वी.एल.कान्ताराव होंगे मध्य प्रदेश के नये मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, सलीना सिंह को हटाया गया
Wednesday - July 11, 2018 3:06 pm ,
Category : WTN HINDI
1992 बैच के आईएएस अधिकारी वी.एल.कांताराव सम्भालेंगे मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की जिम्मेदारी
JULY 11 (WTN) – मध्य प्रदेश में इसी साल विधानभा चुनाव होने हैं। चुनाव की तैयारी में जुटे निर्वाचन आयोग ने वी.एल.कांताराव को मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है। चुनाव आयोग ने इस पद पर तीन साल से तैनात सलीना सिंह को हटाकर, 1992 बैच के आईएएस अधिकारी वी.एल.कांताराम को नियुक्त किया है। वहीं लोकेश जाटव अतिरिक्त सीईओ होंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग को तीन नामों का पैनल भेजा था। इस पैनल में वी.एल.कांताराव के साथ संजय दुबे और के.सी.गुप्ता के नाम थे। निर्वाचन आयोग ने वी.एल.कांताराव के नाम को मंज़ूरी दी, जो कि अभी तक सूक्ष्म, लधु और मध्यम उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव थे।
इससे पहले भी कांताराव चुनाव से सम्बन्धित कामों को देख चुके हैं। साल 2013 में विधानसभा चुनाव के दौरान वे अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रह चुके हैं। इस फेरबदल की वजह यही है कि सलीना सिंह ने पिछले महीने ही तीन साल पूरे किए थे। निर्वाचन आयोग का आदेश है कि चुनाव ड्यूटी में लगे अफसर की एक ही जगह पर तीन साल से ज़्यादा पोस्टिंग नहीं होना चाहिए, इस लिहाज़ से सलीना सिंह को हटाया जाना तय था।
JULY 11 (WTN) – मध्य प्रदेश में इसी साल विधानभा चुनाव होने हैं। चुनाव की तैयारी में जुटे निर्वाचन आयोग ने वी.एल.कांताराव को मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है। चुनाव आयोग ने इस पद पर तीन साल से तैनात सलीना सिंह को हटाकर, 1992 बैच के आईएएस अधिकारी वी.एल.कांताराम को नियुक्त किया है। वहीं लोकेश जाटव अतिरिक्त सीईओ होंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग को तीन नामों का पैनल भेजा था। इस पैनल में वी.एल.कांताराव के साथ संजय दुबे और के.सी.गुप्ता के नाम थे। निर्वाचन आयोग ने वी.एल.कांताराव के नाम को मंज़ूरी दी, जो कि अभी तक सूक्ष्म, लधु और मध्यम उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव थे।
इससे पहले भी कांताराव चुनाव से सम्बन्धित कामों को देख चुके हैं। साल 2013 में विधानसभा चुनाव के दौरान वे अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रह चुके हैं। इस फेरबदल की वजह यही है कि सलीना सिंह ने पिछले महीने ही तीन साल पूरे किए थे। निर्वाचन आयोग का आदेश है कि चुनाव ड्यूटी में लगे अफसर की एक ही जगह पर तीन साल से ज़्यादा पोस्टिंग नहीं होना चाहिए, इस लिहाज़ से सलीना सिंह को हटाया जाना तय था।