आरबीआई की रिपोर्ट से प्रधानमंत्री मोदी को ‘बड़ा झटका’
Wednesday - August 29, 2018 1:29 pm ,
Category : WTN HINDI
विपक्ष के निशाने पर प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा ने किया ‘तर्कहीन’ बचाव
AUG 29 (WTN) – विपक्ष हमेशा से ही नोटबंदी पर सवाल खड़े करता रहा है। कांग्रेस का तो यहां तक आरोप है कि नोटबंदी एक ‘बड़ा घोटाला’ है। विपक्ष के तमाम आरोपों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते आएं हैं कि नोटबंदी का फैसला काले धन पर लगाम लगाने के लिए लिया गया था जो कि ‘सफल’ रहा। लेकिन नोटबंदी को लेकर आज आई रिज़र्व बैंक ऑफ इण्डिया की सालाना रिपोर्ट प्रधानमंत्री मोदी के लिए किसी ‘बड़े झटके’ से कम नहीं है।
रिज़र्व बैंक की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी के दौरान 15 लाख 44 हज़ार करोड़ रुपए के नोट बंद किए गए थे, और उनमें से 15 लाख 31 हज़ार करोड़ रुपये के नोट वापस आए हैं। सिर्फ़ 13 हज़ार करोड़ रुपये ही सिस्टम से बाहर हए हैं। यानि की ‘99 प्रतिशत’ नोट वापस चलन में आ गए हैं।
आरबीआई के इन फाइनल आंकड़ों के जारी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से विपक्ष सवाल कर रहा है कि जब 99% पैसा वापस आ गया तो नोटबंदी का ‘फायदा’ क्या हुआ? विपक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की नोटबंदी एक बहुत ‘बड़ी विफलता’ है।
इस बारे में कांग्रेस का कहना है कि आखिर नोटबंदी से क्या हासिल हुआ? विपक्ष का आरोप है कि नोटबंदी से बड़ा आर्थिक घोटाला भारत के इतिहास में नहीं हुआ है। नोटबंदी के कारण करीब 140 लोगों की मौत बैंक या एटीएम से रुपये निकालते समय हुई जिसका किसी ने कोई भी अफ़सोस नहीं जताया।
वहीं इस बारे में भाजपा का कहना है कि नोटबंदी का ‘मतलब’ सही से नहीं समझा गया है। नोटबंदी पर भाजपा का तर्क है कि प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी के ज़रिये कई ‘लक्ष्य’ हासिल कर लिए हैँ। भाजपा के मुताबिक नोटबंदी एक ‘संगठित सुधार’ है। भाजपा नोटबंदी के बाद वापस आए नोटों के बारे में तर्क दे रही है कि ऐसा नहीं कहा गया था कि नोट वापस नहीं आएंगे, लेकिन इसके साथ ये भी बताना था कि नोट आए कहां से, इसके साथ ही हिसाब भी देना था।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 8 नवम्बर 2016 को रात 12 बजे से 1,000 और 500 के नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे। इससे देश की 86% करंसी यानी 15.44 लाख करोड़ रुपए के नोट चलन से बाहर हो गए थे। जानकारों के मुताबिक ये रकम 60 छोटे देशों की जीडीपी के बराबर है। इससे पहले नोटबंदी का ऐसा फैसला 1978 में हुआ था, तब जनता पार्टी सरकार ने 1,000, 5,000 और 10,000 हज़ार के नोटों को बंद कर दिया था।
आरबीआई की रिपोर्ट के बाद विपक्ष अब नोटबंदी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जमकर ‘निशाना’ साधेगा। विपक्ष का आरोप है कि नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था पीछे चली गई, उद्योग-धंधे बंद हुए, लाखों की संख्या में लोग बेरोज़गार हुए और 140 लोगों की मृत्यु हो गई।
आरबीआई की रिपोर्ट के आधार पर यदि नोटबंदी को ‘विफल’ दिखाने में विपक्ष ‘सफल’ हो गया तो साल के अंत में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना भी करना पड़ सकता है। कहा जाता है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद सामान्य और पिछड़ा वर्ग भाजपा से ‘नाराज़’ चल रहा है। यदि ये दोनों ही कारणों को ध्यान में रखते हुए मतदान हुआ तो भाजपा के लिए यह तीनों राज्यों में जीत ‘सपना’ ना बन जाए।
AUG 29 (WTN) – विपक्ष हमेशा से ही नोटबंदी पर सवाल खड़े करता रहा है। कांग्रेस का तो यहां तक आरोप है कि नोटबंदी एक ‘बड़ा घोटाला’ है। विपक्ष के तमाम आरोपों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते आएं हैं कि नोटबंदी का फैसला काले धन पर लगाम लगाने के लिए लिया गया था जो कि ‘सफल’ रहा। लेकिन नोटबंदी को लेकर आज आई रिज़र्व बैंक ऑफ इण्डिया की सालाना रिपोर्ट प्रधानमंत्री मोदी के लिए किसी ‘बड़े झटके’ से कम नहीं है।
रिज़र्व बैंक की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी के दौरान 15 लाख 44 हज़ार करोड़ रुपए के नोट बंद किए गए थे, और उनमें से 15 लाख 31 हज़ार करोड़ रुपये के नोट वापस आए हैं। सिर्फ़ 13 हज़ार करोड़ रुपये ही सिस्टम से बाहर हए हैं। यानि की ‘99 प्रतिशत’ नोट वापस चलन में आ गए हैं।
आरबीआई के इन फाइनल आंकड़ों के जारी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से विपक्ष सवाल कर रहा है कि जब 99% पैसा वापस आ गया तो नोटबंदी का ‘फायदा’ क्या हुआ? विपक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की नोटबंदी एक बहुत ‘बड़ी विफलता’ है।
इस बारे में कांग्रेस का कहना है कि आखिर नोटबंदी से क्या हासिल हुआ? विपक्ष का आरोप है कि नोटबंदी से बड़ा आर्थिक घोटाला भारत के इतिहास में नहीं हुआ है। नोटबंदी के कारण करीब 140 लोगों की मौत बैंक या एटीएम से रुपये निकालते समय हुई जिसका किसी ने कोई भी अफ़सोस नहीं जताया।
वहीं इस बारे में भाजपा का कहना है कि नोटबंदी का ‘मतलब’ सही से नहीं समझा गया है। नोटबंदी पर भाजपा का तर्क है कि प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी के ज़रिये कई ‘लक्ष्य’ हासिल कर लिए हैँ। भाजपा के मुताबिक नोटबंदी एक ‘संगठित सुधार’ है। भाजपा नोटबंदी के बाद वापस आए नोटों के बारे में तर्क दे रही है कि ऐसा नहीं कहा गया था कि नोट वापस नहीं आएंगे, लेकिन इसके साथ ये भी बताना था कि नोट आए कहां से, इसके साथ ही हिसाब भी देना था।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 8 नवम्बर 2016 को रात 12 बजे से 1,000 और 500 के नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे। इससे देश की 86% करंसी यानी 15.44 लाख करोड़ रुपए के नोट चलन से बाहर हो गए थे। जानकारों के मुताबिक ये रकम 60 छोटे देशों की जीडीपी के बराबर है। इससे पहले नोटबंदी का ऐसा फैसला 1978 में हुआ था, तब जनता पार्टी सरकार ने 1,000, 5,000 और 10,000 हज़ार के नोटों को बंद कर दिया था।
आरबीआई की रिपोर्ट के बाद विपक्ष अब नोटबंदी पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जमकर ‘निशाना’ साधेगा। विपक्ष का आरोप है कि नोटबंदी से देश की अर्थव्यवस्था पीछे चली गई, उद्योग-धंधे बंद हुए, लाखों की संख्या में लोग बेरोज़गार हुए और 140 लोगों की मृत्यु हो गई।
आरबीआई की रिपोर्ट के आधार पर यदि नोटबंदी को ‘विफल’ दिखाने में विपक्ष ‘सफल’ हो गया तो साल के अंत में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना भी करना पड़ सकता है। कहा जाता है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद सामान्य और पिछड़ा वर्ग भाजपा से ‘नाराज़’ चल रहा है। यदि ये दोनों ही कारणों को ध्यान में रखते हुए मतदान हुआ तो भाजपा के लिए यह तीनों राज्यों में जीत ‘सपना’ ना बन जाए।