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कोरोना संकट के कारण अमेरिका की GDP में 33 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट; बढ़ सकता है चीन के साथ 'तनाव'

Saturday - August 1, 2020 12:49 pm , Category : WTN HINDI
कोरोना संकट के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित
कोरोना संकट के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित

अमेरिका की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट से लाखों लोग हुए बेरोज़गार

AUG 01 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) के कारण 200 से ज़्यादा देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अधिकांश देशों को अपने यहां लॉकडाउन लगाना पड़ा। और इसी कारण से संबंधित देशों में आर्थिक गतिविधियां ठप सी पड़ गईं। चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण महामारी इतना विकराल रूप धारण कर चुकी है कि इस लेख को लिखे जाने तक, अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण से पूरी दुनिया में क़रीब 6,83,245 लोगों की मौत हो चुकी है।

दरअसल, चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर-ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण कोरोना वायरस संक्रमण के कारण जनहानि तो हुई ही है। लेकिन वहीं, लॉकडाउन के कारण ठप पड़ी आर्थिक गतिविधियों ने कई देशों की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है। बात करें दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका की, तो अमेरिका भी ख़ुद को कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के क़हर से बचा नहीं पाया है।

दरअसल, पिछले 7 महीनों में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने से अमेरिका की GDP में भारी गिरावट दर्ज़ की गई है। बता दें कि अप्रैल से जून की तिमाही में अमेरिका की GDP में 33 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका की GDP में यह गिरावट ऐतिहासिक गिरावट है। वैसे अमेरिका में साल 1947 से ही GDP के आंकड़े जारी किए जा रहे हैं। वहीं, इसके पहले साल 1958 में तत्कालीन राष्ट्रपति आइजनहावर के शासन के दौरान अमेरिका की GDP में क़रीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जो साल 2020 से पहले का अमेरिकी GDP में गिरावट का सबसे ख़राब ​रिकॉर्ड है। 

इधर, अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर कोरोना संकट की ऐसी मार पड़ी है कि अमेरिका में न केवल GDP में गिरावट दर्ज़ की गई है बल्कि अमेरिका में बेरोज़गारी दर भी बढ़कर 14.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। दरअसल, कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अन्य देशों की तरह अमेरिका में भी लॉकडाउन लगाया गया था और इस कारण से यहां पर बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई थीं। अब चूंकि कंपनियों और कारखानों में काम बन्द था, तो इस कारण से बड़ी संख्या में नौकरियों में छंटनी की गई जिसके कारण अमेरिका में बेरोज़गारी दर बढ़कर 14.7 प्रतिशत हो गई।

कोरोना संकट में अमेरिका में बेरोज़गारी की यह हालत हो गई है कि यहां पर इस सप्ताह क़रीब 14 लाख युवकों ने बेरोज़गारी भत्ते के लिए आवेदन किया है। दरअसल, आवेदन करने वाले वे लोग हैं जिन्हें इस दौरान नौकरी से निकाल दिया गया है। बता दें कि कोरोना संकट के कारण अमेरिका की अर्थव्यवस्था की हालत ख़राब होने और लोगों की नौकरियां जाने से अमेरिका में यह लगातार 19वां सप्ताह है जब 10 लाख से ज़्यादा लोगों ने बेरोज़गारी भत्ते के लिए आवेदन किया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण सबसे ज़्यादा प्रभावित देश अमेरिका ही है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के कारण अभी तक अमेरिका में क़रीब 1,56,752 लोगों की मौत हो चुकी है और क़रीब 47,06,059 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। हालांकि, अब अमेरिका में काफी आर्थिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं और अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि जुलाई से सितम्बर की तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। लेकिन, अनुमान लगाया जा सकता है कि जब अमेरिका जैसी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को कोरोना संकट ने बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है, तो फिर विकासशील और ग़रीब देशों की अर्थव्यवस्था की कितनी बुरी हालात हुई होगी?

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