रोचक हुआ राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव
Tuesday - August 7, 2018 3:12 pm ,
Category : WTN HINDI
सौ.राज्य सभा टीवी
एनडीए के हरिवंश के मुकाबले यूपीए की वंदना चव्हाण हो सकती हैं उम्मीदवार, एआईएडीएमके, बीजेडी और शिवसेना के रुख पर सभी की निगाहें
AUG 07 (WTN) – राज्यसभा उपसभापति चुनाव के लिए एनडीए और यूपीए दोनों ने ही अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर लिये हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनडीए ने नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से पहली बार सांसद बने हरिवंश को राज्यसभा के उपसभापति चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। तो यूपीए ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद वंदना चव्हाण को अपना उम्मीदवार बना सकती है। उपसभापति पद के लिए 9 अगस्त को मतदान होना है जिसके लिए एनडीए और यूपीए दोनों ही दलों ने खेमेबाजी शुरू कर दी है।
लेकिन इस सबके बीच, एनडीए की हमेशा से अहम सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल ने जेडीयू सांसद हरिवंश के नाम पर एतरात जताया है। कहा जा रहा है कि पार्टी चुनाव में अपना उम्मीदवार चाहती है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने हरिवंश के नाम पर सहमति के लिए शिरोमणी अकाली दल अध्यक्ष प्रकाश सिंह बादल से खुद बात की है। लेकिन कहा जा रहा है कि अकाली दल, उपसभापति चुनाव में वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रह सकती है। भाजपा और अकाली दल के बीच सालों से काफी अच्छे सम्बन्ध रहे हैं, लेकिन पहली बार ऐसा होगा जब अकाली दल एनडीए के साथ वोट नहीं करेगी।
शिरोमणी अकाली दल के राज्यसभा में तीन सांसद हैं। इधर, कुछ मुद्दों पर शिवसेना भी भाजपा से नाराज चल रही है। अभी कुछ दिनों पहले अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग के दौरान शिवसेना ने लोकसभा में दूरी बनाई रखी थी। शिवसेना के पास भी राज्यसभा में तीन सांसद हैं। शिरोमणी अकाली दल के साथ-साथ शिवसेना क्या फैसला लेती है इस पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं।
यदि अकाली दल और शिवसेना की नाराजगी इसी तरह चलती रही और अगर इन दोनों ही पार्टियों ने एनडीए के पक्ष में वोट नहीं किया तो एनडीए के उम्मीदवार का चुनाव जीतना काफी मुश्किल होगा। जहां एक तरफ कहा जा रहा है कि अकाली दल वोटिंग से अनुपस्थित रह सकती है तो दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि यूपीए की मराठी उम्मीदवार वंदना चव्हाण यदि चुनाव में खड़ी होती हैं तो इस कारण शिवसेना यूपीए के पक्ष में वोट कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो एनडीए के लिए मुसीबतें बढ़ जाएंगी।
उच्च सदन यानि राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है तो ऐसे में चुनाव परिणाम बीजेडी, एआईएडीएमके, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियों के रुख पर निर्भर करेगा। कहा जा रहा है कि यह पार्टियां किसी कारण विशेष के साथ एनडीए के साथ गठजोड़ कर सकती हैं। जानकारी के मुताबिक 35 सांसद तटस्थ है और इन्हीं के रूख पर सभी कुछ निर्भर करेगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्यसभा में इस समय 244 सांसद ही वोट करने की स्थिति में हैं। किसी भी पक्ष को जीतने के लिए 123 मत जरूरी हैं। वर्तमान में राज्यसभा में एनडीए के पास 115 सीटें हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 73 सीटें भाजपा के पास हैं। वहीं यूपीए के पास कुल 113 सीटें हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 50 सीटें कांग्रेस के पास हैं। वहीं एआईएडीएमके के 13, जेडीयू के 6, निर्दलीय भी 6 और 7 नामांकित सांसद हैं। वहीं बीजेडी के 9 सांसद हैं।
ऐसे में एआईएडीएमके और बीजेडी के सांसदों पर एनडीए और यूपीए दोनों ही की निगाहें टिकी हुईं हैं। कहा जा रहा है कि एआईएडीएमके एनडीए का साथ दे सकती है, वहीं बीजेडी के रुख के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। कहा जा रहा है कि शरद पवार को बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक से अपने पुराने सम्बन्धों के आधार पर वंदना चव्हाण के लिए समर्थन मिल सकता है यदि वे चुनाव लड़ती हैं तो। वहीं महिला होने का लाभ भी वंदना चव्हाण को मिल सकता है। अब देखना है कि नौ अगस्त को होने वाले चुनाव में किसका साथ कौन देता है।
AUG 07 (WTN) – राज्यसभा उपसभापति चुनाव के लिए एनडीए और यूपीए दोनों ने ही अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर लिये हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनडीए ने नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से पहली बार सांसद बने हरिवंश को राज्यसभा के उपसभापति चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। तो यूपीए ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद वंदना चव्हाण को अपना उम्मीदवार बना सकती है। उपसभापति पद के लिए 9 अगस्त को मतदान होना है जिसके लिए एनडीए और यूपीए दोनों ही दलों ने खेमेबाजी शुरू कर दी है।
लेकिन इस सबके बीच, एनडीए की हमेशा से अहम सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल ने जेडीयू सांसद हरिवंश के नाम पर एतरात जताया है। कहा जा रहा है कि पार्टी चुनाव में अपना उम्मीदवार चाहती है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने हरिवंश के नाम पर सहमति के लिए शिरोमणी अकाली दल अध्यक्ष प्रकाश सिंह बादल से खुद बात की है। लेकिन कहा जा रहा है कि अकाली दल, उपसभापति चुनाव में वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रह सकती है। भाजपा और अकाली दल के बीच सालों से काफी अच्छे सम्बन्ध रहे हैं, लेकिन पहली बार ऐसा होगा जब अकाली दल एनडीए के साथ वोट नहीं करेगी।
शिरोमणी अकाली दल के राज्यसभा में तीन सांसद हैं। इधर, कुछ मुद्दों पर शिवसेना भी भाजपा से नाराज चल रही है। अभी कुछ दिनों पहले अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग के दौरान शिवसेना ने लोकसभा में दूरी बनाई रखी थी। शिवसेना के पास भी राज्यसभा में तीन सांसद हैं। शिरोमणी अकाली दल के साथ-साथ शिवसेना क्या फैसला लेती है इस पर सभी की निगाहें टिकी हुईं हैं।
यदि अकाली दल और शिवसेना की नाराजगी इसी तरह चलती रही और अगर इन दोनों ही पार्टियों ने एनडीए के पक्ष में वोट नहीं किया तो एनडीए के उम्मीदवार का चुनाव जीतना काफी मुश्किल होगा। जहां एक तरफ कहा जा रहा है कि अकाली दल वोटिंग से अनुपस्थित रह सकती है तो दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि यूपीए की मराठी उम्मीदवार वंदना चव्हाण यदि चुनाव में खड़ी होती हैं तो इस कारण शिवसेना यूपीए के पक्ष में वोट कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो एनडीए के लिए मुसीबतें बढ़ जाएंगी।
उच्च सदन यानि राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है तो ऐसे में चुनाव परिणाम बीजेडी, एआईएडीएमके, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियों के रुख पर निर्भर करेगा। कहा जा रहा है कि यह पार्टियां किसी कारण विशेष के साथ एनडीए के साथ गठजोड़ कर सकती हैं। जानकारी के मुताबिक 35 सांसद तटस्थ है और इन्हीं के रूख पर सभी कुछ निर्भर करेगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्यसभा में इस समय 244 सांसद ही वोट करने की स्थिति में हैं। किसी भी पक्ष को जीतने के लिए 123 मत जरूरी हैं। वर्तमान में राज्यसभा में एनडीए के पास 115 सीटें हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 73 सीटें भाजपा के पास हैं। वहीं यूपीए के पास कुल 113 सीटें हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 50 सीटें कांग्रेस के पास हैं। वहीं एआईएडीएमके के 13, जेडीयू के 6, निर्दलीय भी 6 और 7 नामांकित सांसद हैं। वहीं बीजेडी के 9 सांसद हैं।
ऐसे में एआईएडीएमके और बीजेडी के सांसदों पर एनडीए और यूपीए दोनों ही की निगाहें टिकी हुईं हैं। कहा जा रहा है कि एआईएडीएमके एनडीए का साथ दे सकती है, वहीं बीजेडी के रुख के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। कहा जा रहा है कि शरद पवार को बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक से अपने पुराने सम्बन्धों के आधार पर वंदना चव्हाण के लिए समर्थन मिल सकता है यदि वे चुनाव लड़ती हैं तो। वहीं महिला होने का लाभ भी वंदना चव्हाण को मिल सकता है। अब देखना है कि नौ अगस्त को होने वाले चुनाव में किसका साथ कौन देता है।