एक दिन नष्ट हो जाएगी हमारी आकाशगंगा और पृथ्वी!
Friday - August 17, 2018 1:00 pm ,
Category : WTN HINDI
जानिए हमारी आकाशगंगा के बारे में विस्तार से
AUG 17 (WTN) – आपने आकाशगंगा के बारे में तो अधिकतर सुना ही होगा। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आकाशगंगा आख़िर है क्या? इनसे हमारी पृथ्वी का क्या सम्बन्ध है? यदि आप नहीं जानते हैं, तो हम आपको सरल शब्दों में बताते हैं कि आख़िर क्या है आकाशगंगा?
जैसा कि आप जानते ही होंगे कि हम जिस ग्रह पर रहते है उसका नाम पृथ्वी है। पृथ्वी हमारे सौरमण्डल के बाकी ग्रहों की तरह ही एक ग्रह है। इसी तरह हमारा सौरमण्डल, आकाशगंगा का बस एक छोटा सा हिस्सा है। हमारी आकाशगंगा का नाम मन्दाकिनी या मिल्की वे है।
दरअसल आकाशगंगा बहुत सारी गैसों, धूल और अरबों ग्रहों के सौरमण्डलों का संयुक्त रूप से बना एक आकार है। आपको सरल शब्दों में बताएं तो बहुत सारे ग्रह मिलकर एक सौरमण्डल का निर्माण करते हैं। और ऐसे ही करोडों से भी ज्यादा सौरमण्डल मिलकर बनाते है एक आकाशगंगा।
आकाशगंगा एक विशालकाय रूप होता है जिसमे सौरमण्डल के साथ-साथ धूल के कणों, बहुत सारी गैसों का भी संयोजन रहता है। आकाशगंगा गुरुत्वाकर्षण बल से पूरी तरह से जुड़ी हुई है। हमारी आकाशगंगा के बिलकुल बीच में एक बहुत ही भारी ब्लैक होल भी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिस तरह से करोड़ों अरबों ग्रहों से बनी आकाशगंगा में हम सभी रहते हैं। इस तरह की बहुत सारी आकाशगंगायें मौजूद हैं। इनकी संख्या इतनी है कि इंसान इन्हें गिन भी नहीं सकता है।
कुछ आकाशगंगा का आकार कुण्डली की तरह होता है। हम जिस आकाशगंगा में रहते हैं उसका भी आकर कुण्डली के आकार का है। कुछ आकाशगंगायें अण्डाकार, तो कुछ दीर्घ वृत्ताकार आकार की होती हैं। कई आकाशगंगायें अटपटे आकार की भी होती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, कभी-कभी अलग-अलग आकाशगंगायें एक दूसरे के काफ़ी क़रीब भी आ जाती हैं। तो कभी-कभी ये आपस में टकरा भी जाती हैं। ऐसा होने से जिस आकाशगंगा का गुरुत्वाकर्षण पर बल कम रहता है उस आकाशगंगा में मौजूद सभी ग्रहों का विनाश हो जाता है।
किसी भी आकाशगंगा के टूटते ही उसमे मौजूद गैस, ग्रह सब अलग-अलग होकर नष्ट हो जाते हैं। हमारी पृथ्वी जिस आकाशगंगा में मौजूद है वो आकाशगंगा भी किसी ना किसी दिन किसी दूसरी आकाशगंगा से टकराकर नष्ट हो जाएगी।
हमारी आकाश गंगा के पास में मौजूद सबसे नजदीक आकाशगंगा का नाम, “Andromeda” है, जिससे पृथ्वी एक दिन टकराएगी और आकाशगंगा Andromeda और हमारी आकाशगंगा दोनों एक साथ नष्ट हो जाएंगी।
AUG 17 (WTN) – आपने आकाशगंगा के बारे में तो अधिकतर सुना ही होगा। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आकाशगंगा आख़िर है क्या? इनसे हमारी पृथ्वी का क्या सम्बन्ध है? यदि आप नहीं जानते हैं, तो हम आपको सरल शब्दों में बताते हैं कि आख़िर क्या है आकाशगंगा?
जैसा कि आप जानते ही होंगे कि हम जिस ग्रह पर रहते है उसका नाम पृथ्वी है। पृथ्वी हमारे सौरमण्डल के बाकी ग्रहों की तरह ही एक ग्रह है। इसी तरह हमारा सौरमण्डल, आकाशगंगा का बस एक छोटा सा हिस्सा है। हमारी आकाशगंगा का नाम मन्दाकिनी या मिल्की वे है।
दरअसल आकाशगंगा बहुत सारी गैसों, धूल और अरबों ग्रहों के सौरमण्डलों का संयुक्त रूप से बना एक आकार है। आपको सरल शब्दों में बताएं तो बहुत सारे ग्रह मिलकर एक सौरमण्डल का निर्माण करते हैं। और ऐसे ही करोडों से भी ज्यादा सौरमण्डल मिलकर बनाते है एक आकाशगंगा।
आकाशगंगा एक विशालकाय रूप होता है जिसमे सौरमण्डल के साथ-साथ धूल के कणों, बहुत सारी गैसों का भी संयोजन रहता है। आकाशगंगा गुरुत्वाकर्षण बल से पूरी तरह से जुड़ी हुई है। हमारी आकाशगंगा के बिलकुल बीच में एक बहुत ही भारी ब्लैक होल भी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिस तरह से करोड़ों अरबों ग्रहों से बनी आकाशगंगा में हम सभी रहते हैं। इस तरह की बहुत सारी आकाशगंगायें मौजूद हैं। इनकी संख्या इतनी है कि इंसान इन्हें गिन भी नहीं सकता है।
कुछ आकाशगंगा का आकार कुण्डली की तरह होता है। हम जिस आकाशगंगा में रहते हैं उसका भी आकर कुण्डली के आकार का है। कुछ आकाशगंगायें अण्डाकार, तो कुछ दीर्घ वृत्ताकार आकार की होती हैं। कई आकाशगंगायें अटपटे आकार की भी होती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, कभी-कभी अलग-अलग आकाशगंगायें एक दूसरे के काफ़ी क़रीब भी आ जाती हैं। तो कभी-कभी ये आपस में टकरा भी जाती हैं। ऐसा होने से जिस आकाशगंगा का गुरुत्वाकर्षण पर बल कम रहता है उस आकाशगंगा में मौजूद सभी ग्रहों का विनाश हो जाता है।
किसी भी आकाशगंगा के टूटते ही उसमे मौजूद गैस, ग्रह सब अलग-अलग होकर नष्ट हो जाते हैं। हमारी पृथ्वी जिस आकाशगंगा में मौजूद है वो आकाशगंगा भी किसी ना किसी दिन किसी दूसरी आकाशगंगा से टकराकर नष्ट हो जाएगी।
हमारी आकाश गंगा के पास में मौजूद सबसे नजदीक आकाशगंगा का नाम, “Andromeda” है, जिससे पृथ्वी एक दिन टकराएगी और आकाशगंगा Andromeda और हमारी आकाशगंगा दोनों एक साथ नष्ट हो जाएंगी।