मोदी बनाम ममता!
Wednesday - August 1, 2018 1:13 pm ,
Category : WTN HINDI
2019 की तैयारी में ममता बनर्जी, विपक्ष को ‘एकजुट’ करने की कोशिश
AUG 01 (WTN) – भाजपा और नरेन्द्र मोदी को 2019 के लोकसभा चुनाव शिकस्त देने के लिए यदि कोई सबसे ज्यादा बैचेन दिख रहा है, तो वो हैं तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। असम में एनआरसी की रिपोर्ट आने के बाद जिस तरह से ममता बनर्जी की ‘बयानबाजी’ सामने आई है, उससे उनके इरादे साफ़ नज़र आ रहे हैं कि वे किसी भी कीमत पर 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी को हराने के लिए किसी से भी गठबंधन कर सकती हैं।
एनआरसी के मुद्दे पर भाजपा नेताओं के बयान के बाद ममता बनर्जी काफ़ी गुस्से में नज़र आ रही हैं। कहीं एनसीआर के कारण पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीति पर ‘ग्रहण’ ना लग जाए, इसलिए ममता बनर्जी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश के लिए तीन दिनों के दिल्ली दौरे पर हैं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं से उनकी मुलाकात का कार्यक्रम है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी 19 जनवरी को कोलकाता में होने वाली अपनी रैली में शामिल होने के लिए सोनिया गांधी को आमंत्रित करने उनके घर जाएंगी।
भाजपा कोई भी मौका ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में घेरने का नहीं छोड़ रही है। ऐसे में भाजपा की ‘रणनीति’ को समझते हुए ममता बनर्जी चाहती हैं कि भाजपा विरोधी सभी पार्टियों को ‘एक मंच’ पर लाया जाए। अपनी इसी योजना को अमल में लाने के लिए ममता बनर्जी पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से मुलाकात करेंगी। इससे पहले ममता बनर्जी ने एनसीपी चीफ़ शरद प्रवार, सांसद सुप्रिया सुले, बागी तेवर अपनाए भाजपा नेता यशवन्त सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा के साथ-साथ पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी से मुलाकात की थी।
कहा जा रहा है कि 19 जनवरी को कोलकाता में होने वाली रैली को ममता बनर्जी ‘एन्टी भाजपा रैली’ का रूप देने की कोशिश में हैं। ममता बनर्जी अच्छे से जानती हैं कि यदि विपक्षी पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी तो भाजपा को हराना मुश्किल है। भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ रोकने के लिए ममता बनर्जी की रणनीति है कि सभी दल मिलकर एक ‘बड़ा गठबंधन’ बनाएं।
उत्तर से लेकर दक्षिण तक, और पूर्व से लेकर पश्चिम तक भाजपा ने विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है। लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का ‘मज़बूत किला’ गिराने के लिए भाजपा अपनी पूरी ताकत लगाए हुए है। भाजपा की इस कोशिश की पूरी जानकारी ममता बनर्जी को है। इसलिए ममता बनर्जी 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती हैं। अब देखना होगा कि ममता बनर्जी की समूचे विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश सफ़ल हो पाती है या नहीं।
AUG 01 (WTN) – भाजपा और नरेन्द्र मोदी को 2019 के लोकसभा चुनाव शिकस्त देने के लिए यदि कोई सबसे ज्यादा बैचेन दिख रहा है, तो वो हैं तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। असम में एनआरसी की रिपोर्ट आने के बाद जिस तरह से ममता बनर्जी की ‘बयानबाजी’ सामने आई है, उससे उनके इरादे साफ़ नज़र आ रहे हैं कि वे किसी भी कीमत पर 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी को हराने के लिए किसी से भी गठबंधन कर सकती हैं।
एनआरसी के मुद्दे पर भाजपा नेताओं के बयान के बाद ममता बनर्जी काफ़ी गुस्से में नज़र आ रही हैं। कहीं एनसीआर के कारण पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीति पर ‘ग्रहण’ ना लग जाए, इसलिए ममता बनर्जी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश के लिए तीन दिनों के दिल्ली दौरे पर हैं। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं से उनकी मुलाकात का कार्यक्रम है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी 19 जनवरी को कोलकाता में होने वाली अपनी रैली में शामिल होने के लिए सोनिया गांधी को आमंत्रित करने उनके घर जाएंगी।
भाजपा कोई भी मौका ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में घेरने का नहीं छोड़ रही है। ऐसे में भाजपा की ‘रणनीति’ को समझते हुए ममता बनर्जी चाहती हैं कि भाजपा विरोधी सभी पार्टियों को ‘एक मंच’ पर लाया जाए। अपनी इसी योजना को अमल में लाने के लिए ममता बनर्जी पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से मुलाकात करेंगी। इससे पहले ममता बनर्जी ने एनसीपी चीफ़ शरद प्रवार, सांसद सुप्रिया सुले, बागी तेवर अपनाए भाजपा नेता यशवन्त सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा के साथ-साथ पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी से मुलाकात की थी।
कहा जा रहा है कि 19 जनवरी को कोलकाता में होने वाली रैली को ममता बनर्जी ‘एन्टी भाजपा रैली’ का रूप देने की कोशिश में हैं। ममता बनर्जी अच्छे से जानती हैं कि यदि विपक्षी पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी तो भाजपा को हराना मुश्किल है। भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ रोकने के लिए ममता बनर्जी की रणनीति है कि सभी दल मिलकर एक ‘बड़ा गठबंधन’ बनाएं।
उत्तर से लेकर दक्षिण तक, और पूर्व से लेकर पश्चिम तक भाजपा ने विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है। लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का ‘मज़बूत किला’ गिराने के लिए भाजपा अपनी पूरी ताकत लगाए हुए है। भाजपा की इस कोशिश की पूरी जानकारी ममता बनर्जी को है। इसलिए ममता बनर्जी 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती हैं। अब देखना होगा कि ममता बनर्जी की समूचे विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश सफ़ल हो पाती है या नहीं।