कांग्रेस को लेना होगा ‘बड़ा फैसला’!
Saturday - August 4, 2018 4:13 pm ,
Category : WTN HINDI
आखिर क्या फैसला लेती है कांग्रेस?
AUG 04 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए बस कुछ ही महीने बचे हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही मुख्य पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटी हुईं हैं। भाजपा जहां अपने दम पर चुनाव लड़ेगी, वहीं लगातार 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस हो सकता है कि बसपा और सपा के साथ गठबंधन करे। इस समय कांग्रेस के सामने सही फैसला लेने की चुनौती है कि वो अकेल चुनाव लड़े या फिर अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन करे।
इधर, मध्य प्रदेश में कुछ छोटे राजनीतिक दलों की सक्रियता से लगने लगा है कि भाजपा को हराने के लिए सभी पार्टियां एक साथ चुनाव लड़ सकती हैं। कुछ दिनों पहले भोपाल में हुआ लोकक्रांति सम्मेलन इसी रणनीति का हिस्सा लगता है।
कभी जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष और एनडीए के संयोजक रहे शरद यादव छोटी पार्टियों को एक करने की कमान सम्भाले हुए हैं। जदयू से बाहर कर दिये गये लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने उन दलों को एकसाथ लाने की कोशिश है जिनका उद्देश्य भाजपा को हराना है।
कद्दावर नेता शरद यादव जानते हैं कि ना उनकी पार्टी में और ना ही उनके साथ आने वाली छोटी पार्टियों में इतनी राजनीतिक शक्ति और हैसियत है कि वे भाजपा को हरा सकें। इसलिए इन पार्टियों ने भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस को भी साथ आने का न्यौता दिया है।
अपने पुराने राजनीतिक सम्बन्धों के दम पर शरद यादव बहुजन संघर्ष दल, गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी, सीपीआई और सीपीएम समेत कुछ और छोटे दलों को अपने साथ शामिल करने में सफल रहे हैं। लेकिन बिना कांग्रेस के इन पार्टियों के महागठबंधन का कोई भी अस्तित्व नहीं है।
यदि कांग्रेस, बसपा और सपा के साथ-साथ इन छोटी पार्टियों के साथ महागठबंधन कर लेती है, तो कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए ख़तरे की बात है। शरद यादव जानते हैं कि भाजपा विरोधी वोटों को एकजुट करने से ही भाजपा को हराया जा सकता है। यदि भाजपा विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण हो गया तो भाजपा अपने दम पर फिर से जीत सकती है।
लेकिन इन सबमें सबसे बड़ी परेशानी कांग्रेस के साथ है। यदि वो अपने दम पर चुनाव लड़ती है तो उसे भाजपा विरोधी वोटों के ध्रुवीकरण का डर है, और इसी ध्रुवीकरण के कारण भाजपा जीत सकती है। वहीं यदि कांग्रेस बसपा और सपा समेत अन्य छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करती है, तो मतदाताओं के सामने सन्देश जाएगा कि कांग्रेस ने भाजपा से हार मान ली है और खुद के दम पर भाजपा को हराने की ताकत अब कांग्रेस में नहीं हैं।
दोनों ही परिस्थितियों में कांग्रेस की साख दांव पर लगी हुई है। अब देखना होगा कि क्या फैसला कांग्रेस करती है। अकेली चुनाव लड़ती है या फिर महागठबंधन करती है। जैसा कि आप जानते हैं कि यह पूरा फैसला लेना है कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को।
राहुल गांधी के मध्य प्रदेश में लिये गये फैसलों के बाद ही तय होगा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए वे कितने तैयार हैं। क्योंकि यदि मध्य प्रदेश में सभी पार्टियों के साथ महागठबंधन करने के बाद भी भाजपा जीत गई, तो यह 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए केन्द्रीय स्तर पर बन रहे सम्भावित महागठबंधन के लिए किसी झटके से कम नहीं होगा।
AUG 04 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए बस कुछ ही महीने बचे हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही मुख्य पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटी हुईं हैं। भाजपा जहां अपने दम पर चुनाव लड़ेगी, वहीं लगातार 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस हो सकता है कि बसपा और सपा के साथ गठबंधन करे। इस समय कांग्रेस के सामने सही फैसला लेने की चुनौती है कि वो अकेल चुनाव लड़े या फिर अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन करे।
इधर, मध्य प्रदेश में कुछ छोटे राजनीतिक दलों की सक्रियता से लगने लगा है कि भाजपा को हराने के लिए सभी पार्टियां एक साथ चुनाव लड़ सकती हैं। कुछ दिनों पहले भोपाल में हुआ लोकक्रांति सम्मेलन इसी रणनीति का हिस्सा लगता है।
कभी जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष और एनडीए के संयोजक रहे शरद यादव छोटी पार्टियों को एक करने की कमान सम्भाले हुए हैं। जदयू से बाहर कर दिये गये लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने उन दलों को एकसाथ लाने की कोशिश है जिनका उद्देश्य भाजपा को हराना है।
कद्दावर नेता शरद यादव जानते हैं कि ना उनकी पार्टी में और ना ही उनके साथ आने वाली छोटी पार्टियों में इतनी राजनीतिक शक्ति और हैसियत है कि वे भाजपा को हरा सकें। इसलिए इन पार्टियों ने भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस को भी साथ आने का न्यौता दिया है।
अपने पुराने राजनीतिक सम्बन्धों के दम पर शरद यादव बहुजन संघर्ष दल, गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी, सीपीआई और सीपीएम समेत कुछ और छोटे दलों को अपने साथ शामिल करने में सफल रहे हैं। लेकिन बिना कांग्रेस के इन पार्टियों के महागठबंधन का कोई भी अस्तित्व नहीं है।
यदि कांग्रेस, बसपा और सपा के साथ-साथ इन छोटी पार्टियों के साथ महागठबंधन कर लेती है, तो कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए ख़तरे की बात है। शरद यादव जानते हैं कि भाजपा विरोधी वोटों को एकजुट करने से ही भाजपा को हराया जा सकता है। यदि भाजपा विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण हो गया तो भाजपा अपने दम पर फिर से जीत सकती है।
लेकिन इन सबमें सबसे बड़ी परेशानी कांग्रेस के साथ है। यदि वो अपने दम पर चुनाव लड़ती है तो उसे भाजपा विरोधी वोटों के ध्रुवीकरण का डर है, और इसी ध्रुवीकरण के कारण भाजपा जीत सकती है। वहीं यदि कांग्रेस बसपा और सपा समेत अन्य छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करती है, तो मतदाताओं के सामने सन्देश जाएगा कि कांग्रेस ने भाजपा से हार मान ली है और खुद के दम पर भाजपा को हराने की ताकत अब कांग्रेस में नहीं हैं।
दोनों ही परिस्थितियों में कांग्रेस की साख दांव पर लगी हुई है। अब देखना होगा कि क्या फैसला कांग्रेस करती है। अकेली चुनाव लड़ती है या फिर महागठबंधन करती है। जैसा कि आप जानते हैं कि यह पूरा फैसला लेना है कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को।
राहुल गांधी के मध्य प्रदेश में लिये गये फैसलों के बाद ही तय होगा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए वे कितने तैयार हैं। क्योंकि यदि मध्य प्रदेश में सभी पार्टियों के साथ महागठबंधन करने के बाद भी भाजपा जीत गई, तो यह 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए केन्द्रीय स्तर पर बन रहे सम्भावित महागठबंधन के लिए किसी झटके से कम नहीं होगा।