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कांग्रेस को फिर ले डूबेगी ‘गुटबाजी’

Monday - August 6, 2018 3:40 pm , Category : WTN HINDI

कौन खत्म करेगा कांग्रेस में गुटबाजी?

AUG 06 (WTN) – एक तरफ वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश कांग्रेस में ‘एकता’ लाने की कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ‘गुटबाजी’ है कि जो कांग्रेस में ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। ताजा मामला विदिशा जिले का है, जहां पर प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के सामने ही कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में ‘भिड़’ गए। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक इस दौरान कार्यकर्ताओं में जमकर गाली गलौज और झूमाझटकी हुई।

जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया विदिशा कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे। इसी दौरान किसी बात पर कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। विवाद इतना बड़ गया कि कार्यकर्ताओं में जमकर ‘झूमाझटकी’ भी हुई।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले रीवा में दीपक बावरिया के साथ कथित रूप से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने झूमाझटकी की थी। मामला गर्माता देख प्रदेश कांग्रेस ने 6 कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर ‘अनुशानहीनता’ का आरोप लगाते हुए पार्टी से निकाल दिया था।

दीपक बावरिया कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के काफी करीबी माने जाते हैं। कहा जाता है कि रीवा में दीपक बावरिया के साथ हुए ‘बर्ताव’ के बाद राहुल गांधी ने ‘नाराज़गी’ ज़ाहिर की थी। रीवा के बाद विदिशा में जिस तरह से कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आई है उससे तो साफ होता है कि कांग्रेस एकजुट होने के कितने भी दावे कर ले, लेकिन हकीकत यही है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी कम नहीं हुई है बल्कि बढ़ गई है।

यदि कांग्रेस ने अपनी गुटबाजी पर नियंत्रण नहीं किया तो 2018 के विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए फिर से किसी बुरे सपने से कम नहीं होंगे। गुटबाजी के कारण ही लगातार 15 सालों से मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधानसभा चुनाव हार रही है। कांग्रेस के बड़े नेता गुटबाजी की बात को कितना ही नकारे, लेकिन कांग्रेस में गुटबाजी सबके सामने है।

कांग्रेस की करीबी न्यूज़ वेबसाइट नेशनल हेराल्ड ने भी अपनी साइट पर प्रकाशित किए एक सर्वे में साफ किया है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस गठबंधन करे या फिर बिना गठबंधन के चुनाव लड़े, दोनों ही स्थिति में हार तय है। यदि इतना होने के बाद भी कांग्रेस में गुटबाजी खत्म नहीं होती है, तो फिर एक बार फिर से भाजपा की जीत की राह आसान हो जाएगी।


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