन्ज़ूरी!

Thursday - December 12, 2019 1:35 pm , Category : WTN HINDI
डेटा प्रोटक्शन के लिए मोदी सरकार बना रही 'कड़ा क़ानून'
डेटा प्रोटक्शन के लिए मोदी सरकार बना रही 'कड़ा क़ानून'

वॉयस कमाण्ड डिवाइस और बायोमैट्रिक के लिए अब लेना पड़ सकती है परमिशन
 
DEC 12 (WTN) – यदि आपके पास वॉयस कमाण्ड से चलने वाले एलेक्सा (Alexa) और गूगल होम (Google Home) जैसी डिवाइस हैं, तो हो सकता है कि यह आने वाले दिनों में भारत में काम करना बंद कर दें या फ़िर इन्हें चलाने के लिए आपको सरकार से बाक़ायदा अनुमति लेना पड़े। वहीं हो सकता है कि मोबाइल फिंगर प्रिंट या फेस अनलॉक करने के लिए ज़रूरी डेटा लेने पर भी सरकार की मन्ज़ूरी की ज़रूरत पड़े। यह सब पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर ऐसा क्या होने जा रहा है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि संसद में पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल पारित होता है, तो एलेक्सा और गूगल होम जैसे टेक्नोलॉजी या तो बंद हो सकती है नहीं तो इसके इस्तेमाल के लिए सरकार से परमिशन लेना पड़ सकती है।
 
दरअसल, व्हाट्सएप जासूसी केस के बाद से मोदी सरकार पर काफ़ी दबाव है कि वो भारतीय लोगों की डेटा की सुरक्षा के लिए कोई कड़ा क़ानून बनाए। इसी कड़ी में मोदी सरकार डेटा प्रोटेक्शन बिल को संसद की मन्ज़ूरी के लिए पेश करने वाली है। कहा जा रहा है कि इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाएगा। समिति की सिफ़ारिशों के बाद इस बिल को सदन के पटल पर रखा जाएगा। लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद यह बिल राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद क़ानून बन जाएगा।
 
वैसे यदि सभी कुछ मोदी सरकार की मंशा के अनुसार ही रहा, तो जल्द ही डेटा प्रोटेक्शन बिल क़ानून बन सकता है। और यदि यह बिल क़ानून बन गया तो वॉयस कमाण्ड टेक्नोलॉजी से चलने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स गजेट जैसे एलेक्सा और गूगल होम काम करना बंद कर दे। ऐसा इसलिए, क्योंकि नये डेटा प्रोटेक्शन बिल में वॉयस कमांड, मोबाइल फिंगर प्रिंट या फेस अनलॉक करने के लिए डेटा लेने पर भी सरकार की मन्ज़ूरी लेना ज़रूरी होगा।

जानकारों के मुताबिक़, यदि डेटा प्रोटेक्शन बिल पारित हो जाता है तो वॉयस कमाण्ड से चलने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर रोक लग जाएगी। वहीं फिंगर प्रिन्ट और फेस अनलॉक के ज़रिये मोबाइल फ़ोन खोलना भी मुश्किल हो जाएगा। इस बिल में ग्राहकों के बायोमैट्रिक्स लेने पर भी रोक होगी। यदि कोई एजेंसी या कम्पनी ग्राहकों के बायोमैट्रिक्स लेना चाहता है, तो उसे इसके लिए सरकार से मन्ज़ूरी लेना होगी।

इस प्रस्तावित क़ानून के तहत कोई भी सरकारी या प्रायवेट एजेंसी यदि किसी उपभोक्ता का पर्सनल डेटा लेना चाहती है या फ़िर उसे स्टोर करना चाहती है, तो उसे पहले उपभोक्ता की मन्ज़ूरी लेना ज़रूरी होगा। वहीं यदि कोई कम्पनी उपभोक्ता का बायोमैट्रिक डेटा लेना चाहती है, तो उसे इसके लिए पहले सरकार से मन्ज़ूरी लेना होगी। इतना ही नहीं, इस प्रस्तावित क़ानून में बच्चों का डेटा सुरक्षित करने के लिए सख़्त नियम बनाए गये हैं। यदि यह बिल क़ानून बन जाता है, तो इससे सरकार के पास डेटा को लेकर असीमित अधिकार औऱ ताक़त होगी और कोई भी सरकारी एजेंसी निजी डेटा का इस्तेमाल कर सकेगी।
 
लोगों का डेटा सुरक्षित रहे इसके लिए डेटा कलेक्ट करने वाली सभी कम्पनियों या एजेंसियों को सरकार के साथ डेटा शेयर करना अनिवार्य होगा। इस सभी के लिए एक डेटा प्रोटक्शन अथॉरिटी बनाया जाना भी प्रस्तावित है। यदि कोई भी सरकारी या निजी एजेंसी या कम्पनी किसी के पर्सनल डेटा को लीक करती है या फ़िर किसी को बेचती है, तो डेटा प्रोटक्शन बिल में इसके लिए भारी जुर्माने और सज़ा का प्रावधान किया गया है। वहीं सरकार किसी भी समय सम्प्रभुता या सार्वजनिक व्यवस्था के आधार पर निजी डेटा या सरकारी एजेंसी के डेटा का उपयोग कर सकती है।

लोगों का डेटा सुरक्षित रहे इसके लिए इस बिल में प्रस्ताव है कि डेटा कारोबार के इंचार्ज का काम देख रहे कार्यकारी को डेटा लीक मामले में यदि दोषी पाया जाता है, तो उसे तीन साल तक की जेल भी हो सकती है। इस बहुप्रतीक्षित बिल में प्रस्ताव किया गया है कि कम्पनी का कोई भी अधिकारी यदि भारत के लोगों के गुमनाम डेटा का सार्वजनिक डेटा से मिलान कर व्यक्ति की पहचान करने या डेटा का नियम विरुद्ध प्रसंस्करण का काम जानबूझ कर करता पाया जाता है, तो उसे जेल की सज़ा हो सकती है।

पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल में डेटा लीक या बेचने के किसी भी बड़े उल्लंघन में कम्पनियों पर 15 करोड़ रुपये या उनके वैश्विक कारोबार के 4 प्रतिशत (जो भी अधिक हो) तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। वहीं इस तरह के छोटे मामलों में 5 करोड़ रुपये या वैश्विक कारोबार के 2 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रस्ताव किया गया है। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि डेटा प्रोटक्शन के मामले में मोदी सरकार काफ़ी संवेदनशील और सख़्त दिखाई दे रही है। सरकार नहीं चाहती है कि लोगों के डेटा के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ या चोरी हो, जिससे उन्हें परेशान का सामना करना पड़े।