विश्लेषण: हज़ारों करोड़ के ‘घाटे’ में चल रहीं सरकारी कम्पनियां, सरकार के सामने ‘चुनौती’
Tuesday - August 28, 2018 4:33 pm ,
Category : WTN HINDI
2016-17 में सबसे ज़्यादा घाटा SAIL को, सरकार को लगी 3,187 करोड़ रुपयों की ‘चपत’
AUG 28 (WTN) - सरकारी कम्पनियों की हालत पर CAG की रिपोर्ट आपको ‘चौंका’ देगी। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि घाटे में चल रहे पीएसयू के कारण देश का हज़ारों करोड़ रुपया ‘डूब’ रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश की सरकारी कम्पनियों के घाटे का आंकड़ा रिकॉर्ड ‘एक लाख करोड़’ को पार कर गया है।
मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार में ही हर साल ‘30 हज़ार करोड़’ का पीएसयू कम्पनियों को घाटा हुआ है। पिछले दिनों संसद के मानसून सत्र में पेश हुई इस रिपोर्ट से पता चलता है कि ‘ख़राब प्रबंधन’ के कारण सार्वजनिक उपक्रम ‘बंदी’ के कगार पर पहुंच गये हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिन कम्पनियों की पूंजी में केंद्र या राज्य की 51 प्रतिशत या इससे अधिक हिस्सेदारी होती है, उन्हें ‘सार्वजनिक क्षेत्र’ के उपक्रम कहा जाता है।
जानकारी के मुताबिक, साल 2014-15 में 132 सार्वजनिक उपक्रमों को 30,861 करोड़ का सम्बन्धित वर्ष में नेट लॉस हुआ है। इस दौरान इन कम्पनियों का समग्र घाटा बढ़कर एक लाख करोड़ के पार यानी 1,08,051 करोड़ पर जा पहुंचा है। इससे अगले साल यानी 2015-16 में 153 उपक्रमों को 31,957 करोड़ का नेट लॉस नुकसान उठाना पड़ा। जिसके कारण समग्र घाटा 1,04,756 करोड़ रहा। इसी तरह 2016-17 में 157 कम्पनियों का नेट लॉस 30,678 करोड़ और समग्र घाटा 1,04,730 करोड़ रहा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेट लॉस से मतलब, सम्बन्धित वर्ष में नुकसान से है और समग्र घाटे से मतलब संचित घाटे से है। संचित घाटे की गणना पिछली सरकारों से लेकर वर्तमान सरकार तक में कम्पनियों के प्रदर्शन के आधार पर तय होती है।
कैग ने एक हज़ार करोड़ से ज़्यादा का नुकसान उठाने वाली सरकारी कम्पनियों की लिस्ट जारी की है। लिस्ट के अनुसार 2016-17 में ‘सबसे ज़्यादा’ नुकसान स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इण्डिया को नुकसान हुआ है। SAIL को इस वर्ष 3,187 करोड़ का घाटा झेलना पड़ा।
वहीं MTNL को 2,941 करोड़ रुपये का, हिंदुस्तान फ़ोटो फ़िल्म्स कम्पनी लिमिटेड को 2,917, यूनाइडेट इण्डिया इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड को 1,914 करोड़, ओरिएंटल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड को 1,691 करोड़ और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड को 1,263 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
अब जबकि सरकारी कम्पनियां इतने ‘बड़े घाटे’ में चल रही हैं तो ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्यों ना इन कम्पनियों में सरकार को ‘विनिवेश’ करना चाहिए। सरकार को इनमें ‘निजी स्वामित्व’ को बढ़ावा देना चाहिए ताकि इनके घाटे को कम किया जा सके। यदि सरकार ने इस तरफ़ ध्यान नहीं दिया तो साफ़ है कि इनका घाटा बढ़ता जाएगा। यदि घाटा बढ़ता गया तो राजकोषीय घाटा भी बढ़ता जाएगा जो कि सरकार के लिए ‘बुरी ख़बर’ है।
AUG 28 (WTN) - सरकारी कम्पनियों की हालत पर CAG की रिपोर्ट आपको ‘चौंका’ देगी। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि घाटे में चल रहे पीएसयू के कारण देश का हज़ारों करोड़ रुपया ‘डूब’ रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश की सरकारी कम्पनियों के घाटे का आंकड़ा रिकॉर्ड ‘एक लाख करोड़’ को पार कर गया है।
मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार में ही हर साल ‘30 हज़ार करोड़’ का पीएसयू कम्पनियों को घाटा हुआ है। पिछले दिनों संसद के मानसून सत्र में पेश हुई इस रिपोर्ट से पता चलता है कि ‘ख़राब प्रबंधन’ के कारण सार्वजनिक उपक्रम ‘बंदी’ के कगार पर पहुंच गये हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिन कम्पनियों की पूंजी में केंद्र या राज्य की 51 प्रतिशत या इससे अधिक हिस्सेदारी होती है, उन्हें ‘सार्वजनिक क्षेत्र’ के उपक्रम कहा जाता है।
जानकारी के मुताबिक, साल 2014-15 में 132 सार्वजनिक उपक्रमों को 30,861 करोड़ का सम्बन्धित वर्ष में नेट लॉस हुआ है। इस दौरान इन कम्पनियों का समग्र घाटा बढ़कर एक लाख करोड़ के पार यानी 1,08,051 करोड़ पर जा पहुंचा है। इससे अगले साल यानी 2015-16 में 153 उपक्रमों को 31,957 करोड़ का नेट लॉस नुकसान उठाना पड़ा। जिसके कारण समग्र घाटा 1,04,756 करोड़ रहा। इसी तरह 2016-17 में 157 कम्पनियों का नेट लॉस 30,678 करोड़ और समग्र घाटा 1,04,730 करोड़ रहा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेट लॉस से मतलब, सम्बन्धित वर्ष में नुकसान से है और समग्र घाटे से मतलब संचित घाटे से है। संचित घाटे की गणना पिछली सरकारों से लेकर वर्तमान सरकार तक में कम्पनियों के प्रदर्शन के आधार पर तय होती है।
कैग ने एक हज़ार करोड़ से ज़्यादा का नुकसान उठाने वाली सरकारी कम्पनियों की लिस्ट जारी की है। लिस्ट के अनुसार 2016-17 में ‘सबसे ज़्यादा’ नुकसान स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इण्डिया को नुकसान हुआ है। SAIL को इस वर्ष 3,187 करोड़ का घाटा झेलना पड़ा।
वहीं MTNL को 2,941 करोड़ रुपये का, हिंदुस्तान फ़ोटो फ़िल्म्स कम्पनी लिमिटेड को 2,917, यूनाइडेट इण्डिया इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड को 1,914 करोड़, ओरिएंटल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड को 1,691 करोड़ और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड को 1,263 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
अब जबकि सरकारी कम्पनियां इतने ‘बड़े घाटे’ में चल रही हैं तो ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्यों ना इन कम्पनियों में सरकार को ‘विनिवेश’ करना चाहिए। सरकार को इनमें ‘निजी स्वामित्व’ को बढ़ावा देना चाहिए ताकि इनके घाटे को कम किया जा सके। यदि सरकार ने इस तरफ़ ध्यान नहीं दिया तो साफ़ है कि इनका घाटा बढ़ता जाएगा। यदि घाटा बढ़ता गया तो राजकोषीय घाटा भी बढ़ता जाएगा जो कि सरकार के लिए ‘बुरी ख़बर’ है।