टिकट वितरण के लिए कांग्रेस में ‘कड़े नियम’
Friday - July 20, 2018 3:50 pm ,
Category : WTN HINDI
‘कसौटी कठिन’ है टिकट वितरण की
JULY 20 (WTN) – मध्य प्रदश में कांग्रेस इस बार भाजपा को हराने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती है। लगातार 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के लिए रणनीति बनाई है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, इसी रणनीति के आधार पर टिकट वितरण होगा।
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस ने दस बिन्दुओं के आधार पर टिकट वितरण की रणनीति बनाई है। आइये आपको बताते हैं कि आख़िर ये दस बिन्दु क्या हैं।
जो प्रत्याशी 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में हार चुके हैं उन्हें टिकट नहीं मिलेगा।
2013 के विधानसभा चुनाव में 20 हजार से ज़्यादा वोटों से हारे प्रत्याशी को भी टिकट नहीं मिलेगा।
यदि दो या उससे ज़्यादा बार किसी दूसरी पार्टी या फिर निर्दलीय प्रत्याशी रहते हुए हार मिली है, तो उसे टिकट नहीं मिलेगा।
यदि वर्तमान विधायक के ख़िलाफ अगर लोकसभा प्रत्याशी ने शिकायत की है, तो समीक्षा के बाद ही फैसला लिया जाएगा कि टिकट दिया जाए कि नहीं।
एक ही परिवार से दो अलग-अलग सदस्यों को चुनाव लड़ने का मौका मिला है और दोनों ही पराजित हुए हैं तो उन्हें इस बार मौका नहीं मिलेगा।
विधानसभा क्षेत्र में एक ही जाति विशेष का प्रत्याशी यदि लगातार दो बार से हार रहा है तो समीक्षा के बाद अन्य जाति के प्रत्याशी को टिकट में प्राथमिकता मिलेगी।
टिकट की दावेदार के परिवार का कोई भी सदस्य अगर भाजपा संगठन में पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि है, तो इसकी समीक्षा की जाएगी।
जो नए सदस्य कांग्रेस में आए हैं, उन्हें टिकट देने से पहले स्थानीय नेताओं की सर्वसम्मति ली जाएगी।
किसी सीट पर लगातार तीन या अधिक बार से विधानसभा चुनाव हारने की समीक्षा होगी। यहां पर किसी अन्य को प्राथमिकता दी जाएगी।
मात्र दो हज़ार से कम अंतर से हारी विधानसभा सीटों की समीक्षा अलग से की जाएगी। यदि इस सीट पर पुराने प्रत्याशी वहां सक्रिय रहे हैं, तो उन्हें टिकट वितरण में प्राथमिकता दी जाएगी।
माना जा रहा है कि कांग्रेस, भाजपा विरोधी वोटों का धुव्रीकरण रोकने के लिए बसपा और सपा से गठबंधन कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो सहयोगियों को जो सीटें दी जाएंगी, उस पर टिकट के दावेदार कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराज़गी और विद्रोह देखने को मिल सकता है।
JULY 20 (WTN) – मध्य प्रदश में कांग्रेस इस बार भाजपा को हराने के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती है। लगातार 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के लिए रणनीति बनाई है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, इसी रणनीति के आधार पर टिकट वितरण होगा।
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस ने दस बिन्दुओं के आधार पर टिकट वितरण की रणनीति बनाई है। आइये आपको बताते हैं कि आख़िर ये दस बिन्दु क्या हैं।
जो प्रत्याशी 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में हार चुके हैं उन्हें टिकट नहीं मिलेगा।
2013 के विधानसभा चुनाव में 20 हजार से ज़्यादा वोटों से हारे प्रत्याशी को भी टिकट नहीं मिलेगा।
यदि दो या उससे ज़्यादा बार किसी दूसरी पार्टी या फिर निर्दलीय प्रत्याशी रहते हुए हार मिली है, तो उसे टिकट नहीं मिलेगा।
यदि वर्तमान विधायक के ख़िलाफ अगर लोकसभा प्रत्याशी ने शिकायत की है, तो समीक्षा के बाद ही फैसला लिया जाएगा कि टिकट दिया जाए कि नहीं।
एक ही परिवार से दो अलग-अलग सदस्यों को चुनाव लड़ने का मौका मिला है और दोनों ही पराजित हुए हैं तो उन्हें इस बार मौका नहीं मिलेगा।
विधानसभा क्षेत्र में एक ही जाति विशेष का प्रत्याशी यदि लगातार दो बार से हार रहा है तो समीक्षा के बाद अन्य जाति के प्रत्याशी को टिकट में प्राथमिकता मिलेगी।
टिकट की दावेदार के परिवार का कोई भी सदस्य अगर भाजपा संगठन में पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि है, तो इसकी समीक्षा की जाएगी।
जो नए सदस्य कांग्रेस में आए हैं, उन्हें टिकट देने से पहले स्थानीय नेताओं की सर्वसम्मति ली जाएगी।
किसी सीट पर लगातार तीन या अधिक बार से विधानसभा चुनाव हारने की समीक्षा होगी। यहां पर किसी अन्य को प्राथमिकता दी जाएगी।
मात्र दो हज़ार से कम अंतर से हारी विधानसभा सीटों की समीक्षा अलग से की जाएगी। यदि इस सीट पर पुराने प्रत्याशी वहां सक्रिय रहे हैं, तो उन्हें टिकट वितरण में प्राथमिकता दी जाएगी।
माना जा रहा है कि कांग्रेस, भाजपा विरोधी वोटों का धुव्रीकरण रोकने के लिए बसपा और सपा से गठबंधन कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो सहयोगियों को जो सीटें दी जाएंगी, उस पर टिकट के दावेदार कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराज़गी और विद्रोह देखने को मिल सकता है।