BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL Astrology GOSSIP CORNER SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

अपनी 'असफलता' छिपाने नेपाली प्रधानमंत्री ओली ने अपनाया भारत विरोधी एजेंडा

Tuesday - June 30, 2020 12:42 pm , Category : WTN HINDI
चीन की 'शह' पर नेपाल और भारत के सम्बन्ध ख़राब कर रहे ओली
चीन की 'शह' पर नेपाल और भारत के सम्बन्ध ख़राब कर रहे ओली

ख़ुद की कुर्सी पर मंडराते ख़तरे से नेपाली प्रधानमंत्री ओली ने चला 'उल्टा दांव'

JUNE 30 (WTN) - भारत और नेपाल के बीच सदियों से रोटी बेटी के सम्बन्ध रहे हैं। भारत और नेपाल के बीच इतनी घनिष्ठता रही है कि दोनों देशों के नागरिकों को एक दूसरे के देश में आने-जाने के लिए वीज़ा नहीं लगता है। लेकिन इसी नेपाल की वामपंथी सरकार के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली इन दिनों भारत विरोध के एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

जब भी कोई देश किसी अन्य देश के ख़िलाफ़ कोई रणनीति बनाता है, तो इसके पीछे कूटनीतिक कारणों के अलावा उस देश के शासक की अपनी ख़ुद की महत्वाकांक्षाएं भी प्रमुख कारण होती हैं। दरअसल, अपनी सरकार गिराने में विदेशी ताक़तों की तरफ इशारा शुरू करना मझधार में फंसे एक शासक की रणनीति होती है।

जी हां, नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली अपनी कुर्सी पर मंडराते ख़तरे को देखकर ही भारत विरोधी राष्ट्रवाद के अपने पुराने फॉर्मूले को एकबार फिर से आजमा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, नेपाल में अपनी नीतियों और कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों के कारण ही नेपाल के प्रधानमंत्री ओली, चीन की शह पर ही भारत विरोधी एजेंडे को लागू कर रहे हैं।

चीन के चंगुल में फंस चुके नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने दावा किया है कि उनकी सरकार को गिराने और उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए काठमांडू के एक होटल में बैठकें की जा रही हैं, और इस तरह के षडयंत्र में एक दूतावास भी सक्रिय है। 

जैसा कि आप जानते हैं कि चीन के कहने पर चल रहे नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने नेपाल की संसद में नेपाल का नया नक्शा पारित कराया है। बता दें कि नेपाल के नए नक्शे में भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल में शामिल दिखाया गया है। हालांकि, ओली के इस भारत विरोधी फैसले से नेपाली खुश तो हुए, लेकिन नेपाली भूल गए हैं कि यदि भारत ने साल 2015 जैसी आर्थिक नाकाबंदी लागू कर दी, तो नेपाल में ज़रूरी वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगेंगे।

गौरतलब है कि ओली ने अपने पिछले कार्यकाल में चीन के साथ ट्रेड‌ एंड ट्रांजिट समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद ओली की सरकार गिर गई थी। ओली अपनी सरकार गिरने के पीछे भारत को ज़िम्मेदार ठहराते हैं।

दरअसल, अपने असफल प्रशासन, अपनी ही पार्टी में कामकाज पर उठ रहे सवालों और पार्टी के अन्य बड़े नेताओं से मिल रही चुनौतियों के कारण ही नेपाल के प्रधानमंत्री ओली भारत विरोधी एजेंडे के ज़रिए नेपाली लोगों का समर्थन हासिल करना चाह रहे हैं।

इसी कारण से ओली भारत की आपत्ति के बावजूद नया नक्शा जारी किय। इसके बाद उन्होंने नेपाल में नया नागरिकता क़ानून लाने का ऐलान कर दिया जिसमें नेपाली पुरुषों से शादी करने वाली महिलाओं को सात साल बाद नेपाल की नागरिकता मिलने का प्रावधान है। इतना ही नहीं, नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने तो नेपाल में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के लिए भी भारत को ही ज़िम्मेदार ठहराया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले कुछ दिनों में ओली की पार्टी के अन्दर ही उनके इस्तीफे की मांग तेज़ हो गई है। ओली की पार्टी के कई वरिष्ठ नेता ओली के कामकाज के तरीके से नाराज़ होकर उनके ख़िलाफ़ एकजुट हो रहे हैं।

दरअसल, नेपाल के प्रधानमंत्री ओली को इस समय सबसे बड़ी चुनौती अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता पुष्प कमल दहल से मिल रही है। बता दें कि पुष्प कमल दहल नेपाल के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। दहल कई बार अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री ओली के कामकाज पर निशाना साध चुके हैं। दहल के नेतृत्व वाला पार्टी का एक गुट, ओली पर पार्टी पर एकाधिकार करने और एकतरफ़ा फैसले लेने का आरोप लगाता है।

इधर, नेपाली प्रधानमंत्री ओली को लगता है कि उनकी सरकार गिराने के पीछे चल रही साजिशों में पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल शामिल हैं। नेपाली राजनीति के जानकारों के मुताबिक़, अगर पूर्व प्रधानमंत्री दहल का गुट वर्तमान प्रधानमंत्री ओली से अपनी शर्तें मनवाने में असफल रहता है, तो फिर दहल का गुट संसदीय दल से ओली को कुर्सी से हटाने की कोशिश करेगा। 

बता दें कि यदि ओली के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है, तो नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को अपनी सरकार बचाने के लिए क़रीब 8 सीटों की कमी पड़ सकती है। साफ है कि नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली अपनी कुर्सी पर मंडराते ख़तरे को देखते हुए नेपाल की जनता का ध्यान ख़ुद की असफलताओं से हटाने के लिए चीन की कठपुतली बनकर भारत विरोधी एजेंडे पर काम कर रहे हैं।