100 अख़बार, 100 सम्पादकीय, एक विषय!
Tuesday - August 14, 2018 2:37 pm ,
Category : WTN HINDI
डोनाल्ड ट्रम्प पर ‘मीडिया विरोधी’ होने का आरोप, 100 अख़बार एक साथ लिखेंगे ट्रम्प के ‘ख़िलाफ़’ सम्पादकीय
AUG 14 (WTN) – जब एक साथ सौ अख़बार दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान के ‘ख़िलाफ़’ सम्पादकीय लिखें तो आप सोच रहे होंगे कि आख़िर क्या मामला है। चलिये आपकी जिज्ञासा को शांत किये देते हैं। दरअसल अमेरिका में देश के 100 अख़बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ एकजुट हो गए हैं। गुरुवार यानि 16 अगस्त तारीख को ये सभी अख़बार एक साथ डोनाल्ड ट्रम्प की ‘आलोचना’ में सम्पादकीय छापने वाले हैँ।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मुहिम की शुरूआत अमेरिकी अख़बार ‘बॉस्टन ग्लोब’ ने शुरू की है। बॉस्टन ग्लोब अख़बार को लगता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का रवैया ‘मीडिया विरोधी’ है। ट्रम्प के इस कथित मीडिया विरोधी रवैया का विरोध करने के लिए बॉस्टन ग्लोब ने अमेरिका के तमाम मीडिया घरानों से अपने एडिटोरियल स्टाफ के सहारे संदेश दिया है कि सभी मिलकर 16 अगस्त को अपने सम्पादकीय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ संदेश दें कि उनका मीडिया विरोधी रवैया सही नहीं है।
अख़बार ने अपनी अपील में कहा है, “चाहे जिसकी जैसी भी विचारधारा हो, सब साथ मिलकर पत्रकारिता के पक्ष में एक ज़ोरदार बयान दे सकते हैं। ये बयान इसलिए ज़रूरी है क्योंकि सरकार के सामने लोगों का पक्ष रखने के लिए पत्रकारिता बहुत ज़रूरी है।“ मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, क़रीब 100 मीडिया घरानों ने इस कैम्पेन को लेकर अपनी सहमति दे दी है।
जानकारी के मुताबिक, कैम्पेन में शामिल सभी मीडिया हाउस अपना सम्पादकीय 16 अगस्त यानि गुरुवार के दिन ‘एक साथ’ अपनी भाषा और अपने अंदाज़ में छापेंगे। 16 अगस्त को छपने वाले इन सभी 100 अख़बारों के सम्पादकीय का विषय एक ही होगा, ”देश की सरकार से मीडिया को ख़तरा”
अपनी अपील में बोस्टन ग्लोब अख़बार ने कहा है, “हमारे शब्द अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारे विचारों से साफ़ हो जाएगा कि ट्रम्प मीडिया पर जैसे हमले करते हैं उससे लोकतंत्र को कितना और कैसा ख़तरा है।“
एक साथ सम्पादकीय लिखने के कैम्पेन को अमेरिकन सोसाइटी और न्यूज़ एडिटर्स जैसी संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है। जैसा कि कहा जाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को जो अख़बार, टीवी या रिपोर्ट पसंद नहीं आती वे उनके ख़िलाफ़ जमकर लिखते, बोलते और ट्वीट करते हैं। हर इस तरह की रिपोर्ट के ख़िलाफ़ वो 'फेक न्यूज़' जैसे शब्द का प्रयोग करते हैं।
'फेक न्यूज़' जैसे शब्द का प्रयोग कर ट्रम्प अपने और अपनी सरकार के ख़िलाफ़ की गई किसी भी रिपोर्ट को ख़ारिज कर देते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रम्प काफ़ी समय से प्रेस को लोगों का ‘दुश्मन’ बताते आए हैं। उनके इस तरह के बयानों के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) भी उनकी आलोचना कर चुका है। इतना ही नहीं UNHRC ने तो इसे ‘हिंसा’ तक करार दिया है।
अमेरिकी मीडिया का आरोप है कि राष्ट्रपति के ऐसे ‘गैर-ज़िम्मेदाराना’ रवैये और बयानों के कारण रिपोर्टरों के लिए उनकी रैलियों को कवर करना मुश्किल हो गया है। आरोप है कि ट्रम्प के समर्थक पत्रकारों से ‘बदसलूकी’ करते हैं।
AUG 14 (WTN) – जब एक साथ सौ अख़बार दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान के ‘ख़िलाफ़’ सम्पादकीय लिखें तो आप सोच रहे होंगे कि आख़िर क्या मामला है। चलिये आपकी जिज्ञासा को शांत किये देते हैं। दरअसल अमेरिका में देश के 100 अख़बार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ एकजुट हो गए हैं। गुरुवार यानि 16 अगस्त तारीख को ये सभी अख़बार एक साथ डोनाल्ड ट्रम्प की ‘आलोचना’ में सम्पादकीय छापने वाले हैँ।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मुहिम की शुरूआत अमेरिकी अख़बार ‘बॉस्टन ग्लोब’ ने शुरू की है। बॉस्टन ग्लोब अख़बार को लगता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का रवैया ‘मीडिया विरोधी’ है। ट्रम्प के इस कथित मीडिया विरोधी रवैया का विरोध करने के लिए बॉस्टन ग्लोब ने अमेरिका के तमाम मीडिया घरानों से अपने एडिटोरियल स्टाफ के सहारे संदेश दिया है कि सभी मिलकर 16 अगस्त को अपने सम्पादकीय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ संदेश दें कि उनका मीडिया विरोधी रवैया सही नहीं है।
अख़बार ने अपनी अपील में कहा है, “चाहे जिसकी जैसी भी विचारधारा हो, सब साथ मिलकर पत्रकारिता के पक्ष में एक ज़ोरदार बयान दे सकते हैं। ये बयान इसलिए ज़रूरी है क्योंकि सरकार के सामने लोगों का पक्ष रखने के लिए पत्रकारिता बहुत ज़रूरी है।“ मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, क़रीब 100 मीडिया घरानों ने इस कैम्पेन को लेकर अपनी सहमति दे दी है।
जानकारी के मुताबिक, कैम्पेन में शामिल सभी मीडिया हाउस अपना सम्पादकीय 16 अगस्त यानि गुरुवार के दिन ‘एक साथ’ अपनी भाषा और अपने अंदाज़ में छापेंगे। 16 अगस्त को छपने वाले इन सभी 100 अख़बारों के सम्पादकीय का विषय एक ही होगा, ”देश की सरकार से मीडिया को ख़तरा”
अपनी अपील में बोस्टन ग्लोब अख़बार ने कहा है, “हमारे शब्द अलग हो सकते हैं, लेकिन हमारे विचारों से साफ़ हो जाएगा कि ट्रम्प मीडिया पर जैसे हमले करते हैं उससे लोकतंत्र को कितना और कैसा ख़तरा है।“
एक साथ सम्पादकीय लिखने के कैम्पेन को अमेरिकन सोसाइटी और न्यूज़ एडिटर्स जैसी संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है। जैसा कि कहा जाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को जो अख़बार, टीवी या रिपोर्ट पसंद नहीं आती वे उनके ख़िलाफ़ जमकर लिखते, बोलते और ट्वीट करते हैं। हर इस तरह की रिपोर्ट के ख़िलाफ़ वो 'फेक न्यूज़' जैसे शब्द का प्रयोग करते हैं।
'फेक न्यूज़' जैसे शब्द का प्रयोग कर ट्रम्प अपने और अपनी सरकार के ख़िलाफ़ की गई किसी भी रिपोर्ट को ख़ारिज कर देते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रम्प काफ़ी समय से प्रेस को लोगों का ‘दुश्मन’ बताते आए हैं। उनके इस तरह के बयानों के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) भी उनकी आलोचना कर चुका है। इतना ही नहीं UNHRC ने तो इसे ‘हिंसा’ तक करार दिया है।
अमेरिकी मीडिया का आरोप है कि राष्ट्रपति के ऐसे ‘गैर-ज़िम्मेदाराना’ रवैये और बयानों के कारण रिपोर्टरों के लिए उनकी रैलियों को कवर करना मुश्किल हो गया है। आरोप है कि ट्रम्प के समर्थक पत्रकारों से ‘बदसलूकी’ करते हैं।