आईएएस दीपाली रस्तोगी के ‘लेख बम’ से मचा तहलका
Monday - July 2, 2018 12:38 pm ,
Category : WTN HINDI
पहले भी अपने लेख से ‘विवाद’ में रह चुकी हैं दीपाली रस्तोगी
JULY 02 (WTN) - मध्यप्रदेश में एक बार फिर से एक आईएएस अधिकारी के एक लेख से विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मध्यप्रदेश की वरिष्ठ आईएएस अफसर दीपाली रस्तोगी के एक लेख से ‘आईएएस अधिकारियों की कार्यप्रणाली’ पर सवालिया निशान लग गये हैं। माना जा रहा है कि दीपाली रस्तोगी का यह लेख चुनावी साल में शिवराज सरकार के लिए ‘सिरदर्द’ ना बन जाए।
1994 बैच की आईएएस अधिकारी दीपाली रस्तोगी के अख़बारों में छपे लेख में उन्होंने ‘आईएएस अधिकारियों की कार्यप्रणाली’ पर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, दीपाली रस्तोगी ने अपने लेख में लिखा गया है, “अब अच्छे आईएएस अधिकारी की परिभाषा बदल चुकी है। अच्छा अधिकारी उसी को माना जाता है जो नेता की इच्छा के हिसाब से काम करता है।
जानकारी के मुताबिक, आईएएस अफसर दीपाली रस्तोगी आगे लिखती हैं, “नेता के मुंह से जो शब्द निकले उसके हिसाब से अफसर अपनी योजनाएं बनाएं, अच्छा आईएएस अधिकारी वही होता है जिसका अपना कोई मत नहीं होता। अगर होता भी है, तो वो उसे कहता नहीं है अपने मन में सीमित रखता है। पिछले कुछ सालों में नौकरशाही और राजनीति, सही और गलत, सच और झूठ के बीच की लकीरें हल्की होती जा रही हैं। आईएएस अफसर अपनी सोच खोते जा रहे हैं।“
दीपाली रस्तोगी के इस लेख में साफ है कि उनकी ‘नाराजगी’ वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दीपाली रस्तोगी ने इससे पहले खुले में शौच मुक्त भारत के संबंध में लेख लिखा था जिस पर जमकर ‘विवाद’ हुआ था। दीपाली रस्तोगी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट खुले में शौच मुक्त भारत पर ‘तंज’ कसते हुए कहा था कि यह ‘औपनिवेशक मानसिकता’ से ग्रस्त अभियान है। इतना ही नहीं उन्होंने प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट को ‘गोरों की नकल’ तक कहा था।
इधर, मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस ने दीपाली रस्तोगी के लेख पर कहा है कि दीपाली रस्तोगी के पति मनीष रस्तोगी ने ई टेंडरिंग घोटाले का ख़ुलासा किया था और उसी वजह से उन्हें वहां से हटा दिया गया था। कांग्रेस के मुताबिक, ‘ईमानदार अधिकारियों’ के साथ इस तरह के बर्ताव से दीपाली रस्तोगी की ‘नाराज़गी’ नज़र आती है।
वहीं इस मामले में भाजपा का मत अलग है। दीपाली रस्तोगी के इस लेख से भाजपा ‘बैकफुट’ पर है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस मामले में भाजपा का कहना है कि जनप्रतिनिधि औऱ आईएएस अधिकारी दोनों के सामंजस्य से ही विकास होता है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा का कहना है कि अधिकारी और नेता दोनों को ही जनता के हित के लिए काम करना चाहिए और इसमें अगर मतभेद हों तो उन्हें दूर करते रहना चाहिए।
JULY 02 (WTN) - मध्यप्रदेश में एक बार फिर से एक आईएएस अधिकारी के एक लेख से विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मध्यप्रदेश की वरिष्ठ आईएएस अफसर दीपाली रस्तोगी के एक लेख से ‘आईएएस अधिकारियों की कार्यप्रणाली’ पर सवालिया निशान लग गये हैं। माना जा रहा है कि दीपाली रस्तोगी का यह लेख चुनावी साल में शिवराज सरकार के लिए ‘सिरदर्द’ ना बन जाए।
1994 बैच की आईएएस अधिकारी दीपाली रस्तोगी के अख़बारों में छपे लेख में उन्होंने ‘आईएएस अधिकारियों की कार्यप्रणाली’ पर सवाल खड़े किए हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, दीपाली रस्तोगी ने अपने लेख में लिखा गया है, “अब अच्छे आईएएस अधिकारी की परिभाषा बदल चुकी है। अच्छा अधिकारी उसी को माना जाता है जो नेता की इच्छा के हिसाब से काम करता है।
जानकारी के मुताबिक, आईएएस अफसर दीपाली रस्तोगी आगे लिखती हैं, “नेता के मुंह से जो शब्द निकले उसके हिसाब से अफसर अपनी योजनाएं बनाएं, अच्छा आईएएस अधिकारी वही होता है जिसका अपना कोई मत नहीं होता। अगर होता भी है, तो वो उसे कहता नहीं है अपने मन में सीमित रखता है। पिछले कुछ सालों में नौकरशाही और राजनीति, सही और गलत, सच और झूठ के बीच की लकीरें हल्की होती जा रही हैं। आईएएस अफसर अपनी सोच खोते जा रहे हैं।“
दीपाली रस्तोगी के इस लेख में साफ है कि उनकी ‘नाराजगी’ वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दीपाली रस्तोगी ने इससे पहले खुले में शौच मुक्त भारत के संबंध में लेख लिखा था जिस पर जमकर ‘विवाद’ हुआ था। दीपाली रस्तोगी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट खुले में शौच मुक्त भारत पर ‘तंज’ कसते हुए कहा था कि यह ‘औपनिवेशक मानसिकता’ से ग्रस्त अभियान है। इतना ही नहीं उन्होंने प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट को ‘गोरों की नकल’ तक कहा था।
इधर, मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस ने दीपाली रस्तोगी के लेख पर कहा है कि दीपाली रस्तोगी के पति मनीष रस्तोगी ने ई टेंडरिंग घोटाले का ख़ुलासा किया था और उसी वजह से उन्हें वहां से हटा दिया गया था। कांग्रेस के मुताबिक, ‘ईमानदार अधिकारियों’ के साथ इस तरह के बर्ताव से दीपाली रस्तोगी की ‘नाराज़गी’ नज़र आती है।
वहीं इस मामले में भाजपा का मत अलग है। दीपाली रस्तोगी के इस लेख से भाजपा ‘बैकफुट’ पर है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस मामले में भाजपा का कहना है कि जनप्रतिनिधि औऱ आईएएस अधिकारी दोनों के सामंजस्य से ही विकास होता है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा का कहना है कि अधिकारी और नेता दोनों को ही जनता के हित के लिए काम करना चाहिए और इसमें अगर मतभेद हों तो उन्हें दूर करते रहना चाहिए।