झूठे आरोपों से मुक्ति के लिए मकर राशि के जातक करें ‘इस’ ज्योतिर्लिंग की पूजा
Sunday - August 12, 2018 9:54 am ,
Category : WTN HINDI
हर समस्या दूर करेंगे भगवान त्रयम्बकेश्वर
AUG 12 (WTN) - मकर राशि के जातकों को त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करना चाहिए। त्रयम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग का सम्बन्ध मकर राशि से है। ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन मकर राशि के जातकों को गंगाजल में गुड़ मिलाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए। इस दौरान भगवान शिव को नीले का रंग फूल और धतूरा चढ़ाना चाहिए। मकर राशि के जातकों को भगवान त्रयम्बकेश्वर का ध्यान करते हुए “ओम नमः शिवाय” मंत्र का 5 माला जप करना चाहिए। ऐसा करने से मकर राशि के जातकों को उन पर लगे सभी झूठे आरोपों से मुक्ति मिलती है।
इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की कथा गौतम ऋषि और उन पर लगे गौहत्या के झूठे आरोपों से जुड़ी हुई है। इसी स्थान पर भगवान शिव ने गौतम ऋषि को दर्शन दिये थे और गौहत्या के झूठे आरोपों से मुक्त किया था। जिसके बाद गौतम ऋषि की प्रार्थना पर भगवान शिव यहां पर त्रयम्बक ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुए। कहा जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य मिलता है।
त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग नासिक शहर से 28 किलोमीटर दूर स्थित है। इस मंदिर के अंदर तीन छोटे-छोटे शिवलिंग है। इन शिवलिंगों को ब्रह्मा, विष्णु और शिव इन तीन देवों का प्रतीक माना जाता है। इस प्राचीन मंदिर की स्थापत्य शैली पूरी तरह से काले पत्थर पर अपनी आकर्षक वास्तुकला और मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है।
AUG 12 (WTN) - मकर राशि के जातकों को त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करना चाहिए। त्रयम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग का सम्बन्ध मकर राशि से है। ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन मकर राशि के जातकों को गंगाजल में गुड़ मिलाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए। इस दौरान भगवान शिव को नीले का रंग फूल और धतूरा चढ़ाना चाहिए। मकर राशि के जातकों को भगवान त्रयम्बकेश्वर का ध्यान करते हुए “ओम नमः शिवाय” मंत्र का 5 माला जप करना चाहिए। ऐसा करने से मकर राशि के जातकों को उन पर लगे सभी झूठे आरोपों से मुक्ति मिलती है।
इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की कथा गौतम ऋषि और उन पर लगे गौहत्या के झूठे आरोपों से जुड़ी हुई है। इसी स्थान पर भगवान शिव ने गौतम ऋषि को दर्शन दिये थे और गौहत्या के झूठे आरोपों से मुक्त किया था। जिसके बाद गौतम ऋषि की प्रार्थना पर भगवान शिव यहां पर त्रयम्बक ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुए। कहा जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य मिलता है।
त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग नासिक शहर से 28 किलोमीटर दूर स्थित है। इस मंदिर के अंदर तीन छोटे-छोटे शिवलिंग है। इन शिवलिंगों को ब्रह्मा, विष्णु और शिव इन तीन देवों का प्रतीक माना जाता है। इस प्राचीन मंदिर की स्थापत्य शैली पूरी तरह से काले पत्थर पर अपनी आकर्षक वास्तुकला और मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध है।