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क्या चीन के ख़िलाफ़ एकजुट होंगे पूरे दुनिया के देश?

Tuesday - March 31, 2020 12:09 pm , Category : WTN HINDI
 चीन की गलती के कारण कोरोना वायरस के कारण अभी तक 37,820 लोगों की मौत
चीन की गलती के कारण कोरोना वायरस के कारण अभी तक 37,820 लोगों की मौत

कोरोना वायरस महामारी के बारे में पूरी दुनिया को धोखा दे रहा है चीन

MARCH 31 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि इस समय पूरी मानव सभ्यता कोरोना वायरस महामारी के ख़िलाफ़ अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। इस लेख को लिखे जाने तक पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के कारण अभी तक 37,820 लोगों की जान जा चुकी है। यूरोप के विकसित देश इटली में कोरोना वायरस के कारण अभी तक 11,591 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति अमेरिका में कोरोना वायरस के कारण सबसे ज़्यादा 1,64,253 लोग संक्रमित हो चुके हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 190 से ज़्यादा देश इस समय अपने नागरिकों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

लेकिन इस सबके बीच, पूरी दुनिया का मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी पूरी दुनिया में फैलने के पीछे बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी चीन की है। जैसा कि आप जानते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण चीन के वुहान शहर से पूरी दुनिया में फैला है। वैसे अब चीन ने इस बात की घोषणा कर दी है कि वुहान शहर कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्त हो चुका है। लेकिन चीन की गलती कहें या फिर साजिश, पूरी दुनिया के देश इस समय चीन के ख़िलाफ़ खड़े नज़र आ रहे हैं।

वैसे तो चीन सरकार का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान शहर के एक सीफूड मार्केट से फैला है। लेकिन कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि कोरोना वायरस संक्रमण वुहान स्थित एक वायरोलॉजी लैब से फैला है, जहां पर चीन सरकार की देखरेख में ख़तरनाक जैविक हथियार बनाए जाते हैं। हालांकि, चीन सरकार ने इस तरह के आरोपों को निराधार बताया है। लेकिन पश्चिमी देशों का गुस्सा चीन से इस बात को लेकर सबसे ज़्यादा है कि चीन ने कोरोना वायरस संक्रमण की भयावहता को छिपाए रखा।

पूरी दुनिया के देश कोरोना वायरस संक्रमण को छुपाने को लेकर वैश्विक स्तर पर चीन की आलोचना कर रहे हैं और चीन के ख़िलाफ़ लामबंद हो रहे हैं। पश्चिमी मीडिया कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर चीन सरकार के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़े हुए है। कई देशों का आरोप है कि चीन ने शुरुआत से ही कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों को छिपाने और दबाने की कोशिश की। इतना ही नहीं. जिस डॉक्टर ने कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर चीन सरकार को आगाह किया था, चीन सरकार ने उसी डॉक्टर को चुप करा दिया। बता दें कि बाद में उस डॉक्टर की भी कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हो गई थी।

इतना ही नहीं, एक चीनी व्यापारी, जिसने कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर चीन के राष्ट्रपति शी जिंनपिंग की आलोचना की थी वो भी गायब हो गया है।कई देशों का  मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर चीन ने पूरी दुनिया के सामने सही आंकड़े नहीं बताए। चीन सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चीन में कोरोना वायरस के कारण 3,300 लोग मरे हैं लेकिन आरोप है कि चीन में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मरने वालों की तादात इससे कहीं ज़्यादा है। 

हालांकि, चीन ने कोरोना वायरस महामारी से उबरने के बाद कई देशों को स्वास्थ्य मदद पहुंचाने की बातें कही हैं। लेकिन दुनिया के कई देशों का मानना है कि यह सब वो अपनी छवि सुधारने के लिए कर रहा है। इतना ही नहीं, चीन अब इस महामारी के दौरान भी व्यापार की मानसकिता से काम कर रहा है, और कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप झेल रहे देशों को मास्क और अन्य मेडिकल उपकरण बेच रहा है। पर चीन जो सामान दूसरे देशों में भेज रहा है उसे घटिया क्वालिटी का बताया जा रहा है। दरअसल, विदेशी मीडिया का आरोप है कि चीन दुनिया को यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह मेडिकल उपकरणों का दान कर रहा है। लेकिन वास्तव में चीन महामारी के इस दौर में अपना हित देख रहा है।

साफ़ है कि दुनिया के लगभग सारे देश कोरोना वायरस महामारी के लिए चीन को दोषी मान रहे हैं। चीन ने महामारी की वास्तविकता सारी दुनिया से छुपाई। जिस कारण से यह महामारी पूरी दुनिया में फैल गई। अब देखना होगा कि इस महामारी से निपटने के बाद क्या सारे देश मिलकर चीन के ख़िलाफ़ मिलकर कोई कार्रवाई करते हैं कि नहीं ? हज़ारों लोगों की जान जाने के बाद पूरी दुनिया के देशों को अब एकजुट होकर चीन को सुरक्षा परिषद में मिला वीटो पावर का अधिकार छीन लेना चाहिए।