नोटों की कमी से लोग परेशान
Thursday - April 19, 2018 11:14 am ,
Category : WTN HINDI
पिछले कई दिनों से चल रही कैश के किल्लत के चलते देश के कई राज्यों में हाहाकार मचा हुआ है। अक्षय तृतीया और मण्डी में नई फसल के आवक के चलते कई राज्यों में कैश की मारामारी मची देखी गई। अचानक आई नोटों की कमी की परेशानी से सरकार से लेकर आरबीआई तक में हड़कम्प मच गया। लेकिन यक्ष प्रश्न यही है कि आखिर नक़दी गई तो कहां गई।
जानकारी के मुताबिक इसके पीछे कई कारण हैं जिसके कारण कैश की किल्लत का सामना लोगों को करना पड़ा और करना पड़ रहा है। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक पीएसयू बैंकों ने पहले ही आरबीआई को कह दिया था कि मार्च और अप्रैल में नक़दी की ज्यादा डिमाण्ड रहती है, क्योंकि इन दो महीनों में शादी और मण्डियों में अनाज की आवक के चलते नोटों की डिमाण्ड़ ज्यादा रहती है, लेकिन आरबीआई ने इस तरफ़ गम्भीरता से ध्यान नहीं दिया जिसके कारण समस्या बढ़ती चली गई।
नोटों की कमी का एक दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि देश में इन दिनों कैश की कमी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक देश में इस समय 70 हज़ार करोड़ रुपयों के नक़दी की कमी है। मार्च के महीने में सिस्टम में 19.4 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक सिस्टम में सिर्फ 17.5 लाख करोड़ रुपये ही फ्लो में थे।
वहीं दूसरी तरफ एक कारण यह भी हो सकता है कि कुछ समय पहले तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में एफडीआरआई बिल के कारण काफी लोगों ने बैंकों से रुपया निकाल लिया था, जिसके असर देश के अन्य राज्यों में भी पड़ा और लोगों ने शादियों के चलते बैंकों से रुपये निकलना शुरू कर दिये।
ख़ैर कारण जो भी रहे हों लेकिन इससे आम जनता को तो परेशानी का सामना करना पड़ा और करना पड़ रहा है। इस सबसे सबक लेकर सरकार को आगे सचेत रहना होगा। अभी मई में कर्नाटक और साल के आखिरी में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। यदि नोटों की कमी की समस्या कायम रही तो इस मुद्दे को विपक्ष पूरे जोरशोर से उठाएगा जिसका ख़ामियाजा भाजपा को उठाना पड़ सकता है।
जानकारी के मुताबिक इसके पीछे कई कारण हैं जिसके कारण कैश की किल्लत का सामना लोगों को करना पड़ा और करना पड़ रहा है। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक पीएसयू बैंकों ने पहले ही आरबीआई को कह दिया था कि मार्च और अप्रैल में नक़दी की ज्यादा डिमाण्ड रहती है, क्योंकि इन दो महीनों में शादी और मण्डियों में अनाज की आवक के चलते नोटों की डिमाण्ड़ ज्यादा रहती है, लेकिन आरबीआई ने इस तरफ़ गम्भीरता से ध्यान नहीं दिया जिसके कारण समस्या बढ़ती चली गई।
नोटों की कमी का एक दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि देश में इन दिनों कैश की कमी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक देश में इस समय 70 हज़ार करोड़ रुपयों के नक़दी की कमी है। मार्च के महीने में सिस्टम में 19.4 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक सिस्टम में सिर्फ 17.5 लाख करोड़ रुपये ही फ्लो में थे।
वहीं दूसरी तरफ एक कारण यह भी हो सकता है कि कुछ समय पहले तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में एफडीआरआई बिल के कारण काफी लोगों ने बैंकों से रुपया निकाल लिया था, जिसके असर देश के अन्य राज्यों में भी पड़ा और लोगों ने शादियों के चलते बैंकों से रुपये निकलना शुरू कर दिये।
ख़ैर कारण जो भी रहे हों लेकिन इससे आम जनता को तो परेशानी का सामना करना पड़ा और करना पड़ रहा है। इस सबसे सबक लेकर सरकार को आगे सचेत रहना होगा। अभी मई में कर्नाटक और साल के आखिरी में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। यदि नोटों की कमी की समस्या कायम रही तो इस मुद्दे को विपक्ष पूरे जोरशोर से उठाएगा जिसका ख़ामियाजा भाजपा को उठाना पड़ सकता है।