यदि गुस्सा करना है शांत, तो कुम्भ राशि के जातक करें इस ज्योतिर्लिंग की पूजा
Monday - August 13, 2018 10:50 am ,
Category : WTN HINDI
कुम्भ राशि के जातक करें केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का अभिषेक
AUG 13 (WTN) – ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि कुम्भ राशि के जातकों को उत्तराखण्ड में स्थित केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा करना चाहिए। मान्यता है कि केदारनाथ शिवलिंग को पंचामृच से स्नान करना चाहिए। इसके बाद कमल का फूल और धतूरा चढ़ाना चाहिए। कहा जाता है कि इस राशि के जातक अपना काम बिना किसी के मदद के करना चाहते हैं। कुम्भ राशि के लोगों को गुस्सा जल्दी आता है, लेकिन गुस्सा शांत भी जल्दी हो जाता है।
मान्यता है कि कुम्भ राशि के जातक यदि विधि विधान से केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का अभिषेक करते हैं, तो उनका गुस्से पर नियंत्रण हो जाता है और गुस्से के कारण कोई भी नुकसान नहीं होता है। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग को पंचामृत से स्नान कराने से क्रोध नियंत्रित होता है।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हिमालय की वादियों में उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित है। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हरिद्वार से लगभग 253 किलोमीटर दूर और ऋषिकेश से 229 किलोमीटर दूर है। मान्यता है कि केदारनाथ मंदिर का निर्माण स्वयं पाण्डजवों ने करवाया था। यहां के मंदिर में अंदर की दीवारों पर विस्तृत नक्काशियां देखने को मिलेंगी। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग एक पिरामिड के रूप में है।
AUG 13 (WTN) – ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि कुम्भ राशि के जातकों को उत्तराखण्ड में स्थित केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा करना चाहिए। मान्यता है कि केदारनाथ शिवलिंग को पंचामृच से स्नान करना चाहिए। इसके बाद कमल का फूल और धतूरा चढ़ाना चाहिए। कहा जाता है कि इस राशि के जातक अपना काम बिना किसी के मदद के करना चाहते हैं। कुम्भ राशि के लोगों को गुस्सा जल्दी आता है, लेकिन गुस्सा शांत भी जल्दी हो जाता है।
मान्यता है कि कुम्भ राशि के जातक यदि विधि विधान से केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का अभिषेक करते हैं, तो उनका गुस्से पर नियंत्रण हो जाता है और गुस्से के कारण कोई भी नुकसान नहीं होता है। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग को पंचामृत से स्नान कराने से क्रोध नियंत्रित होता है।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हिमालय की वादियों में उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित है। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हरिद्वार से लगभग 253 किलोमीटर दूर और ऋषिकेश से 229 किलोमीटर दूर है। मान्यता है कि केदारनाथ मंदिर का निर्माण स्वयं पाण्डजवों ने करवाया था। यहां के मंदिर में अंदर की दीवारों पर विस्तृत नक्काशियां देखने को मिलेंगी। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग एक पिरामिड के रूप में है।