जानिए कि कैसे काम करता है फ्रिज?
Tuesday - August 28, 2018 11:02 am ,
Category : WTN HINDI
जानिए कि कैसे सामान को ठण्डा रखता है रेफ्रिजरेटर
AUG 28 (WTN) – आपने फ्रिज या रेफ्रीजरेटर में रखे ठण्डे सामान को खाया और पीया तो होगा ही। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर फ्रिज कैसे काम करता है? यदि आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं कि आखिर फ्रिज कैसे काम करता है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेफ्रिजरेटर के पीछे एक थ्रॉटलिंक डिवाइस का ख़ास पुर्जा लगा होता है अब इसे केपिलरी ट्यूब के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। ठण्डे तरल पदार्थ को निर्मित करने के लिए ये थ्रोटलिंक फिनोमिना इस्तेमाल किया जाता है। ट्यूब के इनलेट में रेफ्रिजेरेंट, जो कि एक गैस का मिश्रण होता है, कुछ ज़्यादा दबाव पर द्रव के रूप में प्रवाहित किया जाता है। और जब ये द्रव ट्यूब में से गुजरता है तो द्रव के दबाव में गिरावट आने लगती है जिसके चलते द्रव का बॉयलिंग प्वाइंट कम हो जता है |
अब दूसरे फेज में रेफ्रिजरेटर के ऊपर वाले हिस्से में रेफ्रिजेरेंट पास किया जाता है ताकि यह रेफ्रिजरेटर के अंदर रखे सामान को ठण्डा रख सके। ऐसा होने पर रेफ्रिजरेंट द्रव भाप बनाने लगता है और इस वेपोरशन यानि वाष्पीकरण में फ्रिज की ऊर्जा यानि गर्मी का इस्तेमाल होता है।
जब रेफ्रिजेरेंट पूरे रेफ्रिजरेटर का चक्कर लगा चुका होता है तब उसे वापस कम्प्रेस करने की ज़रूरत होती है क्योंकि तब तक वह भाप में बदल चुका होता है और फ्रिज की गर्मी पाकर और दबाव भी बढ़ चुका होता है। तो यहां एक नई मशीन जिसे कम्प्रेसर कहा जाता है वो सामने आता है जिसका काम है दबाव कम करना।
कम्प्रेसर में जाने के बाद दबाव तो कम हो चुका होता है, लेकिन रेफ्रिजेरेंट अभी भी भाप में है तो इसे दोबारा द्रव रूप में लाने के लिए एक नए सिस्टम की ज़रूरत पड़ती है जिसे हीट एक्सचेंजर कहा जाता है। सामान्य तौर पर हीट एक्सचेंजर और कम्प्रेसर दोनों ही फ्रिज के बाहर लगे होते हैं।
भाप हीट एक्सचेंजर से रेफ्रिजेरेंट से गुजरने के बाद फिर से कम दबाव वाले द्रव में बदल जाती है जिसे फिर से ठण्डा करने के लिए फिर से थ्राटलिंक डिवाइस से गुजारा जाता है और यह प्रक्रिया कई बार दुहराई जाती है और इसी तरह से फ्रिज काम करता है।
AUG 28 (WTN) – आपने फ्रिज या रेफ्रीजरेटर में रखे ठण्डे सामान को खाया और पीया तो होगा ही। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर फ्रिज कैसे काम करता है? यदि आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं कि आखिर फ्रिज कैसे काम करता है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेफ्रिजरेटर के पीछे एक थ्रॉटलिंक डिवाइस का ख़ास पुर्जा लगा होता है अब इसे केपिलरी ट्यूब के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। ठण्डे तरल पदार्थ को निर्मित करने के लिए ये थ्रोटलिंक फिनोमिना इस्तेमाल किया जाता है। ट्यूब के इनलेट में रेफ्रिजेरेंट, जो कि एक गैस का मिश्रण होता है, कुछ ज़्यादा दबाव पर द्रव के रूप में प्रवाहित किया जाता है। और जब ये द्रव ट्यूब में से गुजरता है तो द्रव के दबाव में गिरावट आने लगती है जिसके चलते द्रव का बॉयलिंग प्वाइंट कम हो जता है |
अब दूसरे फेज में रेफ्रिजरेटर के ऊपर वाले हिस्से में रेफ्रिजेरेंट पास किया जाता है ताकि यह रेफ्रिजरेटर के अंदर रखे सामान को ठण्डा रख सके। ऐसा होने पर रेफ्रिजरेंट द्रव भाप बनाने लगता है और इस वेपोरशन यानि वाष्पीकरण में फ्रिज की ऊर्जा यानि गर्मी का इस्तेमाल होता है।
जब रेफ्रिजेरेंट पूरे रेफ्रिजरेटर का चक्कर लगा चुका होता है तब उसे वापस कम्प्रेस करने की ज़रूरत होती है क्योंकि तब तक वह भाप में बदल चुका होता है और फ्रिज की गर्मी पाकर और दबाव भी बढ़ चुका होता है। तो यहां एक नई मशीन जिसे कम्प्रेसर कहा जाता है वो सामने आता है जिसका काम है दबाव कम करना।
कम्प्रेसर में जाने के बाद दबाव तो कम हो चुका होता है, लेकिन रेफ्रिजेरेंट अभी भी भाप में है तो इसे दोबारा द्रव रूप में लाने के लिए एक नए सिस्टम की ज़रूरत पड़ती है जिसे हीट एक्सचेंजर कहा जाता है। सामान्य तौर पर हीट एक्सचेंजर और कम्प्रेसर दोनों ही फ्रिज के बाहर लगे होते हैं।
भाप हीट एक्सचेंजर से रेफ्रिजेरेंट से गुजरने के बाद फिर से कम दबाव वाले द्रव में बदल जाती है जिसे फिर से ठण्डा करने के लिए फिर से थ्राटलिंक डिवाइस से गुजारा जाता है और यह प्रक्रिया कई बार दुहराई जाती है और इसी तरह से फ्रिज काम करता है।