जल्द सामने आएगा रुपये की गिरावट का नकारात्मक असर
Sunday - August 19, 2018 2:26 pm ,
Category : WTN HINDI
महंगे हो सकते हैं मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट
AUG 19 (WTN) – अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है। भारतीय रुपये ने पिछले साल अमेरिकी डॉलर की तुलना में 5.96 प्रतिशत की मज़बूती दर्ज की थी। लेकिन साल 2018 के शुरुआत से ही रुपया कमज़ोर होता चला गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल अभी तक रुपया क़रीब 10 प्रतिशत टूट चुका है। वहीं इस महीने की बात करें तो अगस्त के महीने में रुपया क़रीब 2.50 प्रतिशट टूट चुका है।
रुपये की विनिमय दर में गिरावट के चलते मोबाइल फोन निर्माता कम्पनियां और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स प्रोडक्ट बनाने वाली कम्पनियों की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण कम्पनियों में चिंता फैली हुई है। यदि रुपये में गिरावट जारी रही, तो आने वाले कुछ दिनों में या त्यौहार के समय ये कम्पनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं।
इन कम्पनियों के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है। अगर ये कम्पनियां विदेश से सामान आयात करती हैं तो इन्हें डॉलर के मुकाबले ज़्यादा रुपये देने होते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विदेशी व्यापार में कोई भी सामान डॉलर में ही खरीदा-बेचा जाता है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, डॉलर आने वाले दिनों में और भी मजबूत होगा। जिससे कारण मोबाइल फोन की लागत में वृद्धि होगी और हैण्डसेट के दाम बढ़ेंगे। वहीं कच्चे माल की लागत बढ़ने से भारतीय मोबाइल बाजार पहले से ही दबाव में बताया जा रहा है। मोबाइल कम्पनियों का कहना है कि वे बहुत कम मार्जिन में व्यापार कर रहे हैं।
देश की इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद बनाने वाली बड़ी कम्पनियों का कहना है कि वे रुपये और डॉलर पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। क्योंकि रुपया डॉलर के मुकाबले 70.32 रुपए प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निम्नतम स्तर पर पहुंच गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रुपये में गिरावट से आयात बिल बढ़ा है। कुछ दिनों पहले ही कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पनियों ने रुपए में गिरावट के कारण 32 इंच और इससे बड़े टीवी सेट के दाम बढ़ाने की घोषणा की थी।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश का व्यापार घाटा पांच साल के सबसे उच्चस्तर यानि क़रीब 18 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इधर, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि मुद्रा बाजार में किसी भी तरह के अनावश्यक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिये देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भण्डार है
कहा जा रहा है कि विश्वस्तर पर तुर्की के आर्थिक संकट और उसकी मुद्रा लीरा में भारी गिरावट के कारण रुपये में गिरावट जारी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आखिरकार तुर्की संकट क्या है, जिसके कारण रुपया डॉलर के मुकाबले गिरता जा रहा है।
दरअसल, तुर्की के मेटल इम्पोर्ट पर ड्यूटी को अमेरिका ने दोगुना कर दिया था। जिसके बाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाजार में हड़कम्प मचा हुआ है। अमेरिका के इस कदम से तुर्की की करेंसी लीरा में 40 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है। इसका नकारात्मक प्रभाव भारतीय मुद्रा रुपया और यूरो पर भी दिखने को मिल रहा है।
AUG 19 (WTN) – अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है। भारतीय रुपये ने पिछले साल अमेरिकी डॉलर की तुलना में 5.96 प्रतिशत की मज़बूती दर्ज की थी। लेकिन साल 2018 के शुरुआत से ही रुपया कमज़ोर होता चला गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस साल अभी तक रुपया क़रीब 10 प्रतिशत टूट चुका है। वहीं इस महीने की बात करें तो अगस्त के महीने में रुपया क़रीब 2.50 प्रतिशट टूट चुका है।
रुपये की विनिमय दर में गिरावट के चलते मोबाइल फोन निर्माता कम्पनियां और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स प्रोडक्ट बनाने वाली कम्पनियों की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण कम्पनियों में चिंता फैली हुई है। यदि रुपये में गिरावट जारी रही, तो आने वाले कुछ दिनों में या त्यौहार के समय ये कम्पनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं।
इन कम्पनियों के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है। अगर ये कम्पनियां विदेश से सामान आयात करती हैं तो इन्हें डॉलर के मुकाबले ज़्यादा रुपये देने होते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विदेशी व्यापार में कोई भी सामान डॉलर में ही खरीदा-बेचा जाता है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, डॉलर आने वाले दिनों में और भी मजबूत होगा। जिससे कारण मोबाइल फोन की लागत में वृद्धि होगी और हैण्डसेट के दाम बढ़ेंगे। वहीं कच्चे माल की लागत बढ़ने से भारतीय मोबाइल बाजार पहले से ही दबाव में बताया जा रहा है। मोबाइल कम्पनियों का कहना है कि वे बहुत कम मार्जिन में व्यापार कर रहे हैं।
देश की इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद बनाने वाली बड़ी कम्पनियों का कहना है कि वे रुपये और डॉलर पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। क्योंकि रुपया डॉलर के मुकाबले 70.32 रुपए प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निम्नतम स्तर पर पहुंच गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रुपये में गिरावट से आयात बिल बढ़ा है। कुछ दिनों पहले ही कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पनियों ने रुपए में गिरावट के कारण 32 इंच और इससे बड़े टीवी सेट के दाम बढ़ाने की घोषणा की थी।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश का व्यापार घाटा पांच साल के सबसे उच्चस्तर यानि क़रीब 18 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इधर, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि मुद्रा बाजार में किसी भी तरह के अनावश्यक उतार-चढ़ाव से निपटने के लिये देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भण्डार है
कहा जा रहा है कि विश्वस्तर पर तुर्की के आर्थिक संकट और उसकी मुद्रा लीरा में भारी गिरावट के कारण रुपये में गिरावट जारी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आखिरकार तुर्की संकट क्या है, जिसके कारण रुपया डॉलर के मुकाबले गिरता जा रहा है।
दरअसल, तुर्की के मेटल इम्पोर्ट पर ड्यूटी को अमेरिका ने दोगुना कर दिया था। जिसके बाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाजार में हड़कम्प मचा हुआ है। अमेरिका के इस कदम से तुर्की की करेंसी लीरा में 40 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है। इसका नकारात्मक प्रभाव भारतीय मुद्रा रुपया और यूरो पर भी दिखने को मिल रहा है।