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तो क्या भारत में इतिहास बन जाएगी वोडाफ़ोन-आइडिया?

Saturday - February 15, 2020 3:37 pm , Category : WTN HINDI
रिलायंस जियो के सामने प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पाई वोडाफ़ोन-आइडिया
रिलायंस जियो के सामने प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पाई वोडाफ़ोन-आइडिया

लगातार घाटे और एजीआर भुगतान से वोडाफ़ोन-आइडिया जल्द हो सकती है बंद!
 
FEB 15 (WTN) – क़रीब 90 करोड़ मोबाइल फ़ोन यूज़र्स के साथ भारत दुनिया में मोबाइल फ़ोन यूज़र्स के मामले में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है। यूरोप के कई देशों की आबादी से 10 गुना ज़्यादा मोबाइल फ़ोन यूज़र्स भारत में हैं। स्वाभाविक है कि करोड़ों की तादात में मोबाइल फ़ोन यूज़र्स होने के कारण भारत में टेलीकॉम कम्पनियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। साल 2016 में रिलायंस जियो की लॉन्चिग के पहले भारत में कई मोबाइल कम्पनियां थीं, और इन मोबाइल कम्पनियों को अच्छा ख़ासा फ़ायदा भी हो रहा था। लेकिन जियो के टेलीकॉम सेक्टर में आने के बाद बाक़ी मोबाइल कम्पनियां जियो के मार्केटिंग से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकीं, और टेलीकॉम कम्पनियों को भारी घाटा उठाना पड़ा।

भारत में एक वो दौर भी था, जब महीने भर में 2जीबी डेटा के लिए क़रीब 300 रुपये ख़र्च करने पड़ते थे। वहीं कॉलिंग भी काफ़ी महंगी थी। लेकिन रिलायंस जियो ने टेलीकॉम सेक्टर में क़दम रखने के बाद भारतीय टेलीकॉम सेक्टर की पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी। रिलांयस जियो ने अपने यूज़र्स को फ्री कॉलिंग का ऑफर तो दिया है, साथ ही रिलांयस जियो ने इंटरनेट डेटा को इतना सस्ता कर दिया कि जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। लेकिन रिलांयस जियो के सस्ते ऑफर्स ने बाक़ी टेलीकॉम कम्पनियों की हालत ख़राब कर दी। धीरे-धीरे अन्य टेलीकॉम कम्पनियों के यूज़र्स जियो में अपना नम्बर पोर्ट करने लगे, और इसका बहुत बड़ा नुकसान अन्य टेलीकॉम कम्पनियों को उठाना पड़ा।

जियो की तरह अन्य टेलीकॉम कम्पनियों को भी कॉलिंग फ्री करनी पड़ी और इंटरनेट डेटा को सस्ता करना पड़ा। लेकिन जियो की तरह बाक़ी टेलीकॉम कम्पनियों को फ़ायदा नहीं हुआ और यह कम्पनियां धीरे-धीरे आर्थिक संकट में फंसती चली गईं। हालत यह है कि हर महीने हो रहे भारी घाटे के बाद अब आइडिया-वोडाफोन के लिए अपने ऑपरेशंस को भारत में चलाना और भी मुश्किल हो गया है। दरअसल, यह सब कुछ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुआ है। दरअसल, देश की कई टेलीकॉम कम्पनियों को दूरसंचार विभाग को एक तय रक़म चुकानी है, जिसे एजीआर कहा जाता है, लेकिन घाटे के कारण कम्पनियां इस रकम को चुकाने में ख़ुद को असमर्थ बता रही हैं। जानकारी के लिए बता कें कि वोडाफ़ोन-आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला पहले ही कह चुके हैं कि यदि सरकार द्वारा आर्थिक मदद मुहैया नहीं कराई जाती है, तो कम्पनी बंद हो जाएगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वोडाफ़ोन-आइडिया कम्पनी पर 53,000 करोड़ रुपये का AGR (Adjusted Gross Revenue) बक़ाया है। यदि आप नहीं जानते हैं कि एजीआर क्या होता है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एजीआर एक तरह का शुल्क है, जो कि दूरसंचार विभाग टेलीकॉम कम्पनियों से उपयोग और लाइसेंस के नाम पर वसूलता है। वोडाफ़ोन-आइडिया समेत कई अन्य टेलीकॉम कम्पनियों पर करोड़ों का एजीआर बक़ाया है। जहां तक वोडाफ़ोन-आइडिया की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वोडाफ़ोन-आइडिया की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वो एजीआर का पैसा चुका सके।

जानकारी के लिए बता दें कि वोडाफ़ोन-आइडिया कम्पनी को चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसम्बर) के दौरान कुल 6,439 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। यह लगातार छठी तिमाही है, जब कम्पनी को नुकसान हुआ है। साफ़ है कि लगातार घाटे का सामना कर रही वोडाफ़ोन-आइडिया के पास एजीआर का भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है। ऐसे में कम्पनी NCLT (National Company Law Tribunal) में जा सकती है, क्योंकि कम्पनी को 17 मार्च को मामले की अगली सुनवाई होने से पहले बक़ाये का भुगतान करना है। बता दें कि यदि इस मामले को NCLT स्वीकार कर लेता है, तो बैंकरप्सी लॉ के तहत बक़ाया चुकाने पर रोक लग जाएगी और इस तरह कम्पनी को भुगतान नहीं करना पड़ सकता है।
 
दरअसल, टेलीकॉम कम्पनियों को एजीआर मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टेलीकॉम कम्पनियों को कोई भी राहत देने से साफ़ इनकार कर दिया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया नहीं देने को लेकर दूरसंचार कम्पनियों को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने इन सभी कम्पनियों के उच्च अधिकारियों को तलब कर यह बताने के लिए कहा है कि बक़ाये को चुकाने को लेकर शीर्ष अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया है? बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कम्पनियों को फटकार लगाते हुए 14 फरवरी तक 1.47 लाख करोड़ रुपये जमा करने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट के रवैये से साफ़ ज़ाहिर है कि वो टेलीकॉम कम्पनियों को किसी भी तरह की कोई भी राहत देने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में यदि एजीआर चुकाने के लिए वोडाफ़ोन-आइडिया कम्पनी बंद होती है, तो टेलीकॉम सेक्टर में दो ही कम्पनियां भारतीय एयरटेल और रिलांयस जियो बचेंगी। लेकिन जानकारों का कहना है कि दूरसंचार क्षेत्र में सिर्फ़ दो ही कम्पनियों के बचे रहने से ग्राहकों के सामने विकल्प सीमित हो जाएंगे, और ऐसे में दोनों ही कम्पनियां कॉलिंग और इंटरनेट डेटा के लिए ज़्यादा चार्ज कर सकती हैं। अब देखना होगा कि वोडाफ़ोन-आइडिया भारी घाटे के बाद भी क्या अपना अस्तित्व बचा पाती है या नहीं? या फ़िर कम्पनी को ख़ुद को बंद करने की आधिकारिक घोषणा करनी पड़ सकती है।

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