देश में ‘गम्भीर’ हुई बैंकों की एनपीए की समस्या, संसद को ‘याद’ आए रघुराम राजन
Monday - August 20, 2018 1:12 pm ,
Category : WTN HINDI
संसद की आंकलन समिति ने रघुराम राजन से मांगे एनपीए की समस्या से बचाव के ‘सुझाव’
AUG 20 (WTN) – बैंकों की लगातार बढ़ती एनपीए समस्या मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। मोदी सरकार के साढ़े चार सालों में बैंकों के एनपीए ने अर्थव्यवस्था पर काफी नकारात्मक असर डाला है। ऐसे में कहा जा रहा है कि संसदीय समिति एनपीए की भयावह हो रही समस्या से निपटने के लिए आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के सुझावों का सहारा ले सकती है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, संसदीय आंकलन समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को समिति के सामने पेश होने के लिए कहा है। संसदीय समिति देश में गहराते एनपीए संकट की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक मुरली मनोहर जोशी ने 7 अगस्त को रघुराम राजन को पत्र लिखा है और उम्मीद जतायी है कि राजन जल्द ही समिति के सामने पेश होंगे और अपने सुझाव देंगे। कहा यह भी जा रह है कि आंकलन समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने रघुराम राजन से यह भी कहा है कि यदि व्यस्तता के कारण वे जल्द समिति के सामने पेश नहीं हो सकते हैं तो वे इस मामले में अपना पक्ष लिखित तौर पर भी समिति को भेज सकते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गर्वनर के रूप में रघुराम राजन का रिज़र्व बैंक का कार्यकाल सितम्बर 2016 में पूरा हुआ था। लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने की पहल नहीं की थी, जिसकी काफी आलोचना भी हुई थी। रघुराम राजन ने रिज़र्व बैंक में गवर्नर में अपने कार्यकाल के ख़त्म होने के बाद अमेरिकी में जाकर यूनीवर्सिटी में रिसर्च को प्राथमिकता दी थी।
रघुराम राजन के बाद उर्जित पटेल को आरबीआई का गवर्नर बनाया गया था। लेकिन कहा जा रहा है कि एनपीए की समस्या से निपटने में पटेल सफल नहीं हो सके हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक संसद की आंकलन समिति को रघुराम राजन की क्षमता पर पूरा भरोसा है कि वे एनपीए की समस्या से निपटने के लिए परिणात्मक सुझाव देंगे। कहा जा रहा है कि समिति, रघुराम राजन से विचार विमर्श करके एनपीए की समस्या के निराकरण के लिए सही दिशा में काम करने की नीति बनाना चाहती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कुछ दिनों पहले केन्द्र सरकार के प्रमुख आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने समिति के सामने एनपीए पर अपना पक्ष रखा था। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक सुब्रमण्यम ने समिति को बताया था कि एनपीए की समस्या को सही तरीके से पहचानने का श्रेय आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को जाता है, और इस समस्या को उनसे बेहतर कोई नहीं जानता है कि आखिर देश में एनपीए की समस्या कैसे इतनी गम्भीर हो गई है।
एनपीए की गम्भीर समस्या से निपटने के उपाय जानने के लिए यदि मोदी सरकार को संसद की आंकलन समिति के सुझावों के आधार पर, आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की सलाह का सहारा लेना पड़ेगा, तो यह मोदी सरकार के उस फैसले पर सवाल खड़े करता है जब सरकार ने रघुराम राजन को दूसरा कार्यकाल देने में कोई रुचि नहीं दिखाई थी, जबकि कहा जाता है कि राजन एनपीए की समस्या से निपटने के विशेषज्ञ हैं।
सूत्रों के मुताबिक कहा जाता है कि रघुराम राजन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी के फैसले पर सहमति नहीं दी थी, जिसके बाद मोदी सरकार ने राजन को दूसरी बार आरबीआई का गर्वनर बनने में कोई भी दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। लेकिन अब जबकि देश में एनपीए की समस्या गम्भीर होती जा रही है, ऐसे में यदि मोदी सरकार संसदीय समिति के सुझाव के आधार पर रघुराम राजन की सलाह पर अमल करती है, तो ऐसे में सवाल उठेंगे कि यदि पहले ही रघुराम राजन की योग्यता को मोदी सरकार परख लेती, और उन्हें एक बार फिर से आरबीआई का गवर्नर बनाती तो शायद आज एनपीए की समस्या इतनी गम्भीर नहीं होती।
AUG 20 (WTN) – बैंकों की लगातार बढ़ती एनपीए समस्या मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। मोदी सरकार के साढ़े चार सालों में बैंकों के एनपीए ने अर्थव्यवस्था पर काफी नकारात्मक असर डाला है। ऐसे में कहा जा रहा है कि संसदीय समिति एनपीए की भयावह हो रही समस्या से निपटने के लिए आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के सुझावों का सहारा ले सकती है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, संसदीय आंकलन समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को समिति के सामने पेश होने के लिए कहा है। संसदीय समिति देश में गहराते एनपीए संकट की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक मुरली मनोहर जोशी ने 7 अगस्त को रघुराम राजन को पत्र लिखा है और उम्मीद जतायी है कि राजन जल्द ही समिति के सामने पेश होंगे और अपने सुझाव देंगे। कहा यह भी जा रह है कि आंकलन समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने रघुराम राजन से यह भी कहा है कि यदि व्यस्तता के कारण वे जल्द समिति के सामने पेश नहीं हो सकते हैं तो वे इस मामले में अपना पक्ष लिखित तौर पर भी समिति को भेज सकते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गर्वनर के रूप में रघुराम राजन का रिज़र्व बैंक का कार्यकाल सितम्बर 2016 में पूरा हुआ था। लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने की पहल नहीं की थी, जिसकी काफी आलोचना भी हुई थी। रघुराम राजन ने रिज़र्व बैंक में गवर्नर में अपने कार्यकाल के ख़त्म होने के बाद अमेरिकी में जाकर यूनीवर्सिटी में रिसर्च को प्राथमिकता दी थी।
रघुराम राजन के बाद उर्जित पटेल को आरबीआई का गवर्नर बनाया गया था। लेकिन कहा जा रहा है कि एनपीए की समस्या से निपटने में पटेल सफल नहीं हो सके हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक संसद की आंकलन समिति को रघुराम राजन की क्षमता पर पूरा भरोसा है कि वे एनपीए की समस्या से निपटने के लिए परिणात्मक सुझाव देंगे। कहा जा रहा है कि समिति, रघुराम राजन से विचार विमर्श करके एनपीए की समस्या के निराकरण के लिए सही दिशा में काम करने की नीति बनाना चाहती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कुछ दिनों पहले केन्द्र सरकार के प्रमुख आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने समिति के सामने एनपीए पर अपना पक्ष रखा था। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक सुब्रमण्यम ने समिति को बताया था कि एनपीए की समस्या को सही तरीके से पहचानने का श्रेय आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को जाता है, और इस समस्या को उनसे बेहतर कोई नहीं जानता है कि आखिर देश में एनपीए की समस्या कैसे इतनी गम्भीर हो गई है।
एनपीए की गम्भीर समस्या से निपटने के उपाय जानने के लिए यदि मोदी सरकार को संसद की आंकलन समिति के सुझावों के आधार पर, आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की सलाह का सहारा लेना पड़ेगा, तो यह मोदी सरकार के उस फैसले पर सवाल खड़े करता है जब सरकार ने रघुराम राजन को दूसरा कार्यकाल देने में कोई रुचि नहीं दिखाई थी, जबकि कहा जाता है कि राजन एनपीए की समस्या से निपटने के विशेषज्ञ हैं।
सूत्रों के मुताबिक कहा जाता है कि रघुराम राजन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी के फैसले पर सहमति नहीं दी थी, जिसके बाद मोदी सरकार ने राजन को दूसरी बार आरबीआई का गर्वनर बनने में कोई भी दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। लेकिन अब जबकि देश में एनपीए की समस्या गम्भीर होती जा रही है, ऐसे में यदि मोदी सरकार संसदीय समिति के सुझाव के आधार पर रघुराम राजन की सलाह पर अमल करती है, तो ऐसे में सवाल उठेंगे कि यदि पहले ही रघुराम राजन की योग्यता को मोदी सरकार परख लेती, और उन्हें एक बार फिर से आरबीआई का गवर्नर बनाती तो शायद आज एनपीए की समस्या इतनी गम्भीर नहीं होती।