घर में बना रहे हैं पूजा घर, तो ध्यान रखें यह बातें
Tuesday - July 3, 2018 11:41 am ,
Category : WTN HINDI
पूजा घर शौचालय के ठीक ऊपर या नीचे नहीं होना चाहिए
JULY 03 (WTN) - सत्य है कि ईश्वर सर्वव्यापी है और हर कहीं है। देवता ही हमारा कल्याण करते हैं और उनकी कृपा से ही संसार चल रहा है। ईश्वर मन्दिरों में तो है ही, ईश्वर हमारे मन में भी हैं। ईश्वर की पूजा के लिए हम घर में पूजा घर बनाते हैं। आज हम आपको बताते हैं कि आखिर घर के अन्दर पूजा घर कैसा होना चाहिए।
1.वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर का दरवाजा टिन या लोहे का नहीं होना चाहिए।
2.वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर शौचालय के ठीक ऊपर या नीचे नहीं होना चाहिए।
3.कभी भी गलती से पूजा घर को शयन-कक्ष में न बनाएं। यदि जगह की कमी है तो और शयन-कक्ष में पूजा घर हो तो उसमें पर्दा लगा दें।
4.पूजा घर का रंग सफेद या हल्के क्रीम कलर का होना चाहिए।
5.घर में पूजा स्थल के लिए भवन का उत्तर-पूर्व कोना सबसे उत्तम माना जाता है।
6.वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा स्थल की भूमि उत्तर पूर्व की ओर झुकी हुई और दक्षिण-पश्चिकम से ऊंची हो।
7.मान्यता है कि पूजा घर के मंदिर की ऊंचाई उसकी चौड़ाई से दोगुनी होनी चाहिए।
8.विष्णु, शिव, सूर्य, कार्तिकेय, गणेश, दुर्गा की मूर्तियों का मुंह पश्चिेम दिशा की ओर होना चाहिए।
9.पूजा घर में कुबेर और भैरव का मुंह दक्षिण की तरफ होना चाहिए।
10.उग्र देवताओं (मां काली) की स्थापना घर में नहीं करना चाहिए।
JULY 03 (WTN) - सत्य है कि ईश्वर सर्वव्यापी है और हर कहीं है। देवता ही हमारा कल्याण करते हैं और उनकी कृपा से ही संसार चल रहा है। ईश्वर मन्दिरों में तो है ही, ईश्वर हमारे मन में भी हैं। ईश्वर की पूजा के लिए हम घर में पूजा घर बनाते हैं। आज हम आपको बताते हैं कि आखिर घर के अन्दर पूजा घर कैसा होना चाहिए।
1.वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर का दरवाजा टिन या लोहे का नहीं होना चाहिए।
2.वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर शौचालय के ठीक ऊपर या नीचे नहीं होना चाहिए।
3.कभी भी गलती से पूजा घर को शयन-कक्ष में न बनाएं। यदि जगह की कमी है तो और शयन-कक्ष में पूजा घर हो तो उसमें पर्दा लगा दें।
4.पूजा घर का रंग सफेद या हल्के क्रीम कलर का होना चाहिए।
5.घर में पूजा स्थल के लिए भवन का उत्तर-पूर्व कोना सबसे उत्तम माना जाता है।
6.वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा स्थल की भूमि उत्तर पूर्व की ओर झुकी हुई और दक्षिण-पश्चिकम से ऊंची हो।
7.मान्यता है कि पूजा घर के मंदिर की ऊंचाई उसकी चौड़ाई से दोगुनी होनी चाहिए।
8.विष्णु, शिव, सूर्य, कार्तिकेय, गणेश, दुर्गा की मूर्तियों का मुंह पश्चिेम दिशा की ओर होना चाहिए।
9.पूजा घर में कुबेर और भैरव का मुंह दक्षिण की तरफ होना चाहिए।
10.उग्र देवताओं (मां काली) की स्थापना घर में नहीं करना चाहिए।