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...तो क्या हेपेटाइटिस-सी की दवा से सम्भव है कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी का इलाज?

Thursday - August 6, 2020 12:31 pm , Category : WTN HINDI
लगातार बढ़ रहे हैं कोरोना वायरस संक्रमण के मामले
लगातार बढ़ रहे हैं कोरोना वायरस संक्रमण के मामले

रिसर्च का दावा: हेपेटाइटिस-सी की दवा खाने वाले मरीज़ों नहीं है कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा!

AUG 06 (WTN) - जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी का प्रकोप दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। दरअसल, चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) 200 से ज़्यादा देशों में फैल चुकी है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 7,11,252  लोग मारे जा चुके हैं। वहीं, एक विश्लेषण के अनुसार, हर 15 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से मौत हो रही है।

इधर, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी की अभी तक कोई भी प्रमाणिक वैक्सीन नहीं बन पाई है, तो ऐसे में ख़तरा बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि, पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की वैक्सीन की खोज में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से इस दिशा में अभी तक कोई भी ठोस परिणाम नहीं मिल सका है।

वहीं, कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी पर लगातार रिसर्च जारी हैं कि यह बीमारी कैसे और किन परिस्थितियों में फैलती है और किन लोगों को यह बीमारी कम या ज़्यादा प्रभावित करती है? इसी कड़ी में एक रिसर्च में दावा किया गया है कि हेपेटाइटिस-सी (Hepatitis-C ) की दवा खाने वाले मरीज़ों पर कोरोना वायरस संक्रमण का असर दिखाई नहीं पड़ रहा है।

जी हां, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हेपेटाइटिस-सी की दवा पर कई देशों में ट्रायल चल रहा है। वहीं, भारत में भी इस दवा के कोरोना वायरस संक्रमण पर असर पर रिसर्च किया जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रोहतक स्थित PGI, हेपेटाइटिस-सी का हरियाणा राज्य का नोडल ट्रीटमेंट सेंटर है। जानकारी के अनुसार, पिछले 4 महीने के दौरान हरियाणा में क़रीब 5,000 मरीज़ हेपेटाइटिस-सी की दवा दवा ले रहे हैं जिनमें से अभी तक 2,000 मरीज़ों को चिन्हित किए गए हैं जोकि हेपेटाइटिस-सी की दवा ले रहे हैं, और इनमें से किसी पर भी कोरोना वायरस संक्रमण का असर अभी तक नज़र नहीं आया है।

हालांकि, कहा जा रहा है कि यह परोक्ष प्रमाण है, लेकिन उम्मीद है कि शायद हेपेटाइटिस-सी की दवा कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से लड़ने में सक्षम हो सकती है। बता दें कि ब्रिटेन, ब्राज़ील, ईरान और सऊदी अरब आदि देशों में हेपेटाइटिस-सी की दवा के कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी के ख़िलाफ़ प्रभावी होने के प्रमाण मिले हैं। इधर, डॉक्टर्स का कहना है कि हेपेटाइटिस-सी की दवा खाने वाले मरीज़ों पर कोरोना वायरस संक्रमण का असर दिखाई नहीं पड़ रहा। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व के पांच देशों में हेपेटाइटिस-सी की दवाई से कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों को ठीक करने के लिए ट्रॉयल किया गया था, और इसके नतीजे सकारात्मक भी रहे हैं। इसके बाद, रोहतक PGI की ओर से हेपेटाइटिस-सी की दवा को कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों पर ट्रॉयल करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी से अनुमति मांगी गई थी जिसके बाद PGI को दवाई का ट्रॉयल करने की मंज़ूरी मिल गई।

ख़ैर, अब देखना होगा कि हेपेटाइटिस-सी की दवा, कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों के इलाज में कितनी कारगर साबित होती है? लेकिन, अब जबकि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण की कोई भी प्रामाणिक वैक्सीन नहीं बन पाई है, तो ऐसे में घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वहीं, डॉक्टर की सलाह से योग, प्रणायाम और आयुर्वेद के ज़रिए ख़ुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं। साथ ही, विटामिन-डी की शरीर में आपूर्ति के लिए कम से कम 20 मिनिट तक सूर्य की रोशनी के प्रत्यक्ष सम्पर्क में रहें।