जानिए कि बिना माला के कैसे करें मंत्र जाप
Monday - August 20, 2018 2:58 pm ,
Category : WTN HINDI
आप भी जानिए करमाला के द्वारा मंत्र जाप का तरीका
AUG 20 (WTN) – ईश्वर की उपासना से संकट दूर करने में मंत्रों के जाप को काफी लाभदायक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार लाभ तभी सम्भव है जब मंत्रों का जाप नियम से किया जाए। मंत्रों के जाप के दौरान मंत्र संख्या काफी महत्वपूर्ण है। शास्त्रों में कहा गया है कि बिना गिने मंत्रों का जाप आसुरी जाप कहलाता है जो कि शुभ फल नहीं देता है।
यही कारण है कि निश्चित संख्या में मंत्रों का जाप करने के लिए माला का उपयोग किया जाता है। लेकिन यदि आपके पास मंत्र जाप करने वाली माला किसी समय उपलब्ध नहीं है, तो आप इस दौरान ‘करमाला’ तरीके से मंत्र जाप कर सकते हैं। यदि आप नहीं जानते हैं कि करमाला तरीका क्या है ? तो हम आपको बताते हैं।
दाएं हाथ की अनामिका उंगुली यानी मिडिल फिंगर के बीच के पोरुओं से शुरू कर कनिष्ठा यानी लिटिल फिंगर के पोरुओं से होते हुए तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर के मूल तक के 10 पोरुओं को गिनकर आप मंत्र जाप कर सकते हैं।
अनामिका यानी मिडिल फिंगर के बीच के शेष 2 पोरुओं को माला का सुमेरू मानकर पार न करें।
फिर दाएं हाथ पर दस मंत्र की गिनती कर बाएं हाथ की अनामिका यानी मिडिल फिंगर के बीच के पोरुओं से दहाई की एक संख्या गिनें।
इसके बाद दाएं हाथ के साथ बाएं हाथ पर दहाई के दस बार मंत्र गिनने पर 100 मंत्र संख्या पूरी हो जाती है।
आखिरी आठ मंत्र जप के लिए फिर से दाएं हाथ पर ही उसी तरह अनामिका यानी मिडिल फिंगर के मध्य भाग से गिनती शुरू कर शेष 8 मंत्रों का जानप कर पूरे 108 मंत्र यानी एक माला पूरी की जा सकती है।
AUG 20 (WTN) – ईश्वर की उपासना से संकट दूर करने में मंत्रों के जाप को काफी लाभदायक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार लाभ तभी सम्भव है जब मंत्रों का जाप नियम से किया जाए। मंत्रों के जाप के दौरान मंत्र संख्या काफी महत्वपूर्ण है। शास्त्रों में कहा गया है कि बिना गिने मंत्रों का जाप आसुरी जाप कहलाता है जो कि शुभ फल नहीं देता है।
यही कारण है कि निश्चित संख्या में मंत्रों का जाप करने के लिए माला का उपयोग किया जाता है। लेकिन यदि आपके पास मंत्र जाप करने वाली माला किसी समय उपलब्ध नहीं है, तो आप इस दौरान ‘करमाला’ तरीके से मंत्र जाप कर सकते हैं। यदि आप नहीं जानते हैं कि करमाला तरीका क्या है ? तो हम आपको बताते हैं।
दाएं हाथ की अनामिका उंगुली यानी मिडिल फिंगर के बीच के पोरुओं से शुरू कर कनिष्ठा यानी लिटिल फिंगर के पोरुओं से होते हुए तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर के मूल तक के 10 पोरुओं को गिनकर आप मंत्र जाप कर सकते हैं।
अनामिका यानी मिडिल फिंगर के बीच के शेष 2 पोरुओं को माला का सुमेरू मानकर पार न करें।
फिर दाएं हाथ पर दस मंत्र की गिनती कर बाएं हाथ की अनामिका यानी मिडिल फिंगर के बीच के पोरुओं से दहाई की एक संख्या गिनें।
इसके बाद दाएं हाथ के साथ बाएं हाथ पर दहाई के दस बार मंत्र गिनने पर 100 मंत्र संख्या पूरी हो जाती है।
आखिरी आठ मंत्र जप के लिए फिर से दाएं हाथ पर ही उसी तरह अनामिका यानी मिडिल फिंगर के मध्य भाग से गिनती शुरू कर शेष 8 मंत्रों का जानप कर पूरे 108 मंत्र यानी एक माला पूरी की जा सकती है।