बिहार में फिलहाल नहीं बनेगी ‘सियासी खीर’!
Monday - August 27, 2018 3:23 pm ,
Category : WTN HINDI
उपेन्द्र कुशवाहा के ‘नये बयान’ से फिर से बदला बिहार का सियासी समीकरण
AUG 27 (WTN) – यदि लोकसभा चुनाव पहले सबसे ज़्यादा ‘सियासी उठापटक’ हो रही है तो वो हो रही है बिहार में। लोकसभा चुनाव से काफी पहले बिहार की राजनीति में रोज नये-नये समीकरण बनते और बिगड़ते दिख रहे हैं। कुछ दिनों पहले भाजपा और जेडीयू के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर ‘तनातनी’ की खबरें सामने आईं थी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक ‘उच्च स्तर’ पर चर्चा होने के बाद इस बारे में सार्वजनिक बयानबाजी नहीं हो रही है।
जेडीयू से अलग बिहार में नई ‘सियासी खीर’ बनाने की कोशिश कर रहे केन्द्रीय मंत्री और आरएलएसपी नेता उपेन्द्र कुशवाहा के बयानों से लगता है कि वे इस समय ‘दो नावों’ की सवारी करने की कोशिश कर रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने शनिवार को पटना में एक कार्यक्रम में महागठबंधन में शामिल होने के संकेत दे दिए थे। उन्होंने वहां कहा था, “यदुवंशियों (यादवों) का दूध और कुशवंशियों (कुशवाहा समाज) का चावल मिल जाए तो खीर बढ़िया होगी और इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनने से कोई रोक नहीं सकता है।“
लेकिन बिहार में ‘राजनीति का ऊंट’ किस दिन किस करवट बैठेगे कोई नहीं जानता है। शनिवार के अपने बयान से पलटते हुए अब उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा है, “ना आरजेडी से दूध ना बीजेपी से चीनी मांगा है। हमने अपनी पार्टी के लिए सभी समाज से समर्थन मांगा है। आरएलएसपी मज़बूत होगी तो एनडीए मज़बूत होगा और एनडीए मज़बूत होगा तो देश मज़बूत होगा और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री होंगे।”
उपेन्द्र कुशवाहा के महागठबंधन में जाने के ‘संकेत’ के बाद बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा था, “खीर एक अच्छा व्यंजन है।“ माना जाता है कि तेजस्वी यादव महागठबंधन में उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी को लेने में ‘काफी दिलचस्पी’ दिखा रहे हैं। बिहार में जाति की राजनीति इतनी ‘गहरी’ है कि कुशवाह समाज के वोट बैंक को महागठबंधन ‘दरकिनार’ नहीं कर सकता है।
कहा जा रहा है कि जेडीयू के एनडीए में शामिल होने के बाद 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा, आरएलएसपी और एलजेपी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है और इसी के चलते समय-समय पर उपेन्द्र कुशवाहा महागठबंधन में जाने के ‘संकेत’ देते रहते हैं। यानि कहा जा सकता है कि उन्होंने 2019 के लिए ‘हर विकल्प’ खुले रखे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। इस समय एनडीए के पास 33 सीटें हैं। जिसमें से भाजपा के पास 22, एलजेपी के पास 6, आरएलएसपी के पास 3 और जेडीयू के पास दो सीटें हैं। एनडीए में इस समय पूरा ‘झगड़ा’ सीटों को लेकर मचा हुआ है। माना जाता है कि उपेन्द्र कुशवाहा को लगता है कि एनडीए में नीतीश कुमार की ‘मौजूदगी’ में उनकी राजनीति नहीं चमक पाएगी इसलिए उन्होंने महागठबंधन में जाने का ‘एक विकल्प’ खुला रखा है।
अब देखना होगा कि उपेन्द्र कुशवाहा की ‘राजनीति का ऊंट’ किस करवट बैठता है। बिहार में कुशवाहा समाज का वोटबैंक अच्छा खासा है। ऐसे में यदि एनडीए में सीटों के बंटवारे से उपेन्द्र कुशवाहा ‘संतुष्ट’ नहीं होते हैं तो माना जा रहा है कि वे महागठबंधन में जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह एनडीए और खासतौर से नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
AUG 27 (WTN) – यदि लोकसभा चुनाव पहले सबसे ज़्यादा ‘सियासी उठापटक’ हो रही है तो वो हो रही है बिहार में। लोकसभा चुनाव से काफी पहले बिहार की राजनीति में रोज नये-नये समीकरण बनते और बिगड़ते दिख रहे हैं। कुछ दिनों पहले भाजपा और जेडीयू के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर ‘तनातनी’ की खबरें सामने आईं थी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक ‘उच्च स्तर’ पर चर्चा होने के बाद इस बारे में सार्वजनिक बयानबाजी नहीं हो रही है।
जेडीयू से अलग बिहार में नई ‘सियासी खीर’ बनाने की कोशिश कर रहे केन्द्रीय मंत्री और आरएलएसपी नेता उपेन्द्र कुशवाहा के बयानों से लगता है कि वे इस समय ‘दो नावों’ की सवारी करने की कोशिश कर रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने शनिवार को पटना में एक कार्यक्रम में महागठबंधन में शामिल होने के संकेत दे दिए थे। उन्होंने वहां कहा था, “यदुवंशियों (यादवों) का दूध और कुशवंशियों (कुशवाहा समाज) का चावल मिल जाए तो खीर बढ़िया होगी और इस स्वादिष्ट व्यंजन को बनने से कोई रोक नहीं सकता है।“
लेकिन बिहार में ‘राजनीति का ऊंट’ किस दिन किस करवट बैठेगे कोई नहीं जानता है। शनिवार के अपने बयान से पलटते हुए अब उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा है, “ना आरजेडी से दूध ना बीजेपी से चीनी मांगा है। हमने अपनी पार्टी के लिए सभी समाज से समर्थन मांगा है। आरएलएसपी मज़बूत होगी तो एनडीए मज़बूत होगा और एनडीए मज़बूत होगा तो देश मज़बूत होगा और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री होंगे।”
उपेन्द्र कुशवाहा के महागठबंधन में जाने के ‘संकेत’ के बाद बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा था, “खीर एक अच्छा व्यंजन है।“ माना जाता है कि तेजस्वी यादव महागठबंधन में उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी को लेने में ‘काफी दिलचस्पी’ दिखा रहे हैं। बिहार में जाति की राजनीति इतनी ‘गहरी’ है कि कुशवाह समाज के वोट बैंक को महागठबंधन ‘दरकिनार’ नहीं कर सकता है।
कहा जा रहा है कि जेडीयू के एनडीए में शामिल होने के बाद 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा, आरएलएसपी और एलजेपी के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है और इसी के चलते समय-समय पर उपेन्द्र कुशवाहा महागठबंधन में जाने के ‘संकेत’ देते रहते हैं। यानि कहा जा सकता है कि उन्होंने 2019 के लिए ‘हर विकल्प’ खुले रखे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। इस समय एनडीए के पास 33 सीटें हैं। जिसमें से भाजपा के पास 22, एलजेपी के पास 6, आरएलएसपी के पास 3 और जेडीयू के पास दो सीटें हैं। एनडीए में इस समय पूरा ‘झगड़ा’ सीटों को लेकर मचा हुआ है। माना जाता है कि उपेन्द्र कुशवाहा को लगता है कि एनडीए में नीतीश कुमार की ‘मौजूदगी’ में उनकी राजनीति नहीं चमक पाएगी इसलिए उन्होंने महागठबंधन में जाने का ‘एक विकल्प’ खुला रखा है।
अब देखना होगा कि उपेन्द्र कुशवाहा की ‘राजनीति का ऊंट’ किस करवट बैठता है। बिहार में कुशवाहा समाज का वोटबैंक अच्छा खासा है। ऐसे में यदि एनडीए में सीटों के बंटवारे से उपेन्द्र कुशवाहा ‘संतुष्ट’ नहीं होते हैं तो माना जा रहा है कि वे महागठबंधन में जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह एनडीए और खासतौर से नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के लिए चिंता का कारण बन सकता है।