मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए बसपा की ‘तैयारी’
Tuesday - August 28, 2018 12:51 pm ,
Category : WTN HINDI
कांग्रेस से गठबंधन से पहले बसपा ने तैयार की ‘अपनी रिपोर्ट’
AUG 28 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए जैसे-जैसे समय पास आता जा रहा है, राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी ‘रणनीति’ बनाने में लगी हुईं हैं। जहां भाजपा ‘अपने दम’ पर पूरे प्रदेश में चुनाव लड़ने की रणनीति के तहत चुनावी मैदान में उतरेगी तो दूसरी तरफ कांग्रेस और बाकी अन्य दलों ने ‘गठबंधन’ के ज़रिये भाजपा को घेरने की रणनीति बनाई है ताकि भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ रोका जा सके।
मध्य प्रदेश के राजनीतिक हल्कों में काफी समय से चर्चा है कि कांग्रेस और बसपा दोनों ‘गठबंधन’ के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे। लेकिन अभी तक बस चर्चा ही है कि कांग्रेस और बसपा के बीच विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन होगा। इस बीच, कांग्रेस से गठबंधन से पहले बसपा ने चुनाव के लिए ‘ज़मीनी रिपोर्ट’ तैयार की है।
बसपा का मध्य प्रदेश की काफी सीटों पर ‘प्रभाव’ रहा है। 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने चार सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं बसपा ने 62 सीटों पर दस हज़ार से ज़्यादा और 17 सीटों पर तीस हज़ार से ज़्यादा वोट हासिल किए थे। इसी आधार पर बसपा ने इन सीटों पर खुद के ‘मज़बूत’ होने का दावा किया है। बसपा ने अपने सर्वे के आधार पर प्रदेश में खुद की स्थिति के बारे में पता किया तो बसपा के मुताबिक करीब 75 सीटों पर उसकी स्थिति ‘अच्छी’ है।
पिछले चुनाव में जिन सीटों पर बसपा को ‘अच्छे मत’ मिले थे उसके आधार पर बसपा ने 75 सीटों पर खुद के ‘मज़बूत’ होने का दावा किया है। कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश की इस रिपोर्ट को बसपा प्रमुख मायावती के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद हो सकता है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर यदि कांग्रेस के साथ गठबंधन होता है, तो सीटों का बंटवारा हो।
विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन को लेकर ‘संशय’ की स्थिति काफी समय से बनी हुई है। कई बार कांग्रेस नेताओं की ओर से ऐसे बयान आये हैं जिसके आधार पर लगता है कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन हो गया है, बस सीटों के बंटवारे पर फैसला होना है। लेकिन इस बारे में कोई भी ‘अधिकृत बयान’ ना तो कांग्रेस आलाकमान की तरफ से आया है और ना ही बसपा प्रमुख मायावती की ओर से।
मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा इन दोनों ही पार्टियों के बीच ‘मुख्य मुकाबला’ होता रहा है, लेकिन बसपा हर विधानसभा चुनाव में कुछ ना कुछ सीटों पर जीतने में ‘सफल’ रही है। पिछले चुनाव में बसपा ने चार सीटों पर जीत हासिल कर अपनी ताकत का अहसास करा दिया था। मध्य प्रदेश के यूपी से लगे क्षेत्र विंध्य, बुन्देलखण्ड और ग्वालियर-चम्बल में बसपा का ‘काफी प्रभाव’ है।
यदि कांग्रेस और बसपा दोनों ही पार्टियों ने गठबंधन करके विधानसभा चुनाव लड़ा तो इससे भाजपा के लिए ‘काफी चुनौती’ बढ़ जाएगी। कांग्रेस और बसपा के साथ चुनाव लड़ने से भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ रुकेगा जिसका पूरा फायदा कांग्रेस-बसपा गठबंधन को मिलेगा। कहा जा रहा है कि दोनों ही पार्टियां भाजपा को हराने के लिए गठबंधन कर सकती हैं, लेकिन इस गठबंधन में बसपा को कांग्रेस कितनी सीटें देती है इसी पर सभी की ‘निगाहें’ टिकी हुईं हैं।
AUG 28 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए जैसे-जैसे समय पास आता जा रहा है, राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी ‘रणनीति’ बनाने में लगी हुईं हैं। जहां भाजपा ‘अपने दम’ पर पूरे प्रदेश में चुनाव लड़ने की रणनीति के तहत चुनावी मैदान में उतरेगी तो दूसरी तरफ कांग्रेस और बाकी अन्य दलों ने ‘गठबंधन’ के ज़रिये भाजपा को घेरने की रणनीति बनाई है ताकि भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ रोका जा सके।
मध्य प्रदेश के राजनीतिक हल्कों में काफी समय से चर्चा है कि कांग्रेस और बसपा दोनों ‘गठबंधन’ के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे। लेकिन अभी तक बस चर्चा ही है कि कांग्रेस और बसपा के बीच विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन होगा। इस बीच, कांग्रेस से गठबंधन से पहले बसपा ने चुनाव के लिए ‘ज़मीनी रिपोर्ट’ तैयार की है।
बसपा का मध्य प्रदेश की काफी सीटों पर ‘प्रभाव’ रहा है। 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने चार सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं बसपा ने 62 सीटों पर दस हज़ार से ज़्यादा और 17 सीटों पर तीस हज़ार से ज़्यादा वोट हासिल किए थे। इसी आधार पर बसपा ने इन सीटों पर खुद के ‘मज़बूत’ होने का दावा किया है। बसपा ने अपने सर्वे के आधार पर प्रदेश में खुद की स्थिति के बारे में पता किया तो बसपा के मुताबिक करीब 75 सीटों पर उसकी स्थिति ‘अच्छी’ है।
पिछले चुनाव में जिन सीटों पर बसपा को ‘अच्छे मत’ मिले थे उसके आधार पर बसपा ने 75 सीटों पर खुद के ‘मज़बूत’ होने का दावा किया है। कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश की इस रिपोर्ट को बसपा प्रमुख मायावती के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद हो सकता है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर यदि कांग्रेस के साथ गठबंधन होता है, तो सीटों का बंटवारा हो।
विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन को लेकर ‘संशय’ की स्थिति काफी समय से बनी हुई है। कई बार कांग्रेस नेताओं की ओर से ऐसे बयान आये हैं जिसके आधार पर लगता है कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन हो गया है, बस सीटों के बंटवारे पर फैसला होना है। लेकिन इस बारे में कोई भी ‘अधिकृत बयान’ ना तो कांग्रेस आलाकमान की तरफ से आया है और ना ही बसपा प्रमुख मायावती की ओर से।
मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा इन दोनों ही पार्टियों के बीच ‘मुख्य मुकाबला’ होता रहा है, लेकिन बसपा हर विधानसभा चुनाव में कुछ ना कुछ सीटों पर जीतने में ‘सफल’ रही है। पिछले चुनाव में बसपा ने चार सीटों पर जीत हासिल कर अपनी ताकत का अहसास करा दिया था। मध्य प्रदेश के यूपी से लगे क्षेत्र विंध्य, बुन्देलखण्ड और ग्वालियर-चम्बल में बसपा का ‘काफी प्रभाव’ है।
यदि कांग्रेस और बसपा दोनों ही पार्टियों ने गठबंधन करके विधानसभा चुनाव लड़ा तो इससे भाजपा के लिए ‘काफी चुनौती’ बढ़ जाएगी। कांग्रेस और बसपा के साथ चुनाव लड़ने से भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ रुकेगा जिसका पूरा फायदा कांग्रेस-बसपा गठबंधन को मिलेगा। कहा जा रहा है कि दोनों ही पार्टियां भाजपा को हराने के लिए गठबंधन कर सकती हैं, लेकिन इस गठबंधन में बसपा को कांग्रेस कितनी सीटें देती है इसी पर सभी की ‘निगाहें’ टिकी हुईं हैं।