ममता बनर्जी का ‘सेल्फ गोल’!
Thursday - August 2, 2018 2:48 pm ,
Category : WTN HINDI
ममता बनर्जी के ‘गृहयुद्ध’ वाले बयान पर बवाल, भाजपा को हो सकता है राजनीतिक फ़ायदा
AUG 02 (WTN) - असम में जारी हुआ एनआरसी का डाटा देश में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। अपने वोटबैंक की ख़ातिर विपक्षी पार्टियां एनआरसी के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हैं। इस बीच एनआरसी के मुद्दे पर ममता बनर्जी के एक बयान ने देश की राजनीति में बड़ी बहस शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी का यह बयान एक ‘सेल्फ गोल’ है।
असम में एनआरसी का ड्रॉफ्ट जारी होने के बाद मचे राजनीतिक बवाल में ममता बनर्जी ने एक गैरज़िम्मेदाराना बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने कहा था, अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश में ‘गृहयुद्ध’ की स्थिति हो सकती है।
अपने गुस्सैल स्वभाव के लिए पहचानी जाने वाली ममता बनर्जी के इस बयान के बाद भाजपा इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने तो विरोध किया ही। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस की करीबी बनने की कोशिश कर रहीं ममता बनर्जी के इस बयान से कांग्रेस भी ख़ासी नाराज़ दिख रही है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस पार्टी एनआरसी के मुद्दे पर शान्ति के साथ तथ्यों पर विरोध दर्ज कराना चाहती है। लेकिन वह किसी भी स्थिति में ‘गृहयुद्ध’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं करेगी। कहा जा रहा है कि मंगलवार को इस मुद्दे पर कांग्रेस की एक बैठक भी हुई। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक के बाद कांग्रेस की तरफ़ से यह सफ़ाई दी गई कि वे ममता बनर्जी के ‘गृहयुद्ध’ वाले बयान का समर्थन नहीं करती है।
एनआरसी का मुद्दा ऐसा है जिसके आधार पर भाजपा पूरे देश में वोटों का ध्रुवीकरण करने में सफ़ल हो सकती है। इसी डर से कांग्रेस ने ममता बनर्जी के ‘गृहयुद्ध’ वाले बयान का समर्थन नहीं करने का फ़ैसला लिया है।
जानकारी के मुताबिक एनआरसी के मुद्दे पर ममता बनर्जी से चर्चा करने की ज़िम्मेदारी अहमद पटेल और गुलामनबी आज़ाद को दी गई है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि ममता बनर्जी एनआरसी के मुद्दे पर काफ़ी नाराज़ और आक्रामक हैं और उन्होंने भाजपा के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है।
असम में एनआरसी का डाटा सामने आने के बाद भाजपा के कई नेताओं ने इसी तरह का सर्वे पश्चिम बंगाल में भी करने की मांग की है, जिसके बाद ममता बनर्जी ने कई गैरज़िम्मेदाराना बयान दिये। ममता बनर्जी के इन्हीं बयानों के दम पर भाजपा लोकसभा चुनाव में उन्हें घेरने की रणनीति बना सकती है। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी के इसी बयान को लेकर भाजपा सोशल मीडिया में उनके ख़िलाफ़ एक मुहिम चला सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का ‘गृहयुद्ध’ वाला बयान उनकी पार्टी और उनके साथ खड़ी होने वाली पार्टियों के लिए ‘नुकसानदायक’ साबित होगा। ममता बनर्जी के इसी बयान को भाजपा भुनाने में कोई भी कसर नहीं छोड़गी। साथ ही ममता बनर्जी के साथ आने वाली विपक्षी पार्टियों को भी जनता के इस सवाल का ज़वाब देना पड़ेगा कि क्या वे ममता बनर्जी के गृहयुद्ध वाले बयान से समहत हैं। हो सकता है कि कई विपक्षी पार्टियां ममता बनर्जी से ‘दूरी’ बना लें।
इसलिए कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी से ख़ुद को पहले ही ममता बनर्जी के ‘गृहयुद्ध’ वाले बयान से अलग कर लिया है, ताकि भाजपा उस पर किसी भी तरह के कोई भी आरोप नहीं लगा सके। लेकिन इतना तो तय है कि ममता बनर्जी के इस बयान की गूंज काफ़ी देर तक सुनाई देगी। कहीं ऐसा ना हो कि ममता बनर्जी का यह बयान उनके लिए ‘आत्मघाती’ साबित हो।
AUG 02 (WTN) - असम में जारी हुआ एनआरसी का डाटा देश में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। अपने वोटबैंक की ख़ातिर विपक्षी पार्टियां एनआरसी के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हैं। इस बीच एनआरसी के मुद्दे पर ममता बनर्जी के एक बयान ने देश की राजनीति में बड़ी बहस शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी का यह बयान एक ‘सेल्फ गोल’ है।
असम में एनआरसी का ड्रॉफ्ट जारी होने के बाद मचे राजनीतिक बवाल में ममता बनर्जी ने एक गैरज़िम्मेदाराना बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने कहा था, अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश में ‘गृहयुद्ध’ की स्थिति हो सकती है।
अपने गुस्सैल स्वभाव के लिए पहचानी जाने वाली ममता बनर्जी के इस बयान के बाद भाजपा इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने तो विरोध किया ही। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस की करीबी बनने की कोशिश कर रहीं ममता बनर्जी के इस बयान से कांग्रेस भी ख़ासी नाराज़ दिख रही है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस पार्टी एनआरसी के मुद्दे पर शान्ति के साथ तथ्यों पर विरोध दर्ज कराना चाहती है। लेकिन वह किसी भी स्थिति में ‘गृहयुद्ध’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं करेगी। कहा जा रहा है कि मंगलवार को इस मुद्दे पर कांग्रेस की एक बैठक भी हुई। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक के बाद कांग्रेस की तरफ़ से यह सफ़ाई दी गई कि वे ममता बनर्जी के ‘गृहयुद्ध’ वाले बयान का समर्थन नहीं करती है।
एनआरसी का मुद्दा ऐसा है जिसके आधार पर भाजपा पूरे देश में वोटों का ध्रुवीकरण करने में सफ़ल हो सकती है। इसी डर से कांग्रेस ने ममता बनर्जी के ‘गृहयुद्ध’ वाले बयान का समर्थन नहीं करने का फ़ैसला लिया है।
जानकारी के मुताबिक एनआरसी के मुद्दे पर ममता बनर्जी से चर्चा करने की ज़िम्मेदारी अहमद पटेल और गुलामनबी आज़ाद को दी गई है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि ममता बनर्जी एनआरसी के मुद्दे पर काफ़ी नाराज़ और आक्रामक हैं और उन्होंने भाजपा के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है।
असम में एनआरसी का डाटा सामने आने के बाद भाजपा के कई नेताओं ने इसी तरह का सर्वे पश्चिम बंगाल में भी करने की मांग की है, जिसके बाद ममता बनर्जी ने कई गैरज़िम्मेदाराना बयान दिये। ममता बनर्जी के इन्हीं बयानों के दम पर भाजपा लोकसभा चुनाव में उन्हें घेरने की रणनीति बना सकती है। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी के इसी बयान को लेकर भाजपा सोशल मीडिया में उनके ख़िलाफ़ एक मुहिम चला सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का ‘गृहयुद्ध’ वाला बयान उनकी पार्टी और उनके साथ खड़ी होने वाली पार्टियों के लिए ‘नुकसानदायक’ साबित होगा। ममता बनर्जी के इसी बयान को भाजपा भुनाने में कोई भी कसर नहीं छोड़गी। साथ ही ममता बनर्जी के साथ आने वाली विपक्षी पार्टियों को भी जनता के इस सवाल का ज़वाब देना पड़ेगा कि क्या वे ममता बनर्जी के गृहयुद्ध वाले बयान से समहत हैं। हो सकता है कि कई विपक्षी पार्टियां ममता बनर्जी से ‘दूरी’ बना लें।
इसलिए कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी से ख़ुद को पहले ही ममता बनर्जी के ‘गृहयुद्ध’ वाले बयान से अलग कर लिया है, ताकि भाजपा उस पर किसी भी तरह के कोई भी आरोप नहीं लगा सके। लेकिन इतना तो तय है कि ममता बनर्जी के इस बयान की गूंज काफ़ी देर तक सुनाई देगी। कहीं ऐसा ना हो कि ममता बनर्जी का यह बयान उनके लिए ‘आत्मघाती’ साबित हो।