जानिए ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग में अंतर
Thursday - August 23, 2018 3:32 pm ,
Category : WTN HINDI
स्वयम्भू होते हैं ज्योतिर्लिंग, जबकि मानव निर्मित होते हैं शिवलिंग
AUG 23 (WTN) – आपने ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग के विषय में तो अवश्य ही सुना ही होगा। लेकिन क्या आप ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग के बीच के अंतर को जानते हैं? यदि आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं कि आखिर इन दोनों में क्या अंतर होता है।
शिवपुराण की एक कथा के अनुसार, एक बार सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा और जगतपालक विष्णु में विवाद हुआ कि उन दोनों में श्रेष्ठ कौन है। यह विवाद बढ़ता ही चला गया। जब इस विवाद का कोई समाधान निकलता नहीं दिखाई दे रहा था तब ब्रह्मा और विष्णु दोनों का सर्वश्रेष्ठ होने ‘भ्रम’ दूर करने के लिए शिव एक महान ज्योति स्तम्भ के रूप में प्रकट हुए।
विशाल ज्योति स्तम्भ को देखकर ब्रह्मा और विष्णु दोनों ही आश्चर्यचकित हो गए। दोनों ही इस ज्योति स्तम्भ की थाह नहीं पा सके। इसे ही हिन्दू धार्मिक मान्यताओं में ‘शिव ज्योतिर्लिंग’ या ‘ज्योतिर्लिंग’ कहा जाता है। लिंग का अर्थ है ‘प्रतीक’, यानी शिव के ज्योति रूप में प्रकट होने और सृष्टि के निर्माण का प्रतीक।
चुंकि शिव, ज्योति स्तम्भ के रूप में प्रकट हुए थे। इसलिए ज्योतिर्लिंग सदैव स्वयम्भू होते हैं। जबकि शिवलिंग मानव द्वारा स्थापित या स्वयम्भू दोनों हो सकते हैं। हिन्दू धर्म ग्रंथों में शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख मिलता है। यानि ये सभी शिव ज्योतिर्लिंग स्वयम्भू हैं। जहां-जहां ये शिव ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं, आज वहां पर भव्य शिव मंदिर बने हुए हैं। इन सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का वर्णन शिव पुराण की 'रुद्रसंहिता' में मिलता है।
शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम इस तरह से हैं। सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यम्बकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर महादेव, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर। यह 12 ज्योतिर्लिंग 12 राशियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ज्योतिष में मान्यता है कि राशि के अनुसार ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने, अभिषेक करने और उपासन करने से सभी उचित मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
AUG 23 (WTN) – आपने ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग के विषय में तो अवश्य ही सुना ही होगा। लेकिन क्या आप ज्योतिर्लिंग और शिवलिंग के बीच के अंतर को जानते हैं? यदि आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं कि आखिर इन दोनों में क्या अंतर होता है।
शिवपुराण की एक कथा के अनुसार, एक बार सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा और जगतपालक विष्णु में विवाद हुआ कि उन दोनों में श्रेष्ठ कौन है। यह विवाद बढ़ता ही चला गया। जब इस विवाद का कोई समाधान निकलता नहीं दिखाई दे रहा था तब ब्रह्मा और विष्णु दोनों का सर्वश्रेष्ठ होने ‘भ्रम’ दूर करने के लिए शिव एक महान ज्योति स्तम्भ के रूप में प्रकट हुए।
विशाल ज्योति स्तम्भ को देखकर ब्रह्मा और विष्णु दोनों ही आश्चर्यचकित हो गए। दोनों ही इस ज्योति स्तम्भ की थाह नहीं पा सके। इसे ही हिन्दू धार्मिक मान्यताओं में ‘शिव ज्योतिर्लिंग’ या ‘ज्योतिर्लिंग’ कहा जाता है। लिंग का अर्थ है ‘प्रतीक’, यानी शिव के ज्योति रूप में प्रकट होने और सृष्टि के निर्माण का प्रतीक।
चुंकि शिव, ज्योति स्तम्भ के रूप में प्रकट हुए थे। इसलिए ज्योतिर्लिंग सदैव स्वयम्भू होते हैं। जबकि शिवलिंग मानव द्वारा स्थापित या स्वयम्भू दोनों हो सकते हैं। हिन्दू धर्म ग्रंथों में शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख मिलता है। यानि ये सभी शिव ज्योतिर्लिंग स्वयम्भू हैं। जहां-जहां ये शिव ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं, आज वहां पर भव्य शिव मंदिर बने हुए हैं। इन सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का वर्णन शिव पुराण की 'रुद्रसंहिता' में मिलता है।
शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम इस तरह से हैं। सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यम्बकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर महादेव, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर। यह 12 ज्योतिर्लिंग 12 राशियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ज्योतिष में मान्यता है कि राशि के अनुसार ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने, अभिषेक करने और उपासन करने से सभी उचित मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।