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अर्थव्यवस्था के ‘अच्छे दिन’ अब आने वाले हैं!

Thursday - January 16, 2020 11:02 am , Category : WTN HINDI
अमेरिका और चीन के बीच हुई महत्वपूर्ण ट्रेड डील
अमेरिका और चीन के बीच हुई महत्वपूर्ण ट्रेड डील

अमेरिका-चीन ट्रेड डील से पूरी दुनिया ने ली राहत, जल्द ही आर्थिक सुस्ती से निजात मिलने की आशा

JAN 16 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती ने भारत समेत पूरी दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं को काफ़ी प्रभावित किया है। ख़ुद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं पर आर्थिक मंदी ने नकारात्मक प्रभाव डाला है। अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के जानकारों के मुताबिक़, अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर पूरी दुनिया में आर्थिक सुस्ती के लिए एक बड़ा कारण रहा है। इस ट्रेड वॉर के कारण ख़ुद चीन को भी काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा है। जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल जुलाई के महीने में चीन में औद्योगिक विकास दर 17 सालों के सबसे निचले स्तर पर आ गई थी।

जहां तक भारत की बात है तो आर्थिक सुस्ती ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर काफ़ी गहरा असर छोड़ा है। आर्थिक सुस्ती का सबसे ज़्यादा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ा है। वहीं आर्थिक सुस्ती के कारण देश में बेरोज़गारी का आकंड़ा भी बढ़ा है। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन आने वाले हैं तो यह पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन से क्या मतलब है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दरअसल अमेरिका और चीन के बीच काफ़ी लम्बे समय से जारी ट्रेड वॉर अब ख़त्म होने की दिशा में है। आख़िर भारत समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर ख़त्म होने से क्या फ़ायदा होगा, आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
 
सबसे पहले तो आपको बता दें कि ट्रेड वॉर खत्म करने की दिशा में अमेरिका और चीन ने पहला क़दम बढ़ाया है। बता दें कि दोनों ही देशों ने एक महत्वपूर्ण ट्रेड डील के पहले फेज़ पर हस्ताक्षर कर दिये हैं। जानना महत्वपूर्ण है कि पिछले साल दिसम्बर महीने में दोनों देश ने ट्रेड डील की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया था। इस डील की सबसे ख़ास बात यह है कि इस इसके पहले चरण के तहत अमेरिका ने चीन से आयात होने वाले सामान पर लगाए गये कुछ नये टैरिफ को वापस लेने की घोषणा की। वहीं इस डीलके बाद चीन, अमेरिका से ज़्यादा कृषि उत्पाद आयात करेगा।

जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेड वॉर जारी रहने के कारण दोनों ही देशों को काफ़ी नुकसान हो रहा था। पिछले साल नवम्बर के महीने में चीन का अमेरिका को निर्यात 23 प्रतिशत घटकर सिर्फ 35.6 अरब डॉलर रह गया था। इस दौरान अमेरिकी सामान का आयात 2.8 प्रतिशत घटकर 11 अरब डॉलर ही रह गया था। अब जबकि दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियों के बीच ट्रेड वॉर जारी था, ऐसे में भारत समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था इससे प्रभावित हो रही थी। दरअसल, अमेरिका और चीन के साथ दुनिया के अन्य देशों का आयात-निर्यात इस बात पर निर्भर करता है कि इन दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते कैसे हैं। यदि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते सामान्य नहीं रहते हैं तो दुनिया के अन्य देशों के आयात-निर्यात पर इसका काफ़ी असर पड़ता है।

जैसा कि हमने आपको बताया कि अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर से दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही थी। ऐसे में दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर हस्ताक्षर होने से दुनिया के ज़्यादातर शेयर बाज़ारों मे तेज़ी देखी गई। बता दें कि इस ट्रेड डील के बाद चीन अगले दो सालों में क़रीब 200 अरब डॉलर से अधिक का अमेरिकी सामान का आयात करेगा। इसमें 50 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद, 75 अरब डॉलर के मैन्युफैक्चरिंग उत्पाद और 50 अरब डॉलर के ऊर्जा क्षेत्र से सम्बन्धित उत्पाद शामिल रहेंगे।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस डील को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “ट्रेड डील के लिए चीन के साथ दूसरे चरण की बातचीत भी जल्द शुरू होगी। हालांकि, तब तक सैकड़ों अरब डॉलर के चाइनीज आयात पर टैरिफ पहले की तरह लगता रहेगा। वहीं जब दूसरे फेज़ के लिए सहमति जैसे ही बन जाती है, अमेरिका एक्स्ट्रा टैरिफ वापस ले लेगा।”
 
जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच पिछले 18 महीनों से ट्रेड वॉर जारी था। ट्रेड वॉर में दोनों ही देशों ने जिंसों, मेकैनिकल पार्ट्स और तैयार माल पर भारी आयात शुल्क लगाया था। दरअसल, ट्रेड वॉर की शुरूआत साल 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने की थी जिसमें चीन ने बड़े पैमाने पर व्यापार घाटे को कम करने की मांग की थी। चीन की प्रमुख मांगों में बौद्धिक सम्पदा अधिकारों, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और चीनी बाज़ारों में अमेरिकी वस्तुओं की अधिक पहुंच की रक्षा के बीजिंग के वादे की निगरानी के लिए एक घुसपैठ सत्यापन तंत्र शामिल था। ट्रेड वॉर के कारण दोनों देश अब तक क़रीब आधा ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के माल पर अतिरिक्त टैरिफ लगा चुके हैं।

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