मध्य प्रदेश सरकार अब ज़मीन अधिग्रहण का नहीं देगी ‘मुआवज़ा’!
Wednesday - July 25, 2018 11:47 am ,
Category : WTN HINDI
मुआवज़े के बदले में मिलेगा ‘विकास अधिकार प्रमाण पत्र’!
JULY 25 (WTN) – यदि आपकी ज़मीन या मकान मध्य प्रदेश के भोपाल या इन्दौर जैसे शहरों में है, तो यह ख़बर आपके लिए ‘काफी महत्वपूर्ण’ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश में विकास कार्यों के लिए शासन द्वारा ज़मीन अधिग्रहण के लिए ‘नया नियम’ बनाया है। यदि यह नियम लागू होता है, तो इससे आम लोगों को परेशानी होना स्वाभाविक है।
सरकार के नये नियम के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए सरकार द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली ज़मीन के बदले में ‘मुआवज़ा’ नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसके बदले ज़मीन मालिक को सरकार ‘विकास अधिकार प्रमाण’ पत्र देगी। जानकारी के मुताबिक, इस प्रमाण पत्र में सरकार ज़मीन मालिक को ‘फ्लोर एरिया रेशो’, यानि निर्माण योग्य क्षेत्र देगी, जिसका उपयोग ज़मीन मालिक किसी दूसरी जगह पर कर सकता है। इस नियम को सभी नगरीय निकायों में लागू किया जाना है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, इस सम्बन्ध में राज्य शासन ने ‘हस्तांतरणीय विकास अधिकार नियम’ का मसौदा जारी किया है जिस पर तीस दिनों में आपत्तियां मांगी गईं हैं
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आने वाले समय में राज्य सरकार मेट्रो और अन्य विकास कार्यों के लिए ज़मीनों का अधिग्रहण करेगी। इस नये नियम के मुताबिक, ज़मीन मालिक को भूमि अधिग्रहण के बदले ‘विकास अधिकार प्रमाण पत्र’ मिलेगा जिसे ज़मीन मालिक किसी अन्य स्थान पर बिल्डर या अन्य व्यक्ति को बेच सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार इंदौर और भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए विशेष तौर पर यह नियम लागू करने जा रही है। मेट्रो रूट और स्टेशन के लिए सरकार को ज़मीन अधिग्रहण करना है।
ज़मीन के अधिग्रहण के बदले में दिए जो ‘विकास अधिकार प्रमाण-पत्र’ मिलेगा, उसकी वैधता सिर्फ दस सालों की रहेगी। इस अवधि में यदि प्रमाण-पत्र धारक व्यक्ति ने इसका उपयोग नहीं किया, या इसे नहीं बेचा तो प्रमाण पत्र ‘अवैध’ हो जाएगा। हालांकि ज़मीन अधिग्रहण से यदि कोई भूमि स्वामी ‘असंतुष्ट’ है तो वह कोर्ट जा सकता है।
नये नियमों के मुताबिक, अधोसंरचना विकास और परिवहन ही नहीं, सरकार ‘मनोरंजन’ के लिए भी ज़मीन को अधिग्रहीत कर सकती है।
जानकारी के मुताबिक, ‘विकास अधिकार प्रमाण-पत्र’ का उपयोग राज्य सरकार द्वारा घोषित किए गए ‘प्राप्ति क्षेत्र’ और ‘प्रभाव क्षेत्र’ में ही होगा। ‘प्राप्ति क्षेत्र’ राज्य शासन उन क्षेत्रों को घोषित करेगा जहां पर कि विकास कार्य तुलनात्मक रूप से कम हुआ है। वहीं, मेट्रो रूट के दोनों और 500 मीटर क्षेत्र को ‘प्रभाव क्षेत्र’ माना जाएगा, ताकि वहां पर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन सकें।
माना जा रहा है कि सरकार के इस नये नियम का काफी ‘विरोध’ होगा। देखा गया है कि सरकार द्वारा अधिग्रहित ज़मीन के मुआवजे के लिए लोगों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है, यदि यह नया नियम लागू हो गया, तो इसमें लोगों को मुआवज़ा तो मिलेगा नहीं, बल्कि जो प्रमाण पत्र सरकार देगी वो कैसे बिकेगा इसमें सरकार का कोई भी ‘दखल’ भी नहीं होगा।
JULY 25 (WTN) – यदि आपकी ज़मीन या मकान मध्य प्रदेश के भोपाल या इन्दौर जैसे शहरों में है, तो यह ख़बर आपके लिए ‘काफी महत्वपूर्ण’ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश में विकास कार्यों के लिए शासन द्वारा ज़मीन अधिग्रहण के लिए ‘नया नियम’ बनाया है। यदि यह नियम लागू होता है, तो इससे आम लोगों को परेशानी होना स्वाभाविक है।
सरकार के नये नियम के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए सरकार द्वारा अधिग्रहित की जाने वाली ज़मीन के बदले में ‘मुआवज़ा’ नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसके बदले ज़मीन मालिक को सरकार ‘विकास अधिकार प्रमाण’ पत्र देगी। जानकारी के मुताबिक, इस प्रमाण पत्र में सरकार ज़मीन मालिक को ‘फ्लोर एरिया रेशो’, यानि निर्माण योग्य क्षेत्र देगी, जिसका उपयोग ज़मीन मालिक किसी दूसरी जगह पर कर सकता है। इस नियम को सभी नगरीय निकायों में लागू किया जाना है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, इस सम्बन्ध में राज्य शासन ने ‘हस्तांतरणीय विकास अधिकार नियम’ का मसौदा जारी किया है जिस पर तीस दिनों में आपत्तियां मांगी गईं हैं
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आने वाले समय में राज्य सरकार मेट्रो और अन्य विकास कार्यों के लिए ज़मीनों का अधिग्रहण करेगी। इस नये नियम के मुताबिक, ज़मीन मालिक को भूमि अधिग्रहण के बदले ‘विकास अधिकार प्रमाण पत्र’ मिलेगा जिसे ज़मीन मालिक किसी अन्य स्थान पर बिल्डर या अन्य व्यक्ति को बेच सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार इंदौर और भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए विशेष तौर पर यह नियम लागू करने जा रही है। मेट्रो रूट और स्टेशन के लिए सरकार को ज़मीन अधिग्रहण करना है।
ज़मीन के अधिग्रहण के बदले में दिए जो ‘विकास अधिकार प्रमाण-पत्र’ मिलेगा, उसकी वैधता सिर्फ दस सालों की रहेगी। इस अवधि में यदि प्रमाण-पत्र धारक व्यक्ति ने इसका उपयोग नहीं किया, या इसे नहीं बेचा तो प्रमाण पत्र ‘अवैध’ हो जाएगा। हालांकि ज़मीन अधिग्रहण से यदि कोई भूमि स्वामी ‘असंतुष्ट’ है तो वह कोर्ट जा सकता है।
नये नियमों के मुताबिक, अधोसंरचना विकास और परिवहन ही नहीं, सरकार ‘मनोरंजन’ के लिए भी ज़मीन को अधिग्रहीत कर सकती है।
जानकारी के मुताबिक, ‘विकास अधिकार प्रमाण-पत्र’ का उपयोग राज्य सरकार द्वारा घोषित किए गए ‘प्राप्ति क्षेत्र’ और ‘प्रभाव क्षेत्र’ में ही होगा। ‘प्राप्ति क्षेत्र’ राज्य शासन उन क्षेत्रों को घोषित करेगा जहां पर कि विकास कार्य तुलनात्मक रूप से कम हुआ है। वहीं, मेट्रो रूट के दोनों और 500 मीटर क्षेत्र को ‘प्रभाव क्षेत्र’ माना जाएगा, ताकि वहां पर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन सकें।
माना जा रहा है कि सरकार के इस नये नियम का काफी ‘विरोध’ होगा। देखा गया है कि सरकार द्वारा अधिग्रहित ज़मीन के मुआवजे के लिए लोगों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है, यदि यह नया नियम लागू हो गया, तो इसमें लोगों को मुआवज़ा तो मिलेगा नहीं, बल्कि जो प्रमाण पत्र सरकार देगी वो कैसे बिकेगा इसमें सरकार का कोई भी ‘दखल’ भी नहीं होगा।