ट्रेनें चल रहीं लेट, लेकिन रेलवे वसूलेगा एसी वेटिंग रूम का ‘चार्ज’
Thursday - July 26, 2018 12:27 pm ,
Category : WTN HINDI
एसी वेटिंग रूम में बैठने का अब लगेगा ‘चार्ज’
JULY 26 (WTN) – आप यदि एसी का टिकट लेकर ट्रेन में यात्रा करने जा रहे हैं, और आपकी ट्रेन तीन घण्टा लेट है तो स्वाभाविक है कि आप रेलवे स्टेशन के एसी वेटिंग रूम में जाकर बैठेंगे। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि रेलवे का नया नियम लागू हुआ, तो आपको एसी वेटिंग रूम में रुकने का ‘चार्ज’ देना होगा, वो भी दस रुपये प्रति घण्टा।
आने वाले दिनों में रेलवे, भोपाल रेल मण्डल समेत अन्य स्टेशनों पर एसी वेटिंग रूम में ठहरने वाले यात्रियों से प्रति घण्टा दस रुपये चार्ज वसूलने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक अभी इस योजना को नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन पर प्रयोग के तौर पर शुरु किया जाएगा। यदि प्रयोग सफल रहता है, तो इसे भोपाल रेल मण्डल में भी लागू किया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपके पास ट्रेन का एसी का टिकट है, तो अभी एसी वेटिंग रूम में ठहरने का कोई भी चार्ज नहीं लगता है। लेकिन नये नियम के लागू होने से यात्री से एसी वेटिंग रूम में रुकने का पहले घण्टे में कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन उसके बाद प्रति घण्टा, प्रति यात्री दस रुपये चार्ज लगेगा। यदि यात्री एसी वेटिंग रूम में चार्ज देकर नहीं बैठना चाहता है तो वो सामान्य वेटिंग रूम में बैठ सकता है।
रेलवे के इस प्रस्तावित नए नियम का विरोध होना शुरू हो गया है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे की प्राथमिकता ट्रेनों को सुरक्षित और समय पर चलाने की है, लेकिन बजाय ट्रेनों की टाइमिंग सुधारने के रेलवे नए-नए तरीकों से राजस्व बढ़ाने के तरीके ढूंढ रहा है। यदि ट्रेनें समय पर चलेंगी तो यात्रियों को वेटिंग रूम में रुकने की जरूरत नहीं है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे के प्रस्तावित नियम ‘तानाशाही’ को दर्शाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे के आधिकारिक डाटा के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान करीब तीस प्रतिशत ट्रेनें देर से चलीं। अप्रैल 2017 से मार्च 2018 तक रेलवे की ट्रेनों की समय पर चलने की प्रतिबद्धता सिर्फ़ 71.39 प्रतिशत ही रही। साल 2016-17 में यह दर 76.69 प्रतिशत थी। यानि कि 2016-17 के मुक़ाबले 2017-18 में पांच प्रतिशत की कमी आई।
ट्रेनों की लेटलतीफ़ी पर रेलवे का कहना है कि ट्रेक पर मेन्टेनेन्स के चलते ऐसा हुआ है। जब देश में 30 प्रतिशत ट्रेनें समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं, तो ऐसे में ट्रेनों के लेट होने का ख़ामियाज़ा यात्री क्यों भुगतें, इसका जवाब शायद रेलवे के पास नहीं है। पहले रेलवे ट्रेनों को समय पर चलाए, उसके बाद उसे अधिकार है एसी वेटिंग रूम में चार्ज वसूलने का।
JULY 26 (WTN) – आप यदि एसी का टिकट लेकर ट्रेन में यात्रा करने जा रहे हैं, और आपकी ट्रेन तीन घण्टा लेट है तो स्वाभाविक है कि आप रेलवे स्टेशन के एसी वेटिंग रूम में जाकर बैठेंगे। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि रेलवे का नया नियम लागू हुआ, तो आपको एसी वेटिंग रूम में रुकने का ‘चार्ज’ देना होगा, वो भी दस रुपये प्रति घण्टा।
आने वाले दिनों में रेलवे, भोपाल रेल मण्डल समेत अन्य स्टेशनों पर एसी वेटिंग रूम में ठहरने वाले यात्रियों से प्रति घण्टा दस रुपये चार्ज वसूलने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक अभी इस योजना को नई दिल्ली और हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन पर प्रयोग के तौर पर शुरु किया जाएगा। यदि प्रयोग सफल रहता है, तो इसे भोपाल रेल मण्डल में भी लागू किया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपके पास ट्रेन का एसी का टिकट है, तो अभी एसी वेटिंग रूम में ठहरने का कोई भी चार्ज नहीं लगता है। लेकिन नये नियम के लागू होने से यात्री से एसी वेटिंग रूम में रुकने का पहले घण्टे में कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन उसके बाद प्रति घण्टा, प्रति यात्री दस रुपये चार्ज लगेगा। यदि यात्री एसी वेटिंग रूम में चार्ज देकर नहीं बैठना चाहता है तो वो सामान्य वेटिंग रूम में बैठ सकता है।
रेलवे के इस प्रस्तावित नए नियम का विरोध होना शुरू हो गया है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे की प्राथमिकता ट्रेनों को सुरक्षित और समय पर चलाने की है, लेकिन बजाय ट्रेनों की टाइमिंग सुधारने के रेलवे नए-नए तरीकों से राजस्व बढ़ाने के तरीके ढूंढ रहा है। यदि ट्रेनें समय पर चलेंगी तो यात्रियों को वेटिंग रूम में रुकने की जरूरत नहीं है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे के प्रस्तावित नियम ‘तानाशाही’ को दर्शाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे के आधिकारिक डाटा के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान करीब तीस प्रतिशत ट्रेनें देर से चलीं। अप्रैल 2017 से मार्च 2018 तक रेलवे की ट्रेनों की समय पर चलने की प्रतिबद्धता सिर्फ़ 71.39 प्रतिशत ही रही। साल 2016-17 में यह दर 76.69 प्रतिशत थी। यानि कि 2016-17 के मुक़ाबले 2017-18 में पांच प्रतिशत की कमी आई।
ट्रेनों की लेटलतीफ़ी पर रेलवे का कहना है कि ट्रेक पर मेन्टेनेन्स के चलते ऐसा हुआ है। जब देश में 30 प्रतिशत ट्रेनें समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं, तो ऐसे में ट्रेनों के लेट होने का ख़ामियाज़ा यात्री क्यों भुगतें, इसका जवाब शायद रेलवे के पास नहीं है। पहले रेलवे ट्रेनों को समय पर चलाए, उसके बाद उसे अधिकार है एसी वेटिंग रूम में चार्ज वसूलने का।