पूजा करते समय आप तो नहीं करते 'यह गलतियां'?
Sunday - August 5, 2018 5:27 pm ,
Category : WTN HINDI
कभी भी किसी भी मूर्ति से सिन्दूर लेकर माथे पर ‘ना’ लगाएं
AUG 05 (WTN) – हिन्दू धर्म में ईश्वर की पूजा का बड़ा महत्व है। भक्ति भाव और विधि विधान से की गई पूजा से ईश्वर शीघ्र प्रसन्न होते हैं। लेकिन शास्त्रों में लिखा गया है कि यदि पूजा करते समय गलती कि तो पूजा का पुण्य नहीं मिलता है। आइये आपको बताते हैं कि पूजा करते समय कौन-कौन सी सावधानियां रखना चाहिए।
शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि भगवान विष्णु को चावल, श्रीगणेश और भगवान शंकर को तुलसी, देवी को दूर्वा और सूर्य को बिल्व पत्र कभी भी पूजा में नहीं चढ़ाना चाहिए।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु को तुलसी, देवाधिदेव महादेव को बिल्व पत्र, श्रीगणेश को हरी दूर्वा, सूर्य भगवान को लाल कनेर के फूल और मां दुर्गा को लौंग और लाल फूल चढ़ाने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैँ।
पूजा के दौरान घी का दीपक दाईं तरफ जबकि तेल का दीपक बाईं तरफ होना चाहिए। वहीं जलपात्र, घण्टा, धूपदानी आदि को हमेशा बाईं तरफ रखना चाहिए।
भगवान को स्नान कराने के बाद चंदन का टीका लगाने का विधान शास्त्रों में है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देवी-देवताओं को हमेशा अनामिका यानि कि हाथ की तीसरी उंगुली से ही तिलक या सिन्दूर लगाएं।
याद रखें कि गणेश जी, हनुमान जी, दुर्गा माता या किसी भी मूर्ति से सिन्दूर लेकर माथे पर नहीं लगाना चाहिए।
भगवान की आरती करते समय कभी भी एक दीपक से दूसरा दीपक या धूप या कपूर ना जलाएं।
पूजा करते समय यदि कोई पूजा सामग्री छूट जाए तो बीच में ना उठें। ऐसी स्थिति में भगवान को चावल और फूल चढ़ाएं और मन में उस सामग्री का ध्यान करें।
AUG 05 (WTN) – हिन्दू धर्म में ईश्वर की पूजा का बड़ा महत्व है। भक्ति भाव और विधि विधान से की गई पूजा से ईश्वर शीघ्र प्रसन्न होते हैं। लेकिन शास्त्रों में लिखा गया है कि यदि पूजा करते समय गलती कि तो पूजा का पुण्य नहीं मिलता है। आइये आपको बताते हैं कि पूजा करते समय कौन-कौन सी सावधानियां रखना चाहिए।
शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि भगवान विष्णु को चावल, श्रीगणेश और भगवान शंकर को तुलसी, देवी को दूर्वा और सूर्य को बिल्व पत्र कभी भी पूजा में नहीं चढ़ाना चाहिए।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु को तुलसी, देवाधिदेव महादेव को बिल्व पत्र, श्रीगणेश को हरी दूर्वा, सूर्य भगवान को लाल कनेर के फूल और मां दुर्गा को लौंग और लाल फूल चढ़ाने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैँ।
पूजा के दौरान घी का दीपक दाईं तरफ जबकि तेल का दीपक बाईं तरफ होना चाहिए। वहीं जलपात्र, घण्टा, धूपदानी आदि को हमेशा बाईं तरफ रखना चाहिए।
भगवान को स्नान कराने के बाद चंदन का टीका लगाने का विधान शास्त्रों में है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देवी-देवताओं को हमेशा अनामिका यानि कि हाथ की तीसरी उंगुली से ही तिलक या सिन्दूर लगाएं।
याद रखें कि गणेश जी, हनुमान जी, दुर्गा माता या किसी भी मूर्ति से सिन्दूर लेकर माथे पर नहीं लगाना चाहिए।
भगवान की आरती करते समय कभी भी एक दीपक से दूसरा दीपक या धूप या कपूर ना जलाएं।
पूजा करते समय यदि कोई पूजा सामग्री छूट जाए तो बीच में ना उठें। ऐसी स्थिति में भगवान को चावल और फूल चढ़ाएं और मन में उस सामग्री का ध्यान करें।