मध्य प्रदेश कांग्रेस में हो सकता है ‘भीतरघात’ और ‘विद्रोह’!
Monday - July 16, 2018 12:11 pm ,
Category : WTN HINDI
बसपा 26 तो कांग्रेस लड़ सकती है 204 सीटों पर चुनाव
JULY 16 (WTN) - मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ‘एक्शन मोड’ में है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ लेकर 'जनता से सम्वाद' के लिए निकल गए हैं। वहीं कांग्रेस भी ‘रणनीति’ बनाने में लगी हुई है। यूपी में गोरखुपर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में ‘साझा प्रत्याशी’ के खिलाफ भाजपा की हार के बाद, कांग्रेस अब मध्य प्रदेश में भी गठबंधन के लिए अपनी ‘योजना’ पर काम कर रही है।
मध्य प्रदेश में पन्द्रह सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस भाजपा को मात देने के लिए इस बार बसपा से ‘गठबंधन’ करने को तैयार हो गई है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस अपनी ‘रणनीति’ के तहत मध्य प्रदेश में बसपा को 26 सीटें देने के लिए तैयार हो गई है। जबकि 206 सीटों पर खुद कांग्रेस ‘अपने दम’ पर भाजपा को ‘टक्कर’ देगी।
जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बसपा के साथ गठबंधन को ‘सहमति’ दे दी है। जिसके बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने बसपा अध्यक्ष मायावती से सीटों के बंटवारे पर विस्तार से चर्चा की है।
बसपा का वैसे तो मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बड़ा जनाधार नहीं है, लेकिन फिर भी प्रदेश के विंध्य, बुंदेलखण्ड और ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र में बसपा का ‘प्रभाव’ है। माना जा रहा है कि बसपा इन्हीं तीनों अंचलों में अपने प्रत्याशी खड़े कर सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा चार सीटों पर जीत हासिल कर पाई थी। वहीं कई सीटों पर बसपा को 10 हजार से ज़्यादा वोट मिले थे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के तत्कालीन बसपा अध्यक्ष नर्मदाप्रसाद अहिरवार ने कहा था कि कांग्रेस से किसी भी तरह के गठबंधन पर चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन अब स्थिति ‘बिल्कुल साफ़’ है कि भाजपा का मध्य प्रदेश में ‘विजय रथ’ रोकने के लिए कांग्रेस बसपा के साथ ‘गठबंधन’ करने जा रही है।
लेकिन, बसपा के साथ गठबंधन के बाद कांग्रेस में ‘भीतरघात’ और ‘बग़ावत’ भी हो सकती है। मध्य प्रदेश में पिछले 28 सालों से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच ही ‘मुख्य मुक़ाबला’ रहा है। बसपा और सपा जैसी पार्टियों उंगुलियों पर गिनने योग्य सीटें जीत पाईं हैं।
ऐसे में जिन सीटों पर कांग्रेस अपने प्रत्याशी नहीं उतारेगी, और वहां पर बसपा के प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे, वहां पर स्वाभाविक है कि टिकट की आस लगाए कांग्रेसी नेता ‘निराश’ और ‘नाराज़’ हों और भीतरघात कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएं। अब देखना होगा कि यदि कांग्रेस में ‘भीतरघात’ और ‘बग़ावत’ होती है, तो इससे कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कैसे निपटता है।
JULY 16 (WTN) - मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ‘एक्शन मोड’ में है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ लेकर 'जनता से सम्वाद' के लिए निकल गए हैं। वहीं कांग्रेस भी ‘रणनीति’ बनाने में लगी हुई है। यूपी में गोरखुपर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में ‘साझा प्रत्याशी’ के खिलाफ भाजपा की हार के बाद, कांग्रेस अब मध्य प्रदेश में भी गठबंधन के लिए अपनी ‘योजना’ पर काम कर रही है।
मध्य प्रदेश में पन्द्रह सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस भाजपा को मात देने के लिए इस बार बसपा से ‘गठबंधन’ करने को तैयार हो गई है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस अपनी ‘रणनीति’ के तहत मध्य प्रदेश में बसपा को 26 सीटें देने के लिए तैयार हो गई है। जबकि 206 सीटों पर खुद कांग्रेस ‘अपने दम’ पर भाजपा को ‘टक्कर’ देगी।
जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बसपा के साथ गठबंधन को ‘सहमति’ दे दी है। जिसके बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने बसपा अध्यक्ष मायावती से सीटों के बंटवारे पर विस्तार से चर्चा की है।
बसपा का वैसे तो मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बड़ा जनाधार नहीं है, लेकिन फिर भी प्रदेश के विंध्य, बुंदेलखण्ड और ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र में बसपा का ‘प्रभाव’ है। माना जा रहा है कि बसपा इन्हीं तीनों अंचलों में अपने प्रत्याशी खड़े कर सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा चार सीटों पर जीत हासिल कर पाई थी। वहीं कई सीटों पर बसपा को 10 हजार से ज़्यादा वोट मिले थे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के तत्कालीन बसपा अध्यक्ष नर्मदाप्रसाद अहिरवार ने कहा था कि कांग्रेस से किसी भी तरह के गठबंधन पर चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन अब स्थिति ‘बिल्कुल साफ़’ है कि भाजपा का मध्य प्रदेश में ‘विजय रथ’ रोकने के लिए कांग्रेस बसपा के साथ ‘गठबंधन’ करने जा रही है।
लेकिन, बसपा के साथ गठबंधन के बाद कांग्रेस में ‘भीतरघात’ और ‘बग़ावत’ भी हो सकती है। मध्य प्रदेश में पिछले 28 सालों से विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच ही ‘मुख्य मुक़ाबला’ रहा है। बसपा और सपा जैसी पार्टियों उंगुलियों पर गिनने योग्य सीटें जीत पाईं हैं।
ऐसे में जिन सीटों पर कांग्रेस अपने प्रत्याशी नहीं उतारेगी, और वहां पर बसपा के प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे, वहां पर स्वाभाविक है कि टिकट की आस लगाए कांग्रेसी नेता ‘निराश’ और ‘नाराज़’ हों और भीतरघात कर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएं। अब देखना होगा कि यदि कांग्रेस में ‘भीतरघात’ और ‘बग़ावत’ होती है, तो इससे कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कैसे निपटता है।