हर मनोकामना होगी पूर्ण, धुन राशि के जातक करें ‘इस’ शिवलिंग का अभिषेक
Saturday - August 11, 2018 9:57 am ,
Category : WTN HINDI
धनु राशि के जातक करें काशी विश्वनाथ की पूजा
AUG 11 (WTN) – ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि धनु जाति के जातकों को वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा विधि विधान से करना चाहिए इससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का सम्बन्ध धनु राशि से है। धनु राशि के जातकों को सावन के महीने में और महाशिवरात्रि के दिन गंगाजल में केसर मिलाकर देवाधिदेव महादेव शिव शंकर को इसे अर्पित करना चाहिए।
धुन राशि के लोगों को काशी विश्वनाथ शिवलिंग को बेलपत्र और पीला कनेर का फूल चढ़ाना चाहिए। शिवलिंग का अभिषेक करते समय “ओम तत्पुरूषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रूद्रः प्रचोदयात।“ मंत्र का जप करना चाहिए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काशी विश्वनाथ मन्दिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है। काशी को दुनिया का सबसे पुराना जीवित शहर कहा जाता है। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि काशी नगर का प्रलयकाल में भी लोप नहीं होता है। उस समय भगवान शंकर स्वयं काशी नगरी को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं और सृष्टि काल आने पर इसे नीचे उतार देते हैं।
हिन्दू धर्म में मान्यता है कि काशी में मृत्यु होने पर मोक्ष प्राप्त होता है। हिन्दू धर्म के महान संत आदि शंकराचार्य, संत एकनाथ, गोस्वामी तुलसीदास, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद सरस्वती ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किये हैं और ज्ञान प्राप्त किया है।
AUG 11 (WTN) – ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि धनु जाति के जातकों को वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा विधि विधान से करना चाहिए इससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का सम्बन्ध धनु राशि से है। धनु राशि के जातकों को सावन के महीने में और महाशिवरात्रि के दिन गंगाजल में केसर मिलाकर देवाधिदेव महादेव शिव शंकर को इसे अर्पित करना चाहिए।
धुन राशि के लोगों को काशी विश्वनाथ शिवलिंग को बेलपत्र और पीला कनेर का फूल चढ़ाना चाहिए। शिवलिंग का अभिषेक करते समय “ओम तत्पुरूषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रूद्रः प्रचोदयात।“ मंत्र का जप करना चाहिए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काशी विश्वनाथ मन्दिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है। काशी को दुनिया का सबसे पुराना जीवित शहर कहा जाता है। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि काशी नगर का प्रलयकाल में भी लोप नहीं होता है। उस समय भगवान शंकर स्वयं काशी नगरी को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं और सृष्टि काल आने पर इसे नीचे उतार देते हैं।
हिन्दू धर्म में मान्यता है कि काशी में मृत्यु होने पर मोक्ष प्राप्त होता है। हिन्दू धर्म के महान संत आदि शंकराचार्य, संत एकनाथ, गोस्वामी तुलसीदास, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद सरस्वती ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किये हैं और ज्ञान प्राप्त किया है।