दाम्पत्य जीवन में रहेगा प्रेम, यदि तुला राशि के जातक इस ज्योतिर्लिंग की करेंगे उपासना
Thursday - August 9, 2018 9:50 am ,
Category : WTN HINDI
तुला राशि के जातक करें रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का दर्शन
AUG 09 (WTN) – आज हम आपको बताते हैं कि तुला राशि के जातकों को कौन से ज्योतिर्लिंग की पूजा करना चाहिए जिससे उनके जीवन में सुख समृद्धि आए।
शास्त्रों में मान्यता है कि तुला राशि वाले जातकों को रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए। तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम ज़िले में स्थित भगवान राम द्वारा स्थापित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का सम्बन्ध तुला राशि से है। भगवान राम ने सीता की तलाश में समुद्र पर सेतु निर्माण के लिए इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।
मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सद्भाव बना रहता है। जो लोग महाशिवरात्रि के दिन रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का दर्शन नहीं कर सकते हैं, वे दूध में बताशा मिलाकर किसी भी शिवलिंग को स्नान कराएं और आक का फूल भगवान शिव को अर्पित करें।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रामेश्वररम ज्योतिर्लिंग हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। उत्तर भारत में जो मान्यता काशी की है, वहीं दक्षिण भारत में रामेश्वरम की है। रामेश्वरम हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख के आकार का द्वीप है। बहुत पहले यह द्वीप भारत की मुख्य भूमि के साथ जुड़ा हुआ था, लेकिन बाद में सागर की लहरों ने इसे मिलाने वाली कड़ी को काट डाला, जिससे वह चारों ओर पानी से घिरकर टापू बन गया।
रामेश्वरम शहर और रामनाथजी का प्रसिद्ध मंदिर इस टापू के उत्तर के छोर पर है। टापू के दक्षिणी कोने में धनुषकोटि नामक तीर्थ है, जहां हिंद महासागर से बंगाल की खाड़ी मिलती है। इसी स्थान को सेतुबंध कहा जाता है।
AUG 09 (WTN) – आज हम आपको बताते हैं कि तुला राशि के जातकों को कौन से ज्योतिर्लिंग की पूजा करना चाहिए जिससे उनके जीवन में सुख समृद्धि आए।
शास्त्रों में मान्यता है कि तुला राशि वाले जातकों को रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए। तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम ज़िले में स्थित भगवान राम द्वारा स्थापित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का सम्बन्ध तुला राशि से है। भगवान राम ने सीता की तलाश में समुद्र पर सेतु निर्माण के लिए इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।
मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सद्भाव बना रहता है। जो लोग महाशिवरात्रि के दिन रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का दर्शन नहीं कर सकते हैं, वे दूध में बताशा मिलाकर किसी भी शिवलिंग को स्नान कराएं और आक का फूल भगवान शिव को अर्पित करें।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रामेश्वररम ज्योतिर्लिंग हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। उत्तर भारत में जो मान्यता काशी की है, वहीं दक्षिण भारत में रामेश्वरम की है। रामेश्वरम हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख के आकार का द्वीप है। बहुत पहले यह द्वीप भारत की मुख्य भूमि के साथ जुड़ा हुआ था, लेकिन बाद में सागर की लहरों ने इसे मिलाने वाली कड़ी को काट डाला, जिससे वह चारों ओर पानी से घिरकर टापू बन गया।
रामेश्वरम शहर और रामनाथजी का प्रसिद्ध मंदिर इस टापू के उत्तर के छोर पर है। टापू के दक्षिणी कोने में धनुषकोटि नामक तीर्थ है, जहां हिंद महासागर से बंगाल की खाड़ी मिलती है। इसी स्थान को सेतुबंध कहा जाता है।