जब अटलजी के भाषण के बाद मनमोहन सिंह ने कर ली थी इस्तीफ़े की ‘तैयारी’!
Thursday - August 16, 2018 5:12 pm ,
Category : WTN HINDI
काफ़ी क़रीबी रहे हैं अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह
AUG 16 (WTN) – पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाजुक बनी हुई है। वाजपेयी का हालचाल जानने के लिए एम्स में नेताओं का आना जाना लगा हुआ है। देशभर में उनके स्वस्थ्य होने के लिए दुआएं की जा रही हैं। आइये आपको बताते हैं अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक करियर से जुड़ा एक यादगार किस्सा।
बात तब की है जब केन्द्र में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार थी। इस सरकार में डॉ मनमोहन सिंह वित्तमंत्री थे। आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रहे देश में उस समय वित्त मंत्री मनमोहन सिंह देश में आर्थिक उदारीकरण से जुड़े फैसले ले रहे थे। इसी दौरान जब मनमोहन सिंह ने लोकसभा में एक बार बजट पेश किया तो उस बजट में आर्थिक उदारीकरण का पूरा समावेश था।
उस समय अटल बिहारी वाजपेयी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। वित्तमंत्री के रूप में जैसे ही मनमोहन सिंह ने अपना बजट भाषण सम्पन्न किया तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होने की हैसियत से अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना भाषण दिया।
अपने भाषण में वाजपेयी ने मनमोहन सिंह की ओर से पेश किए गए बजट की अपने अंदाज में जमकर आलोचना की। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक अटल बिहारी वाजपेयी की आलोचना से वित्तमंत्री मनमोहन सिंह काफ़ी आहत हो गए थे। जानकारी के मुताबिक मनमोहन सिंह तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव को इस्तीफ़ा देने तक के बारे में विचार कर चुके थे।
जब इस बारे में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को पता चला कि मनमोहन सिंह इस्तीफ़ा देने का विचार कर रहे हैं तो उन्होंने फोन कर अटल बिहारी वाजपेयी को पूरी बात बताई। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने मनमोहन सिंह से मुलाकात की और उन्हें समझाया कि उनकी आलोचना राजनीतिक है। संसद में उन्होंने राजनीतिक भाषण दिया था। अटलजी के समझाने के बाद मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री पद छोड़ने का फैसला वापस ले लिया था।
अटलजी के इस बड़प्पन से मनमोहन सिंह काफी प्रभावित हुए, और उसके बाद वो अटल बिहारी वाजपेयी के काफी क़रीबी मित्र बन गए। अटल बिहारी वाजपेयी की जब भी तबीयत खराब रही उनसे नियमित मिलने वालों में मनमोहन सिंह भी शामिल हैं। मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी की भाषण कला से काफी प्रभावित रहे हैं। उन दोनों के बीच वैचारिक मतभेद रहे हों लेकिन दोनों के बीच हमेशा से काफ़ी नज़दीकी रही है।
AUG 16 (WTN) – पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाजुक बनी हुई है। वाजपेयी का हालचाल जानने के लिए एम्स में नेताओं का आना जाना लगा हुआ है। देशभर में उनके स्वस्थ्य होने के लिए दुआएं की जा रही हैं। आइये आपको बताते हैं अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक करियर से जुड़ा एक यादगार किस्सा।
बात तब की है जब केन्द्र में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार थी। इस सरकार में डॉ मनमोहन सिंह वित्तमंत्री थे। आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रहे देश में उस समय वित्त मंत्री मनमोहन सिंह देश में आर्थिक उदारीकरण से जुड़े फैसले ले रहे थे। इसी दौरान जब मनमोहन सिंह ने लोकसभा में एक बार बजट पेश किया तो उस बजट में आर्थिक उदारीकरण का पूरा समावेश था।
उस समय अटल बिहारी वाजपेयी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। वित्तमंत्री के रूप में जैसे ही मनमोहन सिंह ने अपना बजट भाषण सम्पन्न किया तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होने की हैसियत से अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना भाषण दिया।
अपने भाषण में वाजपेयी ने मनमोहन सिंह की ओर से पेश किए गए बजट की अपने अंदाज में जमकर आलोचना की। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक अटल बिहारी वाजपेयी की आलोचना से वित्तमंत्री मनमोहन सिंह काफ़ी आहत हो गए थे। जानकारी के मुताबिक मनमोहन सिंह तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव को इस्तीफ़ा देने तक के बारे में विचार कर चुके थे।
जब इस बारे में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को पता चला कि मनमोहन सिंह इस्तीफ़ा देने का विचार कर रहे हैं तो उन्होंने फोन कर अटल बिहारी वाजपेयी को पूरी बात बताई। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने मनमोहन सिंह से मुलाकात की और उन्हें समझाया कि उनकी आलोचना राजनीतिक है। संसद में उन्होंने राजनीतिक भाषण दिया था। अटलजी के समझाने के बाद मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री पद छोड़ने का फैसला वापस ले लिया था।
अटलजी के इस बड़प्पन से मनमोहन सिंह काफी प्रभावित हुए, और उसके बाद वो अटल बिहारी वाजपेयी के काफी क़रीबी मित्र बन गए। अटल बिहारी वाजपेयी की जब भी तबीयत खराब रही उनसे नियमित मिलने वालों में मनमोहन सिंह भी शामिल हैं। मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी की भाषण कला से काफी प्रभावित रहे हैं। उन दोनों के बीच वैचारिक मतभेद रहे हों लेकिन दोनों के बीच हमेशा से काफ़ी नज़दीकी रही है।