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राहुल गांधी की ‘राजनीतिक भूल’, अरिवन्द केजरीवाल ने बनाई विपक्ष से ‘दूरी’

Friday - August 10, 2018 11:17 am , Category : WTN HINDI

विपक्षी एकता की ‘खुली पोल’, आम आदमी पार्टी ने 2019 में सम्भावित महागठबंधन का हिस्सा होने से किया ‘इनकार’ 

AUG 10 (WTN) – लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान और राज्यसभा में उपसभापति चुनाव के दौरान जिस तरह से विपक्ष की एकता की पोल सबके सामने खुली है, उससे 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिलकर घेरने की विपक्ष की रणनीति को बड़ा झटका लगा है। अब दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अरविन्द केजरीवल ने 2019 में बनने वाले विपक्ष के सम्भावित महागठबंधन का हिस्सा बनने से इनकार करके एक और बड़ा झटका विपक्षी पार्टियों और खासतौर से कांग्रेस को दिया है।

विपक्षी पार्टियों पर ‘कटाक्ष’ करते हुए अरविन्द केजरीवाल ने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी महागठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। केजरीवाल ने कहा कि महागठबंधन में शामिल होने वाली पार्टियों की देश के विकास में कोई भूमिका नहीं रही है।
 
विपक्ष के मंसूबों पर पानी फेरते हुए अरविन्द केजरीवाल ने कहा, “'गठबंधन की राजनीति मेरे लिए मायने नहीं रखती। मेरे लिए राजनीति जनता और उसका विकास है। जो हमने दिल्ली में पिछले तीन सालों में किया है,  इन पार्टियों ने सत्तर साल में उसका थोड़ा सा काम भी करके नहीं दिखाया है।''

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव में विपक्ष की “एकता में सेंध” लगाने में मोदी और शाह सफल रहे। यूपीए के पास एनडीए से ज्यादा सांसद होने के बाद भी यूपीए उम्मीदार बीके हरिप्रसाद को एनडीए के हरिवंश से हार का सामना करना पड़ा। विपक्ष में एकता की ‘जिम्मेदारी’ कांग्रेस की थी, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ‘लापरवाही’ खुलकर सबके सामने आई कि वे ‘समर्थन’ जुटाने के लिए अरविन्द केजरीवाल को फोन तक नहीं कर सके।

आम आदमी पार्टी का कहना है कि राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव में नीतीश कुमार ने अरविन्द केजरीवाल को फोन करके जेडीयू सांसद हरिवंश के लिए समर्थन मांगा था, लेकिन चूंकि भाजपा साथ थी इसलिए आम आदमी पार्टी ने जेडीयू सांसद हरिवंश को समर्थन नहीं दिया।

आम आदमी पार्टी का कहना है कि यूपीए के प्रत्याशी बीके हरिप्रसाद को समर्थन इसलिए नहीं दिया, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अरविन्द केजरीवाल को फोन लगाकर समर्थन मांगना तक उचित नहीं समझा। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधते हुए कहा है कि विपक्षी एकता में “सबसे बड़ा रोड़ा” कांग्रेस ही है।

कुछ समय पहले मीडिया में ख़बर सामने आई थी कि लोकसभा चुनाव के लिए दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन हो सकता है। लेकिन लगता है कि राहुल गांधी ने अरविन्द केजरीवाल को फोन ना करके एक बड़ी ‘राजनीतिक भूल’ की है। वहीं नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार ने नवीन पटनायक को ‘समय’ से फोन करके राज्यसभा के उपसभापति चुनाव में नौ सांसदों को समर्थन हासिल कर लिया।  

यदि आम आदमी पार्टी विपक्ष के सम्भावित महागठबंधन से दूर रहती है तो इसका सबसे बड़ा ‘फायदा’ भाजपा को होगा। क्योंकि इससे भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ होगा जो भाजपा को लाभ पहुंचाएगा। इस पूरे घटनाक्रम से साफ होता है कि राहुल गांधी अभी राजनीति की रणनीति में ‘काफी कमजोर’ हैं। यदि आम आदमी पार्टी सम्भावित महागठबंधन से दूर होती है तो इसकी जिम्मेदारी राहुल गांधी की होगी। और उस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा कोई खुश होगा तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। 
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