मोदी ने फिर दी विपक्ष को ‘मात’
Thursday - August 9, 2018 3:22 pm ,
Category : WTN HINDI
राज्यसभा के उपसभापति पद पर एनडीए के हरिवंश जीते, सामने आई राहुल गांधी की ‘भूल’
AUG 09 (WTN) – पहले लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान, और अब राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने जिस तरह से विपक्ष खासतौर पर कांग्रेस को चारों खानों चित किया है, उससे संकेत मिलने लगा है कि भविष्य में भाजपा को हराने के लिए जिस ‘महागठबंधन’ की बात की जा रही है कहीं वो ‘खोखला’ साबित ना हो जाए।
राज्यसभा के उपसभापति चुनाव में एनडीए के हरिवंश ने यूपीए के बीके हरिप्रसाद को हरा दिया। इस हार से सबसे ‘ज़्यादा’ झटका लगा है कांग्रेस को। राज्यसभा में हमेशा से ‘दमदार’ स्थिति में रहने वाली कांग्रेस को मोदी और शाह की जोड़ी ने उसी राज्यसभा में शिकस्त दी है। इस हार के बाद यूपीए में ‘रणनीति’ की कमी साफ तौर पर दिखाई दी।
राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव को एनडीए ने काफी ‘संजीदगी’ से लड़ा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने एनडीए के सहयोगी दलों को ‘साधकर’ साथ रखा, इतना ही नहीं इन्होंने विपक्ष के कुछ दलों का समर्थन भी हासिल किया। इसलिए एनडीए प्रत्याशी हरिवंश को एनडीए से बाहर के दलों का भी समर्थन मिला।
मोदी-शाह जानते थे कि राज्यसभा में एनडीए के इतने सांसद नहीं थे कि वे अपने दम पर उपसभापति के चुनाव में हरिवंश को जीता सकते। एनडीए को पता था कि इस चुनाव में बीजेडी यानि की बीजू जनता दल के नौ सांसद काफी ‘अहम’ भूमिका निभा सकते हैं। राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उडीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से फोन पर बात कर एनडीए उम्मीदवार हरिवंश के लिए समर्थन मांगा।
जिस समय विपक्ष, खासतौर पर कांग्रेस अपना उम्मीदवार राज्यसभा में उपसभापति चुनाव के लिए तय नहीं कर पा रह थी, उस समय मोदी और नीतीश कुमार ने नवीन पटनायक को समर्थन के लिए राजी करके साबित कर दिया कि राजनीति में ‘टाइमिंग’ काफी मायने रखती है।
बात करें विपक्षी पार्टियों की तो समाजवादी पार्टी का कहना है कि अगर आम राय बनती तो ज़्यादा अच्छा होता।
वहीं आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि विपक्ष की एकता में सबसे बड़ा रोड़ा कांग्रेस खुद है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि नीतीश कुमार ने अरविंद केजरीवाल को फोन करके एनडीए उम्मीदवार हरिवंश के लिए समर्थन मांगा था, लेकिन भाजपा के साथ होने के कारण आम आदमी पार्टी समर्थन नहीं कर सकती थी। आम आदमी पार्टी का कहना था कि यदि कांग्रेस को समर्थन चाहिए था तो राहुल गांधी अरविंद केजरीवाल से बात करते। लेकिन राहुल गांधी ने अरविन्द केजरीवाल से बात नहीं की और नतीजा रहा कि आम आदमी पार्टी वोटिंग से बाहर रही।
मोदी और शाह जो चाहते थे वही हुआ। दोनों की ‘प्लानिंग’ थी की उपसभापति के चुनाव में विपक्ष की ‘फूट’ खुलकर सबके सामने आए। विपक्ष की एकता की पोल कुछ दिनों पहले लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी खुल गई थी। लोकसभा के बाद राज्यसभा में विपक्ष की एकता में ‘सेंध’ लगाने में सफल रहने और जीत हासिल करने के बाद भाजपा का ‘उत्साह’ बढ़ा होगा।
अब लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा को एक ‘बड़ा मुद्दा’ मिल गया है। भाजपा इस बात को जोरशोर से प्रचारित करेगी कि जब विपक्षी पार्टियां उपसभापति के नाम पर एकजुटता नहीं दिखा सकी तो फिर प्रधानमंत्री के नाम पर एक कैसे होंगे।
कहा जा सकता है कि मोदी-शाह-नीतीश ने मिलकर विपक्षी एकता में जमकर ‘सेंध’ लगाई है। यदि विपक्षी एकता इसी तरह से ‘बिखरी’ रही तो 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी-शाह की जोड़ी को रोकना विपक्ष के लिए ‘नामुमकिन’ है। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी हार के बाद राहुल गांधी को राजनीति में ‘माहिर’ होने के लिए ‘काफी मेहनत’ करने की जरूरत है।
AUG 09 (WTN) – पहले लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान, और अब राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने जिस तरह से विपक्ष खासतौर पर कांग्रेस को चारों खानों चित किया है, उससे संकेत मिलने लगा है कि भविष्य में भाजपा को हराने के लिए जिस ‘महागठबंधन’ की बात की जा रही है कहीं वो ‘खोखला’ साबित ना हो जाए।
राज्यसभा के उपसभापति चुनाव में एनडीए के हरिवंश ने यूपीए के बीके हरिप्रसाद को हरा दिया। इस हार से सबसे ‘ज़्यादा’ झटका लगा है कांग्रेस को। राज्यसभा में हमेशा से ‘दमदार’ स्थिति में रहने वाली कांग्रेस को मोदी और शाह की जोड़ी ने उसी राज्यसभा में शिकस्त दी है। इस हार के बाद यूपीए में ‘रणनीति’ की कमी साफ तौर पर दिखाई दी।
राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव को एनडीए ने काफी ‘संजीदगी’ से लड़ा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने एनडीए के सहयोगी दलों को ‘साधकर’ साथ रखा, इतना ही नहीं इन्होंने विपक्ष के कुछ दलों का समर्थन भी हासिल किया। इसलिए एनडीए प्रत्याशी हरिवंश को एनडीए से बाहर के दलों का भी समर्थन मिला।
मोदी-शाह जानते थे कि राज्यसभा में एनडीए के इतने सांसद नहीं थे कि वे अपने दम पर उपसभापति के चुनाव में हरिवंश को जीता सकते। एनडीए को पता था कि इस चुनाव में बीजेडी यानि की बीजू जनता दल के नौ सांसद काफी ‘अहम’ भूमिका निभा सकते हैं। राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उडीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से फोन पर बात कर एनडीए उम्मीदवार हरिवंश के लिए समर्थन मांगा।
जिस समय विपक्ष, खासतौर पर कांग्रेस अपना उम्मीदवार राज्यसभा में उपसभापति चुनाव के लिए तय नहीं कर पा रह थी, उस समय मोदी और नीतीश कुमार ने नवीन पटनायक को समर्थन के लिए राजी करके साबित कर दिया कि राजनीति में ‘टाइमिंग’ काफी मायने रखती है।
बात करें विपक्षी पार्टियों की तो समाजवादी पार्टी का कहना है कि अगर आम राय बनती तो ज़्यादा अच्छा होता।
वहीं आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि विपक्ष की एकता में सबसे बड़ा रोड़ा कांग्रेस खुद है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि नीतीश कुमार ने अरविंद केजरीवाल को फोन करके एनडीए उम्मीदवार हरिवंश के लिए समर्थन मांगा था, लेकिन भाजपा के साथ होने के कारण आम आदमी पार्टी समर्थन नहीं कर सकती थी। आम आदमी पार्टी का कहना था कि यदि कांग्रेस को समर्थन चाहिए था तो राहुल गांधी अरविंद केजरीवाल से बात करते। लेकिन राहुल गांधी ने अरविन्द केजरीवाल से बात नहीं की और नतीजा रहा कि आम आदमी पार्टी वोटिंग से बाहर रही।
मोदी और शाह जो चाहते थे वही हुआ। दोनों की ‘प्लानिंग’ थी की उपसभापति के चुनाव में विपक्ष की ‘फूट’ खुलकर सबके सामने आए। विपक्ष की एकता की पोल कुछ दिनों पहले लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी खुल गई थी। लोकसभा के बाद राज्यसभा में विपक्ष की एकता में ‘सेंध’ लगाने में सफल रहने और जीत हासिल करने के बाद भाजपा का ‘उत्साह’ बढ़ा होगा।
अब लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा को एक ‘बड़ा मुद्दा’ मिल गया है। भाजपा इस बात को जोरशोर से प्रचारित करेगी कि जब विपक्षी पार्टियां उपसभापति के नाम पर एकजुटता नहीं दिखा सकी तो फिर प्रधानमंत्री के नाम पर एक कैसे होंगे।
कहा जा सकता है कि मोदी-शाह-नीतीश ने मिलकर विपक्षी एकता में जमकर ‘सेंध’ लगाई है। यदि विपक्षी एकता इसी तरह से ‘बिखरी’ रही तो 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी-शाह की जोड़ी को रोकना विपक्ष के लिए ‘नामुमकिन’ है। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी हार के बाद राहुल गांधी को राजनीति में ‘माहिर’ होने के लिए ‘काफी मेहनत’ करने की जरूरत है।