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पाकिस्तान पर अभी भी लटक रही है FATF की ब्लैकलिस्ट की तलवार!

Saturday - February 22, 2020 12:15 pm , Category : WTN HINDI
पाकिस्तान में आतंकियों को मिलती है आर्थिक सहायता
पाकिस्तान में आतंकियों को मिलती है आर्थिक सहायता

यदि FATF ने पाकिस्तान को किया ब्लैकलिस्टेड तो पाकिस्तान हो जाएगा ‘कंगाल’!
 
FEB 22 (WTN) – आतंक और आतंकियों के गढ़ पाकिस्तान की नापाक हरकतों से अब पूरी दुनिया वाक़िफ़ हो चुकी है। भारत और अफगानिस्तान जैसे देशों में आतंक फैलाने में पाकिस्तान सरकार अपनी सेना और संसाधनों का इस्तेमाल हमेशा से ही करती रही है। पाकिस्तान एक तरह से आतंकियों का गढ़ ही है क्योंकि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को जिहाद के नाम पर खुलेआम आर्थिक सहायता मिलती रहती है। दुनिया में जितने भी बड़े आतंकी हमले हुए हैं, उन सभी में हमला करने वाले आतंकी या आतंकियों का सम्बन्ध कहीं ना कहीं पाकिस्तान से रहा है। आतंकी संगठनों को पाकिस्तान में मिल रहे संरक्षण, आर्थिक सहायता और समर्थन की जानकारी अब पूरी दुनिया को लग चुकी है। और पाकिस्तान की इन्हीं नापाक हरकतों पर अब धीरे-धीरे शिकंजा कसता जा रहा है।

पाकिस्तान में आतंकी संगठनों को मिल रहे समर्थन पर नकेल कसने के लिए FATF (Financial Action Task Force) यानी वित्तीय कार्रवाई कार्यबल ने पाकिस्तान पर सख़्ती दिखाते हुए उसे ग्रे लिस्ट में ही रखा है। हालांकि, उम्मीद थी कि FATF पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डाल देगा। लेकिन, पाकिस्तान ने किसी तरह से ख़ुद को ब्लैकलिस्ट में जाने से फ़िलहाल बचा लिया है। बता दें कि पाकिस्तान को तुर्की और मलेशिया जैसे देशों का समर्थन मिल गया, जिसके कारण पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट में जाने से बच गया। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान साल 2012 में पहली बार FATF की ग्रे लिस्ट में आया था, और साल 2015 तक पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में ही रहा। इसके बार साल 2018 में एक बार फ़िर से पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में शुमार हुआ है।

वैसे यदि आप FATF के बारे में नहीं जानते हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि FATF एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग या टेरर फण्डिंग जैसे वित्तीय मामलों के लिए दुनिया भर के देशों के लिए एक गाइडलाइन तय करती है। FATF को यह अधिकार है और वो इस तरह के नियम बनाती है कि वो वित्तीय अपराधों को बढ़ावा देने वाले देशों पर कार्रवाई कर सके। बता दें कि FATF दरअसल एक अंतर-सरकारी निकाय है, जिसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी7 समूह के देशों द्वारा साल 1989 में स्थापित किया गया था।

बता दें कि FATF अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को दुरुपयोग से बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर की कमज़ोरियों की पहचान करने के लिए काम करता है। इसी कड़ी में अक्टूबर 2001 में FATF ने मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा टेरर फण्डिंग से निपटने के प्रयासों को शामिल किया था। जबकि अप्रैल 2012 में इसकी कार्यसूची में सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार के वित्तपोषण का मुक़ाबला करने के प्रयासों को जोड़ा गया। जानकारी के लिए बता दें कि FATF अपने द्वारा की गई सिफ़ारिशों को लागू करने में देशों की प्रगति की निगरानी और समीक्षा करता है। इस समय FATF में कुल 39 सदस्य हैं, जिसमें 37 सदस्य देश हैं और 2 क्षेत्रीय संगठन शामिल हैं।

दरअसल, FATF की ब्लैकलिस्ट अपने आप में काफ़ी महत्वपूर्ण होती है। आतंकी संगठनों को जब किसी देश में वित्तीय सहायता मिलती रहती है, और FATF द्वारा आतंकी संगठनों पर कार्रवाई के निर्देशों के बाद भी जब ऐसे देशों का असहयोगात्मक रवैया जारी रहता है। और वहीं मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फण्डिंग को लगातार काबू न कर पाने के कारण इन देशों को FATF द्वारा ब्लैकलिस्ट में रखा जाता है। इस तरह के हालात वाले देशों को ब्लैकलिस्ट करने की शुरूआत साल 2000 में हुई थी। टेरर फण्डिंग वाले देशों को पहले तो चेतावनी दी जाती है, और फिर कुछ देशों की एक कमेटी बनाकर निगरानी की जाती है कि ऐसे देश गाइडलाइन्स के मुताबिक गम्भीर मामलों को काबू करने के लिए क्या और कैसे क़दम उठा रहे हैं?

जैसा कि आप जानते हैं कि टेरर फण्डिंग के मामले में पाकिस्तान के काम से नाखुशी ज़ाहिर करते हुए FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा है। लेकिन यदि पाकिस्तान ने टेरर फण्डिंग पर जून 2020 तक लगाम नहीं लगाई और FATF द्वारा सुझाई गई 27 सूत्रीय कार्ययोजना का सही तरीक़े से अनुपालन नहीं किया , तो पाकिस्तान को जून 2020 में FATF ब्लैकलिस्ट में डाल सकता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि यदि पाकिस्तान को FATF ने ब्लैकलिस्ट में डाल दिया, तो पाकिस्तान पर इसका क्या असर पड़ेगा? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि FATF ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया, तो पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को एक बहुत बड़ा झटका लग सकता है। FATF द्वारा ब्लैकलिस्ट में डाले जाने बाद पाकिस्तान में विदेशी निवेश पर असर पड़ेगा। वहीं विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी वित्तीय संस्थानों से पाकिस्तान को आर्थिक सहायता मिलना मुश्किल हो जाएगी। यानी कि यदि FATF ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया, तो एक तरह से पाकिस्तान का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बायकॉट हो जाएगा।

FATF पाकिस्तान पर जो सख़्ती बरत रहा है, उसके पीछे मोदी सरकार की कूटनीति को भी नज़रअन्दाज़ नहीं किया जा सकता है। मोदी सरकार के ही प्रयासों की नतीजा है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई न करने वाले पाकिस्तान का साथ इस बार चीन और सऊदी अरब जैसे देशों ने भी नहीं दिया है। FATF की बैठक में चीन, अमेरिका, यूरोपीय देशों और सऊदी अरब ने खुलकर भारत का साथ दिया। इन सभी देशों ने पाकिस्तान से कहा है कि उसे टेरर फण्डिंग और मनी लांड्रिंग के मामले में सख़्त कार्रवाई करनी होगी। साथ ही पाकिस्तान को आतंकी संगठन के सभी नेताओं को सज़ा और अभियोजन के दायरे में लाना होगा।