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महंगे टीवी चैनल्स से जल्द मिल सकती है ‘निजात’!

Saturday - August 17, 2019 10:23 am , Category : WTN HINDI
दर्शकों की शिकायतों के बाद ‘हरकत’ में आया ट्राई
दर्शकों की शिकायतों के बाद ‘हरकत’ में आया ट्राई

टीवी पर मनोरंजन अब हो सकता है ‘सस्ता’!

AUG 17 (WTN) – यदि आप केबल और डीटीएच सेवाएं महंगी होने से परेशान हैं, तो यह लेख आपके काफ़ी काम का है। जैसा कि आप जानते हैं कि पिछले काफ़ी समय से केबल और डीटीएच सेवाएं महंगी होने की शिकायतें आम दर्शक करते आ रहे हैं। जब से केबल और डीटीएच सेवाओं के लिए TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) के नये नियम लागू हुए हैं, तभी से इनकी सेवाएं पहले की तुलना में काफ़ी महंगी हो गई हैं। पहले टीवी पर मनोरंजन सस्ता था, लेकिन अब पहले की तुलना में टीवी पर मनोरंजन महंगा हो गया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्राई के नियमों के मुताबिक़, दर्शकों को टीवी पर चैनल्स देखने के लिए अपनी पसंद के चैनल्स का एक ग्रुप बनाना होता है, उस ग्रुप में शामिल चैनल्स के अनुसार ही दर्शक को मासिक पेमेण्ट करना होता है। लेकिन, ट्राई के नये नियम के बाद दर्शकों को टीवी पर मनोरंजन के लिए ज़्यादा पैसा ख़र्च करना पड़ रहा है। पर DTH और केबल की सेवाएं महंगी होने की शिकायतों के बाद, अब TRAI ने ब्रॉडकास्टिंग और केबल इंडस्ट्री के टैरिफ की दोबारा समीक्षा करने का फ़ैसला किया है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके लिए ट्राई ने बाकायदा नया कन्सल्टेशन पेपर जारी किया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इससे ब्रॉडकास्टिंग और टैरिफ सम्बन्धित परेशानियों का कोई हल निकाला जा सके। जैसा कि आप जानते हैं कि ट्राई ने मार्च 2017 में नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया था, जो कि 29 दिसम्बर 2018 से लागू हुआ था। जब इसका विश्लेषण किया गया तो यह बात सामने आई कि नये नियमों से चैनल्स की क़ीमतों में पारदर्शिता आई है और स्टेकहोल्डर्स के बीच मौजूद विवाद को कम करने में सफलता हासिल हुई है। लेकिन, इतना सब होने के बाद भी कंज्यूमर्स को टीवी चैनल्स चुनने के लिए पर्याप्त आज़ादी नहीं मिल सकी। दर्शकों की शिकायत है कि नये नियमों से टीवी पर मनोरंजन पहले की तुलना में ज़्यादा महंगा हो गया है।

इस बारे में ट्राई का कहना है कि ब्रॉडकास्टर और DPOs को नए नियमों के तहत दी गई छूट का इस्तेमाल ग्राहकों की समस्याओं और आकांक्षाओं को व्यक्त करने के लिए करना था, लेकिन इन्होंने दी गई छूट का इस्तेमाल बुके पर डिस्काउंट देकर चैनल की क़ीमतों को छिपाने में किया।
 
ट्राई के मुताबिक़, उन्होंने ऐसा पाया कि चैनल्स के बुके पर 70 प्रतिशत तक डिस्काउंट ऑफर प्रदान किया जा रहा है। लेकिन, इससे ग्राहक अपनी पसंद के चैनल्स नहीं चुन पा रहे हैं। ट्राई का इस बारे में कहना है कि नये नियमों से चैनल्स की संख्या को लेकर कोई समस्या नहीं है, लेकिन ब्रॉडकास्टर्स कई सारे बुके ऑफर कर रहे हैं। ट्राई ने इसका विश्लेषण किया तो पाया कि इन बुके में कुछ बदलाव के साथ ज़्यादातर एक जैसे ही चैनल्स दिए जा रहे हैं। वहीं ज़्यादा बुके होने से ना केवल ग्राहकों में भ्रम फैल रहा है बल्कि ग्राहत अपनी पसंद के चैनल्स नहीं चुन पा रहे हैं।

दर्शकों की शिकायतों के बाद ट्राई ने कहा है कि टीवी चैनल्स के बुके पर काफ़ी डिस्काउंट होने के बाद भी ग्राहकों को आज़ादी के साथ चैनल्स चुनने पर रोक लग रही है। हालांकि, ट्राई ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें मांग की गई थी कि टीवी चैनल्स के बुके की क़ीमत चैनल्स के अलग-अलग मूल्य के 85 प्रतिशत से कम नहीं होगी। लेकिन, तमाम दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया था। अब ट्राई के नये क़दमों से आशा की जा सकती है कि आने वाले दिनों में टीवी पर मनोरंजन आज की तुलना में सस्ता हो सकता है।