मेष राशि और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का संबंध
Monday - July 2, 2018 11:14 am ,
Category : WTN HINDI
जाने कि आखिर कैसे करें मेष राशि वाले सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा
JULY 02 (WTN) - हिन्दू धर्म में तीन प्रधान देव माने गये हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश। इन तीनों देवों में महेश यानि देवाधिदेव महादेव के मन्दिर आपको पूरे भारत में हर कहीं पर देखने को मिल जाएंगे। कुछ दिनों बाद हिन्दू पंचांग का सावन का महीना प्रारम्भ होने वाला है। माना जाता है कि सावन के महीने में शिव शंकर की पूजा का विशेष महत्व है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो पूजा मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। देवाधिदेव को संहारक कहा जाता है, लेकिन वे बड़े दयालु हैं। माना जाता है कि शिवलिंग के अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसी प्रकार माना जाता है कि विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र के अनुसार अलग-अलग ज्योतिर्लिंग की पूजा का महत्व बताया गया है।
भोलेनाथ शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योतिर्लिंग हैं, इन सभी ज्योतिर्लिंगों का अपना विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योतिर्लिंग प्राणियों को मृत्युलोक के दु:खों से मुक्ति दिलाने में सहायक हैं। शास्त्रों के अनुसार इन सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का 12 राशियों से संबंध है। आज हम आपको बताते हैं कि मेष राशि वालों के लिए किस ज्योतिर्लिंग की पूजा और अभिषेक करना चाहिए।
मेष राशि के लिए सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
बारह राशियों में सबसे पहला स्थान आता है मेष राशि का। माना जाता है कि मेष राशि वालों को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग काफी फल देने वाले होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, मेष राशि के लोगों को सोमनाथ देव की पूजा पंचामृत से करनी चाहिए। मान्यता है कि गंगाजल, दूध, दही, शहद और गाय के घी को मिलाकर पंचामृत बनाया जाना चाहिए। इसी पंचामृत से शिव परिवार को पंचामृत अर्पण करना चाहिए।
माना जाता है कि सोमवार के दिन शिवलिंग की पंचामृत से पूजा करने से हर मनौती पूरी हो जाती है। सोमवार के दिन मेष राशि के लोगों को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित है। मान्यता है कि इस मन्दिर का निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में पूजा पंचामृत से की जाती है।
ऐसी मान्यता है कि एक बार चंद्रमा को भगवान शिव ने किसी शाप से मुक्त किया था। जिसके बाद चन्द्रमा ने एक विशेष विधि से साकार शिव की पूजा की थी। आज भी उसी विधि से सोमनाथ में शिवलिंग की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहीं सोमनाथ में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था।
JULY 02 (WTN) - हिन्दू धर्म में तीन प्रधान देव माने गये हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश। इन तीनों देवों में महेश यानि देवाधिदेव महादेव के मन्दिर आपको पूरे भारत में हर कहीं पर देखने को मिल जाएंगे। कुछ दिनों बाद हिन्दू पंचांग का सावन का महीना प्रारम्भ होने वाला है। माना जाता है कि सावन के महीने में शिव शंकर की पूजा का विशेष महत्व है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो पूजा मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। देवाधिदेव को संहारक कहा जाता है, लेकिन वे बड़े दयालु हैं। माना जाता है कि शिवलिंग के अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसी प्रकार माना जाता है कि विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र के अनुसार अलग-अलग ज्योतिर्लिंग की पूजा का महत्व बताया गया है।
भोलेनाथ शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योतिर्लिंग हैं, इन सभी ज्योतिर्लिंगों का अपना विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योतिर्लिंग प्राणियों को मृत्युलोक के दु:खों से मुक्ति दिलाने में सहायक हैं। शास्त्रों के अनुसार इन सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का 12 राशियों से संबंध है। आज हम आपको बताते हैं कि मेष राशि वालों के लिए किस ज्योतिर्लिंग की पूजा और अभिषेक करना चाहिए।
मेष राशि के लिए सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
बारह राशियों में सबसे पहला स्थान आता है मेष राशि का। माना जाता है कि मेष राशि वालों को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग काफी फल देने वाले होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, मेष राशि के लोगों को सोमनाथ देव की पूजा पंचामृत से करनी चाहिए। मान्यता है कि गंगाजल, दूध, दही, शहद और गाय के घी को मिलाकर पंचामृत बनाया जाना चाहिए। इसी पंचामृत से शिव परिवार को पंचामृत अर्पण करना चाहिए।
माना जाता है कि सोमवार के दिन शिवलिंग की पंचामृत से पूजा करने से हर मनौती पूरी हो जाती है। सोमवार के दिन मेष राशि के लोगों को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह पर स्थित है। मान्यता है कि इस मन्दिर का निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में पूजा पंचामृत से की जाती है।
ऐसी मान्यता है कि एक बार चंद्रमा को भगवान शिव ने किसी शाप से मुक्त किया था। जिसके बाद चन्द्रमा ने एक विशेष विधि से साकार शिव की पूजा की थी। आज भी उसी विधि से सोमनाथ में शिवलिंग की पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहीं सोमनाथ में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था।