मध्य प्रदेश में भाजपा के लिए ‘खतरे की घण्टी’
Friday - August 24, 2018 4:36 pm ,
Category : WTN HINDI
कांग्रेस, सपा और बसपा के ‘महागठबंधन’ से भाजपा को ‘महा खतरा’
AUG 24 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कुछ ही समय बचा है। 15 सालों से सत्ता में काबिज भाजपा प्रदेश की जनता से ‘सम्पर्क’ में जुटी हुई है। इधर कांग्रेस भी लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार के बाद इस बार जीत के लिए ‘पूरी मेहनत’ कर रही है। मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा, इन दोनों ही पार्टियों के बीच हमेशा से ही सत्ता के लिए संघर्ष रहा है। लेकिन लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस इस बार जीत के लिए मध्य प्रदेश में ‘गठबंधन की राजनीति’ तक करने के लिए तैयार है।
कांग्रेस जानती है कि यदि भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ रोक दिया जाए तो कांग्रेस को आसानी हो सकती है। बात करें यूपी की तो वहां पर गोरखपुर, फूलपुर और कैराना सीट पर हुए लोकसभा उपचुनाव में विपक्ष के ‘साझा उम्मीदवार’ के सामने भाजपा की हार हुई थी। ऐसे में कांग्रेस मध्य प्रदेश में बसपा और सपा से चुनाव पूर्व गठबंधन करने की ‘फ़िराक’ में है।
जहां तक बसपा की बात है तो कहा जा रहा है कि बसपा से समझौता हो गया है और कांग्रेस बसपा को 20 से 25 सीटें गठबंधन के तहत दे सकती है। ऐसे में भाजपा विरोधी दलित वोटों के ‘ध्रुवीकरण’ को रोकने की कोशिश तो कांग्रेस ने कर ली है। लेकिन बात करें समाजवादी पार्टी की, तो कहा जा रहा है कि कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन की स्थिति 15 दिनों में साफ हो जाएगी।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के मध्य प्रदेश अध्यक्ष गौरी सिंह यादव के अनुसार मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनके दल का किसके साथ गठबंधन होगा, यह अगले 15 दिनों में ‘साफ’ हो जाएगा। गौरी सिंह यादव के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बसपा के साथ सपा का समझौता है जो उसे मध्य प्रदेश में भी लागू किया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बार सपा पूरे जोर के साथ मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ने की तैयारी में है। चुनाव से काफी पहले ही सपा ने ‘गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी’ के साथ समझौता कर लिया है। कहा जाता है कि यदि कांग्रेस से सपा का समझौता नहीं होता है तो सपा गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी के साथ मिलकर प्रदेश की ‘सभी सीटों’ पर चुनाव लड़ेगी।
इधर, तीन सितम्बर को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मध्य प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। कहा जा रहा है कि इस दौरान अखिलेश यादव मध्य प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से ‘मुलाकात’ कर सकते हैं और विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन पर कोई ‘ठोस निर्णय’ लिया जा सकता है। यदि सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होता है, तो यह भाजपा के लिए ‘खतरे की घण्टी’ है। क्योंकि कांग्रेस, सपा, बसपा और गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी तो भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ नहीं होगा।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद कहा जा रहा है कि सामान्य और पिछड़ा वर्ग भाजपा ने ‘नाराज़’ चल रहा है। कहीं ऐसा ना हो कि इस बार विपक्षी दलों का गठबंधन और एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद ‘नाराज वर्ग’ भाजपा की लगातार जीत का रथ रोक दें। यदि समय रहते भाजपा ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश से ‘बहुत बड़ा झटका’ भाजपा को लग सकता है।
AUG 24 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए कुछ ही समय बचा है। 15 सालों से सत्ता में काबिज भाजपा प्रदेश की जनता से ‘सम्पर्क’ में जुटी हुई है। इधर कांग्रेस भी लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार के बाद इस बार जीत के लिए ‘पूरी मेहनत’ कर रही है। मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा, इन दोनों ही पार्टियों के बीच हमेशा से ही सत्ता के लिए संघर्ष रहा है। लेकिन लगातार चुनाव हार रही कांग्रेस इस बार जीत के लिए मध्य प्रदेश में ‘गठबंधन की राजनीति’ तक करने के लिए तैयार है।
कांग्रेस जानती है कि यदि भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ रोक दिया जाए तो कांग्रेस को आसानी हो सकती है। बात करें यूपी की तो वहां पर गोरखपुर, फूलपुर और कैराना सीट पर हुए लोकसभा उपचुनाव में विपक्ष के ‘साझा उम्मीदवार’ के सामने भाजपा की हार हुई थी। ऐसे में कांग्रेस मध्य प्रदेश में बसपा और सपा से चुनाव पूर्व गठबंधन करने की ‘फ़िराक’ में है।
जहां तक बसपा की बात है तो कहा जा रहा है कि बसपा से समझौता हो गया है और कांग्रेस बसपा को 20 से 25 सीटें गठबंधन के तहत दे सकती है। ऐसे में भाजपा विरोधी दलित वोटों के ‘ध्रुवीकरण’ को रोकने की कोशिश तो कांग्रेस ने कर ली है। लेकिन बात करें समाजवादी पार्टी की, तो कहा जा रहा है कि कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन की स्थिति 15 दिनों में साफ हो जाएगी।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के मध्य प्रदेश अध्यक्ष गौरी सिंह यादव के अनुसार मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनके दल का किसके साथ गठबंधन होगा, यह अगले 15 दिनों में ‘साफ’ हो जाएगा। गौरी सिंह यादव के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बसपा के साथ सपा का समझौता है जो उसे मध्य प्रदेश में भी लागू किया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बार सपा पूरे जोर के साथ मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ने की तैयारी में है। चुनाव से काफी पहले ही सपा ने ‘गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी’ के साथ समझौता कर लिया है। कहा जाता है कि यदि कांग्रेस से सपा का समझौता नहीं होता है तो सपा गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी के साथ मिलकर प्रदेश की ‘सभी सीटों’ पर चुनाव लड़ेगी।
इधर, तीन सितम्बर को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मध्य प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। कहा जा रहा है कि इस दौरान अखिलेश यादव मध्य प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से ‘मुलाकात’ कर सकते हैं और विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन पर कोई ‘ठोस निर्णय’ लिया जा सकता है। यदि सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होता है, तो यह भाजपा के लिए ‘खतरे की घण्टी’ है। क्योंकि कांग्रेस, सपा, बसपा और गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी तो भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ नहीं होगा।
एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद कहा जा रहा है कि सामान्य और पिछड़ा वर्ग भाजपा ने ‘नाराज़’ चल रहा है। कहीं ऐसा ना हो कि इस बार विपक्षी दलों का गठबंधन और एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद ‘नाराज वर्ग’ भाजपा की लगातार जीत का रथ रोक दें। यदि समय रहते भाजपा ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश से ‘बहुत बड़ा झटका’ भाजपा को लग सकता है।