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अब बैंक उपभोक्ताओं की मर्ज़ी से शुरू और ख़त्म होंगी कुछ बैंकिंग सेवाएं

Thursday - January 16, 2020 1:13 pm , Category : WTN HINDI
बैंक उपभोक्ताओं के अधिकारों में होगी वृद्धि
बैंक उपभोक्ताओं के अधिकारों में होगी वृद्धि

बैंक नहीं बल्कि आपकी इच्छा पर निर्भर रहेंगी डेबिट-क्रेडिट कार्ड की कुछ सेवाएं

JAN 16 (WTN) – स्वाभाविक है कि आपका किसी ना किसी बैंक में अकाउंट तो होगा ही। और जब बैंक में अकाउंट है तो आपने बैंक की तरह-तरह की सर्विस का इस्तेमाल भी किया होगा। लेकिन पिछले एक साल में देखा गया है कि बैंकों की सर्विस से उपभोक्ताओं को काफ़ी शिकायतें आई हैं जिस कारण से बैंकों की सर्विस के ख़िलाफ़ होने वाली शिकायतों की संख्या बढ़ी है। दरअसल, बैंक उपभोक्ताओं का आरोप है बैंकों की तरफ़ से उपभोक्ताओं को संतोषजनक सेवाएं नहीं दी जा रही हैं। वहीं बैंक की ख़राब सेवाओं की शिकायत करने पर उपभोक्ताओं को संतोषजनक जवाब भी नहीं मिल रहा है। बता दें कि सरकारी बैंक हो या फ़िर निजी बैंक, सभी बैंकों की सर्विस से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे पहली शिकायत बैंकों से उपभोक्ताओं की यह है कि उनकी बिना इजाज़त के ही विभिन्न सेवाओं के नाम पर उनके अकाउंट से पैसा काट लिया जाता है। दरअसल, इस शिकायत से सालों से बैंक उपभोक्ता परेशान हैं कि बैंक की तरफ़ से बिना कोई जानकारी दिये उनके अकाउंट से पैसा काट लिया जाता है। हालांकि, इस बारे में बैंक प्रशासन का कहना है कि उपभोक्ता के अकाउंट से जो भी पैसा कटता है, वो वाजिब होता है और उपभोक्ता द्वारा किसी ना किसी सेवा के इस्तेमाल होने पर ही उसके अकाउंट से पैसा काटा जाता है। वहीं इसी तरह की कई अन्य शिकायतें उपभोक्ताओं की बैंकों से है।

बैंकों की मनमानी के ख़िलाफ़ लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद अब आरबीआई ने बैंकों के डेबिट और क्रेडिट कार्ड के सम्बन्ध में कुछ निर्देश जारी किये हैं। कहा जा रहा है कि रिज़र्व बैंक के इन निर्देशों के बाद बैंक उपभोक्ताओं अब डेबिट और क्रेडिट कार्ड सर्विस लेने या बंद करने के मामले में पहले की तुलना में ज़्यादा शक्तिशाली हो जाएंगे। दरअसल, रिज़र्व बैंक ने सभी सरकारी और निजी बैंकों को यह निर्देश जारी किया है कि अब डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड की सेवाओं को अब बैंक नहीं बल्कि उपभोक्ता तय करेंगे।

यह पढ़कर आप चौक गये होंगे कि आख़िर रिज़र्व बैंक के निर्देश में ऐसा क्या है जिसके बाद उपभोक्ताओं को ज़्यादा शक्ति दी जा रही है। दरअसल, रिज़र्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि बैंक से सम्बन्धित किसी भी तरह की कोई भी सेवा या ख़रीदी को शुरू करने या बंद करने के अधिकार अब बैंकों के पास नहीं रहेंगे बल्कि किसी भी सेवा या ख़रीदी के लिए उपभोक्ता स्वतंत्र होगा कि उसे सम्बन्धित सेवा या ख़रीदी शुरू करना या ख़त्म करना है।

जानकारी के लिए बता दें कि बैंक की वर्तमान सेवाओं में इंटरनेट बैंकिंग, एटीएम का इस्तेमाल, ऑनलाइन ख़रीददारी और पॉइंट ऑफ सेल में कार्ड स्वाइप करना आदि शामिल है। रिज़र्व बैंक के मुताबिक़, अब बैंक उपभोक्ता अपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स के इस्तेमाल को ख़ुद तय कर सकेंगे कि उन्हें इनका इस्तेमाल कैसा करना है। उदाहरण के तौर पर अगर उपभोक्ता ख़रीददारी के लिए ऑनलाइन शॉपिंग नहीं करते तो वे इसे ख़ुद बंद कर सकते हैं।
 
वहीं जैसा कि आप जानतें हैं कि ज़्यादातर डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स अंतर्राष्ट्रीय इस्तेमाल के लिए पहले से अनुमति प्राप्त होते हैं, और इसी कारण से कार्ड्स से पैसों की धोखाधड़ी होने की ज़्यादा आशंका रहती है। ऐसे में अब उपभोक्ताओं को यह सुविधा दी जा रही है कि वे चाहें तो अंतर्राष्ट्रीय इस्तेमाल की सुविधा अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड से ख़ुद ही हटा सकते हैं। इतना ही नहीं, बैंक उपभोक्ताओं को और भी ज़्यादा अधिकार देने की दिशा में रिज़र्व बैंक ने सभी सरकारी और निजी बैंकों को निर्देश दिया है कि अपने सभी ग्राहकों को ट्रांजैक्शन अलर्ट, समय-समय पर बैंकिंग सम्बन्धित जानकारियां और बैलेंस का स्टेट्स एसएमएस या इमेल के ज़रिये उपभोक्ता को देना होगा। यह सेवायें ज़रूरी हैं, और इसमें किसी भी तरह की कमी या बदलाव स्वीकार नहीं है।

जहां रिज़र्व बैंक ने कुछ सेवायें हर हाल में जारी रखने का निर्देश बैंकों को दिया है, वहीं कुछ सेवाओं के लिए उपभोक्ता की सहमति के निर्देश रिज़र्व बैंक ने दिये हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि इन दिनों लगभग सभी बैंक अपने उपभोक्ताओं को इंटरनेशनल कार्ड्स उपलब्ध करा रहे हैं। पहली नज़र में और इस्तेमाल करने पर वैसे तो इन कार्ड्स से कोई नुकसान होता दिखाई और समझ नहीं आता है, लेकिन जानकारी के लिए बता दें कि सबसे ज़्यादा बैंक फ्रॉड इन्हीं से होते हैं।
 
जानकारी के लिए बता दें कि बैंकों द्वारा जारी किये गये कार्ड्स पूरी दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल हो सकते हैं, इसी कारण से आपके कार्ड्स पर इंटरनेशनल हैकर्स की नज़र रहती है। उपभोक्ता की ग़लती, लापरवाही या लालच के कारण हैकर्स कई बार कार्ड यूज़र की बैंकिंग जानकारी किसी सोशल साइट, या थर्ड पार्टी ऐप के ज़रिये हासिल कर लेते हैं और ऐसा करने के बाद हैकर्स इस जानकारी को बेच देते हैं। कार्ड्स की जानकारी हासिल करने के बाद अपराधी आसानी से आपके कार्ड्स का इस्तेमाल कर लेते हैं और आपका बैंक अकाउंट खाली हो जाता है। वहीं आजकल कई बैंक वाई-फाई लैस या कॉन्टेक्टलेस ट्रांजैक्शन वाले कार्ड्स जारी कर रहे हैं। बता दें कि ऐसे कार्ड्स में दो हज़ार रुपये तक के लेन-देन में पिन की ज़रुरत नहीं होती है।
 
बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय कार्ड्स और वाई-फाई लैस या कॉन्टेक्टलेस ट्रांजैक्शन वाले कार्ड्स का इस्तेमाल उपभोक्ता करना चाहता है कि नहीं, इसके लिए अब उपभोक्ता की मन्जूरी ज़रूरी होगी। यदि उपभोक्ता को लगता है कि यह सेवायें उसके काम की नहीं है और इन सेवाओं के कारण उसका बैंक अकाउंट सुरक्षित नहीं है तो ऐसे में उपभोक्ता इन सेवाओं को अपनी मर्जी से बंद करा सकता है। साफ़ है कि बैंक उपभोक्ताओं को अब पहले की तुलना में ज़्यादा अधिकार रिज़र्व बैंक के निर्देश के बाद मिल जाएंगे जिससे उपभोक्ता यह ख़ुद तय करेंगे कि उन्हें बैंक की कौन सी सेवायें चाहिए और कौन सी नहीं।

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